08 May, 2026
विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026
Fri 08 May, 2026
संदर्भ :
- अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026 (World Migration Report 2026) जारी किया है।
मुख्य बिन्दु :
- संस्करण : 13वां
- यह रिपोर्ट दो भागों में विभाजित है: भाग I (डेटा और आँकड़े) और भाग II (जलवायु गतिशीलता, AI का प्रभाव और विकलांगता जैसे जटिल मुद्दों का विश्लेषण)।
- रिपोर्ट में प्रवासन प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग और इससे जुड़ी गोपनीयता व पूर्वाग्रह की चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है।
- विश्लेषण : वैश्विक स्तर पर प्रवासन के बदलते स्वरूप, आर्थिक योगदान और विस्थापन की चुनौतियों का
- प्रवासी जनसंख्या: 2024 के मध्य तक दुनिया भर में अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या बढ़कर 30.4 करोड़ हो गई है, जो कुल वैश्विक जनसंख्या का लगभग 3.7% है।
- प्रवासी श्रमिक: कुल प्रवासियों में से लगभग 16.8 करोड़ (60%) प्रवासी श्रमिक हैं।
- प्रेषण (Remittances): 2024 में वैश्विक प्रेषण प्रवाह लगभग 905 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया, जिसमें से 685 बिलियन डॉलर निम्न और मध्यम आय वाले देशों को प्राप्त हुए।
- शीर्ष प्रेषण प्राप्तकर्ता: भारत 137.67 बिलियन डॉलर के साथ प्रेषण प्राप्त करने के मामले में दुनिया में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है।(2020 में 83.15 अरब डॉलर)
भारत के प्रमुख कॉरिडोर (Corridors):
- भारत-UAE कॉरिडोर वैश्विक स्तर पर पाँचवाँ सबसे बड़ा प्रवासन गलियारा बन गया है।
- भारत-US कॉरिडोर दुनिया का छठा सबसे बड़ा प्रवासन गलियारा है।
- भारतीय प्रवासी: अमेरिका में भारतीय समुदाय दूसरा सबसे बड़ा विदेशी मूल का समूह है (लगभग 32 लाख लोग)।
- प्रमुख प्रवासन गलियारे (Global Corridors) :
- मेक्सिको-अमेरिका: दुनिया का सबसे बड़ा गलियारा (लगभग 1.1 करोड़ प्रवासी)
- अफगानिस्तान-ईरान
- सीरिया-तुर्की
- रूस-यूक्रेन
- भारत-संयुक्त अरब अमीरात
- भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका
भारत-संयुक्त राज्य अमेरिका गलियारा दुनिया में छठा सबसे बड़ा प्रवासन गलियारा और मेक्सिको-अमेरिकी गलियारे के बाद उत्तरी अमेरिका से जुड़ा दूसरा सबसे बड़ा गलियारा था।
भारतीय प्रवासियों का रणनीतिक प्रभाव (Soft Power) :
- USINPAC की भूमिका: यह संगठन अमेरिका में भारतीय हितों की पैरवी (Lobbying) करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। यह 'ट्रैक II डिप्लोमेसी' का एक बेहतरीन उदाहरण है, जो वीज़ा नीतियों (H-1B) और व्यापारिक समझौतों को भारत के अनुकूल बनाने में मदद करता है।
- रक्षा और तकनीक: भारतीय मूल के पेशेवरों की उपस्थिति के कारण ही iCET (Initiative on Critical and Emerging Technology) जैसे रक्षा और तकनीकी सहयोग संभव हो पाए हैं।
प्रमुख एशियाई प्रवासन गलियारे (Asian Corridors) :
- बांग्लादेश-भारत (11वाँ सबसे बड़ा): यह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा कॉरिडोर बना हुआ है। यूपीएससी के लिए यह 'पड़ोस प्रथम' (Neighborhood First) नीति और सीमा प्रबंधन (Border Management) के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
- भारत-सऊदी अरब (14वाँ सबसे बड़ा): यह खाड़ी क्षेत्र (GCC) के साथ भारत के ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक संबंधों को मजबूती देता है। भारत-UAE के बाद यह खाड़ी देशों में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्रवासन केंद्र है।
विस्थापन में योगदान देने वाले प्रमुख संघर्ष :
- सूडान: हाल के वर्षों में यहाँ सबसे तेज़ गति से विस्थापन बढ़ा है। संघर्ष के कारण लाखों लोग चाड, मिस्र और दक्षिण सूडान में शरण लेने को मजबूर हुए हैं।
- यूक्रेन: रूसी आक्रमण के बाद यह यूरोप का सबसे बड़ा विस्थापन संकट बना हुआ है।
- गाजा: यहाँ की लगभग पूरी आबादी आंतरिक रूप से विस्थापित (Internally Displaced) हो चुकी है, जिससे एक गंभीर मानवीय संकट उत्पन्न हुआ है।
- म्यांमार: सैन्य तख्तापलट और रोहिंग्या संकट के कारण दक्षिण-पूर्व एशिया में अस्थिरता बनी हुई है। भारत और बांग्लादेश के संदर्भ में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
- सीरिया और यमन: ये दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले विस्थापन संकटों में से हैं, जहाँ लाखों लोग शरणार्थी के रूप में पड़ोस के देशों (जैसे तुर्की और जॉर्डन) में रह रहे हैं।
- कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC): यहाँ संसाधन-आधारित संघर्ष (Resource-based conflict) ने करोड़ों लोगों को विस्थापित किया है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) :
- स्थापना: 1951
- मुख्यालय: जेनेवा, स्विट्जरलैंड
- सदस्य देश: 175 सदस्य देश और 8 पर्यवेक्षक (Observer) देश
- वर्तमान महानिदेशक (Director General): एमी पोप (Amy Pope) — यह इस पद पर बैठने वाली पहली महिला हैं
- UN के साथ संबंध: सितंबर 2016 में IOM संयुक्त राष्ट्र (UN) से संबद्ध संगठन (Related Organization) बना
प्रमुख रिपोर्ट और पहल :
- विश्व प्रवासन रिपोर्ट (World Migration Report): यह IOM का प्रमुख प्रकाशन है जो वैश्विक प्रवासन प्रवृत्तियों का डेटा प्रस्तुत करता है।
- ग्लोबल कॉम्पैक्ट फॉर माइग्रेशन (GCM): IOM इस पहले अंतर-सरकारी समझौते के कार्यान्वयन और समीक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- विस्थापन ट्रैकिंग मैट्रिक्स (DTM): संकट के समय विस्थापित आबादी की गतिविधियों और जरूरतों की निगरानी करने के लिए यह IOM का एक प्रमुख उपकरण है।
भारत का संदर्भ: भारत 2008 में IOM का सदस्य बना था। यह संगठन भारत सरकार के साथ मिलकर सुरक्षित और कानूनी प्रवासन को बढ़ावा देने, मानव तस्करी रोकने और संकट के समय विदेशों में फंसे भारतीयों की सहायता के लिए काम करता है।









