‘पंचायत उन्नति सूचकांक (PDI) 2.0’ की रिपोर्ट
 
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‘पंचायत उन्नति सूचकांक (PDI) 2.0’ की रिपोर्ट

Wed 29 Apr, 2026

संदर्भ :

  • पंचायती राज मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस' के उपलक्ष्य में वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए ‘पंचायत उन्नति सूचकांक (PDI) 2.0’ की रिपोर्ट जारी की है।

PDI 2.0 क्या है? :

  • PDI एक सांख्यिकीय उपकरण है जो पंचायतों के विकास की स्थिति का आकलन करता है। PDI 2.0 पिछली संस्करण का उन्नत रूप है, जिसे सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के स्थानीयकरण (LSDG) के साथ जोड़ा गया है।
  • उद्देश्य: पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और विकास की कमियों (Gap) की पहचान करना।
  • आधार: यह डेटा-आधारित शासन (Data-driven Governance) पर केंद्रित है।

विश्लेषण के मुख्य स्तंभ (9 थीम्स) :

  • गरीबी मुक्त और उन्नत आजीविका वाली पंचायत
  • स्वस्थ पंचायत
  • बाल हितैषी पंचायत
  • जल पर्याप्त पंचायत
  • स्वच्छ और हरित पंचायत
  • आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचे वाली पंचायत
  • सामाजिक रूप से सुरक्षित पंचायत
  • सुशासन वाली पंचायत
  • महिला हितैषी पंचायत

श्रेणीवार वर्गीकरण एवं स्कोरिंग मॉडल :

  • अचीवर (Grade A+): 90% से अधिक स्कोर (नीला)
  • फ्रंट रनर (Grade A): 75% - 90% स्कोर (हरा) — इस श्रेणी में 3,635 पंचायतें शामिल हैं
  • परफॉर्मर (Grade B): 60% - 75% स्कोर (एम्बर) — यह सबसे बड़ा समूह है, जिसमें 45.72% पंचायतें आती हैं
  • एस्पिरेंट (Grade C): 40% - 60% स्कोर (नारंगी)
  • बिगिनर (Grade D): 40% से कम स्कोर (लाल)
  • शीर्ष प्रदर्शन करने वाली पंचायत: त्रिपुरा के सेपाहिजाला जिले की जुगल किशोर नगर ग्राम समिति 88.44 के स्कोर के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान पर रही।
  • राज्यों का प्रदर्शन: त्रिपुरा, केरल और ओडिशा ने राज्य स्तर पर असाधारण प्रदर्शन किया है।
  • विशेष सफलता: 'गरीबी मुक्त और उन्नत आजीविका' (Theme 1) के तहत 3,313 पंचायतों ने 'अचीवर' (A+) ग्रेड प्राप्त किया

पंचायती राज :

  • पंचायती राज भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) की एक प्रणाली है, जिसे 1992 के 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा संवैधानिक दर्जा दिया गया

त्रिस्तरीय संरचना :

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243B के तहत पंचायती राज संस्थाओं के लिए एक त्रिस्तरीय संरचना (Three-tier Structure) का प्रावधान किया गया है

1. ग्राम स्तर (Gram Panchayat) : 

  • इकाई: ग्राम पंचायत
  • प्रमुख: मुखिया/सरपंच/प्रधान (इनका चुनाव राज्य कानून के अनुसार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो सकता है)
  • सदस्य: ग्राम पंचायत के वार्ड सदस्य, जिनका चुनाव सीधे गाँव के मतदाताओं द्वारा होता है।
  • भूमिका: स्थानीय विकास योजनाओं को लागू करना और बुनियादी सुविधाओं (सफाई, प्रकाश, पानी) का प्रबंधन करना

2. मध्यवर्ती स्तर (Block/Mandal Level) :

  • इकाई: पंचायत समिति (विभिन्न राज्यों में इसे जनपद पंचायत या मंडल परिषद भी कहा जाता है)
  • प्रमुख: अध्यक्ष/प्रधान (इनका चुनाव निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है)
  • सदस्य: इस क्षेत्र से सीधे चुने गए सदस्य, साथ ही क्षेत्र के विधायक और सांसद भी इसके सदस्य हो सकते हैं।
  • भूमिका: यह ग्राम पंचायतों और जिला परिषद के बीच एक कड़ी के रूप में कार्य करती है और ब्लॉक स्तर पर विकास योजनाओं का समन्वय करती है।

3. जिला स्तर (District Level) : 

  • इकाई: जिला परिषद
  • प्रमुख: अध्यक्ष/चेयरमैन (इनका चुनाव भी निर्वाचित सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से होता है)
  • सदस्य: जिले से सीधे निर्वाचित सदस्य, सभी पंचायत समितियों के अध्यक्ष, और जिले के सांसद व विधायक
  • भूमिका: यह जिले की सभी पंचायत समितियों की गतिविधियों का निरीक्षण करती है, बजट को मंजूरी देती है और राज्य सरकार को सलाह देती है।

महत्वपूर्ण समितियाँ :

  • बलवंत राय मेहता समिति (1957): इसने त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का सुझाव दिया था
  • अशोक मेहता समिति (1977): इसने द्विस्तरीय (Two-tier) संरचना की सिफारिश की थी
  • एल.एम. सिंघवी समिति (1986): इसने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की पुरजोर सिफारिश की थी

संवैधानिक प्रावधान :

  • संविधान का भाग: इसे संविधान के भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243O) में शामिल किया गया है

 

 

