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"कपास उत्पादकता मिशन"

Wed 06 May, 2026

संदर्भ :

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई 2026 को 5,659.22 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ 'कपास उत्पादकता मिशन' (2026-27 से 2030-31) को मंजूरी दी।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • कुल परिव्यय: ₹5,659.22 करोड़
  • अवधि: 5 वर्ष (2026-27 से 2030-31)
  • उत्पादकता लक्ष्य: लिंट (lint) उत्पादकता को 440 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किग्रा/हेक्टेयर करना
  • उत्पादन लक्ष्य: 2030-31 तक कुल उत्पादन 498 लाख गांठ (170 किग्रा प्रति गांठ) तक ले जाना
  • लाभार्थी: लगभग 32 लाख किसान इस मिशन से सीधे लाभान्वित होंगे

प्रमुख रणनीतियाँ और विशेषताएँ :

यह मिशन प्रधानमंत्री के '5F' विजन (Farm to Fibre, Fibre to Factory, Factory to Fashion, Fashion to Foreign) पर आधारित है:

  • उन्नत बीज तकनीक: जलवायु-अनुकूल, उच्च उपज देने वाली और कीट-प्रतिरोधी (जैसे पिंक बोलवर्म से सुरक्षित) बीज किस्मों का विकास करना।

खेती की आधुनिक पद्धतियां:

  • HDPS (High-Density Planting System): प्रति इकाई क्षेत्र में अधिक पौधों के माध्यम से उपज बढ़ाना।
  • ELS (Extra Long Staple) कपास: उच्च गुणवत्ता वाले लंबे रेशे वाली कपास की खेती को बढ़ावा देना ताकि आयात निर्भरता कम हो।

बुनियादी ढांचा और गुणवत्ता:

  • लगभग 2,000 जिनिंग और प्रसंस्करण इकाइयों का आधुनिकीकरण
  • कस्तूरी कॉटन भारत (Kasturi Cotton Bharat): भारतीय कपास की ब्रांडिंग, ट्रेसिबिलिटी और प्रमाणन सुनिश्चित करना
  • कपास में कचरे (trash) के स्तर को 2% से कम करने का लक्ष्य
  • डिजिटलीकरण और बाजार: पारदर्शी मूल्य निर्धारण के लिए स्थानीय मंडियों का डिजिटल एकीकरण
  • विविधीकरण: कपास के साथ-साथ अलसी, बांस, केला और सिसल जैसे प्राकृतिक रेशों (natural fibres) के उपयोग को बढ़ावा देना।

कार्यान्वयन तंत्र (Implementation) :

  • नोडल मंत्रालय: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय संयुक्त रूप से।
  • संस्थागत सहयोग: इसमें 10 ICAR संस्थान, 1 CSIR संस्थान और 10 अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना (AICRP) केंद्र शामिल होंगे।
  • भौगोलिक कवरेज: शुरुआती चरण में 14 राज्यों के 140 जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

कपास उत्पादकता मिशन :

  • घोषणा: केंद्रीय बजट 2025-26
  • बजट परिव्यय: ₹5,659.22 करोड़
  • समय सीमा: 5 वर्ष (2026-27 से 2030-31)
  • नोडल मंत्रालय: कृषि मंत्रालय + वस्त्र मंत्रालय (Jointly)
  • सहयोगी संस्थान: ICAR के 10 संस्थान + CSIR
  • दायरा: 14 राज्यों के 140 जिले

कपास :

  • पौधे का प्रकार: यह एक खरीफ (Kharif) फसल है।
  • इसे व्हाइट गोल्ड" कहा जाता है
  • भारत चीन के बाद कपास का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, जिसके पास विश्व स्तर पर खेती का सबसे बड़ा क्षेत्र है। (उत्पादकता के मामले में इसका स्थान काफी नीचे है)यह वैश्विक कपास उत्पादन में लगभग 20% का योगदान देता है।
  • कपास उत्पादक राज्य: वर्ष 2024-25 के अनुमानों के अनुसार, भारत में सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना और कर्नाटक हैं।
  • भारत में कपास का अधिकांश उत्पादन 9 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों से होता है।
  • इन्हें तीन भिन्न कृषि-जलवायु (एग्रो-इकोलॉजिकल) क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है, जो इस प्रकार हैं:
    • उत्तरी क्षेत्र : पंजाब, हरियाणा और राजस्थान
    • मध्य क्षेत्र : गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश
    • दक्षिणी क्षेत्र : तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक
  • मिट्टी: इसके लिए 'रेगुर' या काली मिट्टी (Black Soil) सबसे उपयुक्त होती है। इसे 'कपास मृदा' भी कहते हैं।
  • जलवायु: उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय (21°C से 30°C तापमान)।
  • वर्षा: 50 से 100 सेमी.।
  • विशेष परिस्थिति: फसल के पकने के समय 210 पाला-मुक्त दिन (Frost-free days) और खिली हुई धूप अनिवार्य है।