  • अनुच्छेद 243 (परिभाषाएँ): इसमें 'ग्राम सभा', 'पंचायत' और 'पंचायत क्षेत्र' जैसी महत्वपूर्ण शब्दावलियों को परिभाषित किया गया है।
  • अनुच्छेद 243A (ग्राम सभा): यह पंचायती राज की बुनियादी इकाई है। इसमें गाँव के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं। इसकी शक्तियाँ राज्य विधानमंडल द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
  • अनुच्छेद 243B (पंचायतों का गठन): त्रि-स्तरीय प्रणाली का प्रावधान (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर)। अपवाद: 20 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों में मध्यवर्ती स्तर (Block Level) अनिवार्य नहीं है।
  • अनुच्छेद 243C (पंचायतों की संरचना): सभी सीटों पर चुनाव प्रत्यक्ष मतदान द्वारा होगा। अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया राज्य विधानमंडल तय करेगा।

अनुच्छेद 243D (स्थानों का आरक्षण):

  • SC/ST के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण।
  • महिलाओं के लिए कम से कम 1/3 (33%) सीटें आरक्षित (अध्यक्ष पद सहित)।
  • अनुच्छेद 243E (पंचायतों की अवधि): कार्यकाल 5 वर्ष। यदि पंचायत भंग होती है, तो 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।
  • अनुच्छेद 243F (सदस्यता के लिए अयोग्यता): किसी भी व्यक्ति को 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता (जबकि विधानमंडल के लिए 25 वर्ष है)।
  • अनुच्छेद 243G (शक्तियाँ, प्राधिकार और उत्तरदायित्व): पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ बनाने की शक्ति। इसमें 11वीं अनुसूची के 29 विषय शामिल हैं।
  • अनुच्छेद 243H (कर लगाने की शक्ति): पंचायतों को कर, शुल्क और टोल लगाने तथा सरकारी निधि से सहायता अनुदान प्राप्त करने का अधिकार।
  • अनुच्छेद 243I (राज्य वित्त आयोग): राज्यपाल द्वारा हर 5 वर्ष में गठन, जो पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।
  • अनुच्छेद 243K (राज्य निर्वाचन आयोग): पंचायतों के चुनावों के संचालन, निर्देशन और नियंत्रण के लिए एक स्वतंत्र निकाय।
  • अनुच्छेद 243O (न्यायालयों के हस्तक्षेप पर रोक): निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन या सीटों के आवंटन से संबंधित मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
  • अनुसूची: 11वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों के कार्यक्षेत्र के 29 विषय शामिल हैं।

 

 

1. कृषि और संबद्ध क्षेत्र :

  1. कृषि, जिसके अंतर्गत कृषि विस्तार भी है
  2. भूमि सुधार, भूमि संगठन का कार्यान्वयन, भूमि संरक्षण
  3. लघु सिंचाई, जल प्रबंधन और नदियों के बीच जल संचयन
  4. पशुपालन, डेयरी उद्योग और कुक्कुट पालन
  5. मत्स्य पालन
  6. सामाजिक वानिकी और फार्म वानिकी
  7. लघु वन उत्पाद

2. ग्रामीण विकास और बुनियादी ढांचा :

  1. लघु उद्योग, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग भी शामिल हैं।
  2. खादी, ग्रामोद्योग और कुटीर उद्योग
  3. ग्रामीण आवासन (Rural Housing)
  4. पेयजल
  5. ईंधन और चारा
  6. सड़कें, पुल, पुलिया, नौकाघाट, जलमार्ग और संचार के अन्य साधन
  7. ग्रामीण विद्युतीकरण, जिसके अंतर्गत विद्युत का वितरण भी है
  8. गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत

3. सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र :

  1. गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम
  2. शिक्षा, जिसके अंतर्गत प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय भी हैं
  3. तकनीकी प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा
  4. वयस्क और अनौपचारिक शिक्षा
  5. पुस्तकालय
  6. सांस्कृतिक गतिविधियाँ
  7. बाजार और मेले

4. स्वास्थ्य और कल्याण : 

  1. स्वास्थ्य और स्वच्छता (अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और औषधालय)
  2. पारिवारिक कल्याण
  3. महिला और बाल विकास
  4. समाज कल्याण, जिसमें विकलांग और मानसिक रूप से मंद व्यक्तियों का कल्याण भी शामिल है
  5. कमजोर वर्गों का कल्याण (विशेषकर SC और ST का)
  6. सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS)
  7. सामुदायिक आस्तियों (Community Assets) का रखरखाव
  • राज्य सूची का विषय: 'स्थानीय स्वशासन' मूल रूप से राज्य सूची (State List) का विषय है।

मुख्य विशेषताएँ :

  • ग्राम सभा: यह पंचायत राज प्रणाली का आधार है, जिसमें गाँव के सभी पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं।
  • आरक्षण: अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और महिलाओं (कम से कम 1/3 सीटें) के लिए आरक्षण अनिवार्य है।
  • कार्यकाल: पंचायतों का कार्यकाल 5 वर्ष निश्चित किया गया है। समय से पहले भंग होने पर 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है।
  • राज्य चुनाव आयोग: चुनावों के निष्पक्ष संचालन के लिए हर राज्य में एक स्वतंत्र राज्य चुनाव आयोग का प्रावधान है।
  • राज्य वित्त आयोग: पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए हर 5 साल में इसके गठन का प्रावधान है।
  • पहली शुरुआत: आधुनिक भारत में पहली बार 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा पंचायती राज व्यवस्था का उद्घाटन किया गया था।

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