महत्वपूर्ण मापन एवं संस्थान

  • गांठ (Bale): कपास के व्यापारिक वजन को 'गांठ' में मापा जाता है। भारत में 1 गांठ = 170 किलोग्राम होती है।
  • उपयोग: इसका रेशा (Fibre) कपड़ा उद्योग में और बीज (Binola) तेल व पशु आहार बनाने में काम आता है।

संस्थान:

  • केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (CICR): नागपुर, महाराष्ट्र
  • भारतीय कपास निगम (CCI): नवी मुंबई

भारत सरकार ने कपास उद्योग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं।

NFSM के अंतर्गत कपास विकास कार्यक्रम (2014-15) :

  • 'राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन' (NFSM) के तहत इसे कपास उत्पादक राज्यों में उत्पादकता बढ़ाने के लिए लागू किया गया था।
  • उद्देश्य: उन्नत कृषि तकनीकों के माध्यम से प्रति हेक्टेयर कपास की पैदावार बढ़ाना।
  • रणनीति: इसमें 'फ्रंटलाइन प्रदर्शन' (Field Demonstrations), किसानों का प्रशिक्षण, और कीट प्रबंधन (IPM) पर ध्यान केंद्रित किया गया। यह मुख्य रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में किसानों की आय सुधारने के लिए था।

राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) – 2020 :

  • इसका उद्देश्य भारत को तकनीकी वस्त्रों (जैसे मेडिकल, सैन्य, और ऑटोमोबाइल ग्रेड फैब्रिक) में वैश्विक अग्रणी बनाना है।
  • अवधि: 4 वर्ष (2020-21 से 2023-24 तक)।
  • चार स्तंभ: अनुसंधान एवं विकास (R&D), संवर्धन और बाजार विकास, निर्यात संवर्धन, और शिक्षा/प्रशिक्षण।
  • लक्ष्य: घरेलू बाजार का विस्तार करना और तकनीकी वस्त्रों के आयात पर निर्भरता कम करना।

मेगा निवेश वस्त्र पार्क (MITRA) :

  • इसे 'PM MITRA' योजना के नाम से भी जाना जाता है, जो भारतीय वस्त्र उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए है।
  • 5F विजन: फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन, और फैशन से फॉरेन।
  • सुविधा: ये एकीकृत पार्क हैं जहाँ कताई, बुनाई, प्रसंस्करण और छपाई एक ही स्थान पर होती है, जिससे लॉजिस्टिक लागत में भारी कमी आती है।

कॉट-एली (Cott-Ally) मोबाइल ऐप :

  • यह भारतीय कपास निगम (CCI) द्वारा विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
  • लाभ: इसके माध्यम से किसान अपनी फसल की बिक्री की स्थिति, भुगतान की जानकारी, नजदीकी खरीद केंद्र (Procurement Centres) और कपास की गुणवत्ता की जानकारी सीधे अपने फोन पर प्राप्त कर सकते हैं।
  • पारदर्शिता: यह बिचौलियों की भूमिका कम कर किसानों को सरकारी MSP का सीधा लाभ दिलाने में मदद करता है।

कपास संवर्द्धन और उपभोग समिति (COCPC) :

  • यह वस्त्र मंत्रालय के तहत एक सलाहकार निकाय है (पहले इसे 'कॉटन एडवाइजरी बोर्ड' के नाम से जाना जाता था)।
  • कार्य: यह समिति कपास के उत्पादन, उपभोग, आयात और निर्यात का आधिकारिक डेटा/अनुमान तैयार करती है।
  • महत्व: इसकी रिपोर्टों के आधार पर सरकार निर्यात नीति और बाजार हस्तक्षेप (जैसे MSP संचालन) पर निर्णय लेती है। इसमें सरकार, उद्योग और किसान प्रतिनिधियों का समन्वय होता है।

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