'SAARC मुद्रा स्वैप ढांचे' के तहत मालदीव को 30 बिलियन रुपये की निकासी की मंजूरी
 
  • Mobile Menu
HOME BUY MAGAZINEnew course icon
LOG IN SIGN UP

Sign-Up IcanDon't Have an Account?


SIGN UP

 

Login Icon

Have an Account?


LOG IN
 

or
By clicking on Register, you are agreeing to our Terms & Conditions.
 
 
 

or
 
 




'SAARC मुद्रा स्वैप ढांचे' के तहत मालदीव को 30 बिलियन रुपये की निकासी की मंजूरी

Sat 25 Apr, 2026

संदर्भ :

  • भारत ने 'SAARC स्वाइप व्यवस्था' के तहत मालदीव को 30 बिलियन रुपये की वित्तीय सहायता की मंजूरी दी।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • घोषणा : 24 अप्रैल 2026 को माले स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा
  • यह यहायता मालदीव के साथ मजबूत आर्थिक संबंधों और भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति को रेखांकित करती है

संस्थागत ढांचा:

  • यह निकासी 'सार्क देशों के लिए मुद्रा स्वैप व्यवस्था पर ढांचा (2024-2027)' के तहत दी गई है।
  • इस समझौते पर अक्टूबर 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़्ज़ू की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और मालदीव मौद्रिक प्राधिकरण (MMA) के बीच हस्ताक्षर किया गया था

INR स्वैप विंडो:

  • 30 बिलियन रुपये की यह सहायता विशेष रूप से INR स्वैप विंडो के तहत प्रदान की गई है।
  • नए ढांचे (2024-27) में भारतीय रुपये में लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए रियायती शर्तें शामिल की गई हैं।
  • उद्देश्य: इस राशि का उपयोग मालदीव की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने और विदेशी मुद्रा की कमी के दौरान नकदी (liquidity) की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा।
  • पिछला भुगतान: जिस दिन भारत ने इस राशि को मंजूरी दी, उसी दिन मालदीव ने अक्टूबर 2024 में ली गई 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर की स्वैप सुविधा का भुगतान भी पूरा किया।
  • भारत मालदीव के लिए एक 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' (संकट में सबसे पहले मदद करने वाला) बना हुआ है।
  • यह सहायता भारत की 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति और विज़न सागर (MAHASAGAR) के अनुरूप है।
  • 2012 के बाद से, RBI मालदीव को कुल 1.1 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की स्वैप सहायता दे चुका है।
  • 2012 में सार्क स्वैप फ्रेमवर्क की शुरुआत के बाद से, आरबीआई ने मालदीव को कुल 1.1 अरब डॉलर की स्वैप सहायता प्रदान की है।
  • भारतीय उच्चायोग ने कहा कि मुद्रा स्वैप व्यवस्था मालदीव की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेष रूप से बाहरी आर्थिक दबाव के समय में।
  • आर्थिक कूटनीति: यह चीन जैसे अन्य बाहरी शक्तियों के बढ़ते आर्थिक प्रभाव को संतुलित करने और दक्षिण एशिया में भारत की विश्वसनीय आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का एक प्रयास है।

SAARC (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ) मुद्रा विनिमय व्यवस्था :

  • दक्षिण एशिया में वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है।
  • उद्देश्य: SAARC देशों को अल्पकालिक विदेशी मुद्रा तरलता आवश्यकताओं (short-term foreign exchange liquidity requirements) या भुगतान संतुलन संकट (Balance of Payments crisis) के दौरान तुरंत वित्तपोषण (Backstop line of funding) प्रदान करना।
  • शुरुआत और अद्यतन: यह सुविधा पहली बार 15 नवंबर, 2012 को लागू की गई थी। हाल ही में, RBI ने 2024-2027 की अवधि के लिए एक संशोधित ढांचा लागू किया है।
  • कुल कोष: RBI 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर (USD) के समग्र कोष (Total Corpus) के भीतर स्वैप सुविधा प्रदान करता है।

संशोधित ढांचा (2024-27):

  • INR स्वैप विंडो: 2024-27 के लिए भारतीय रुपये (INR) में स्वैप के लिए 250 अरब रुपये (₹250 billion) की एक अलग विंडो शुरू की गई है, जिसमें रियायतें दी गई हैं।
  • USD/Euro विंडो: 2 बिलियन अमेरिकी डॉलर का मुख्य ढांचा जारी रहेगा, जो USD या यूरो (Euro) में स्वैप की अनुमति देता है।
  • पात्रता: यह सुविधा सभी 8 SAARC सदस्य देशों के लिए उपलब्ध है, बशर्ते वे द्विपक्षीय स्वैप समझौतों (Bilateral Swap Agreements) पर हस्ताक्षर करें।
  • भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति: यह व्यवस्था भारत की 'पड़ोसी पहले' (Neighbourhood First) नीति और 'विजन महासागर' (Vision MAHASAGAR) का हिस्सा है।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (SAARC) :

  • स्थापना : 8 दिसंबर 1985 को ढाका में SAARC चार्टर पर हस्ताक्षर के साथ
  • मुख्यालय (सचिवालय): काठमांडू, नेपाल
  • सात संस्थापक देश : बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका
  • सदस्य देश (8): भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान (अफगानिस्तान 2007 में 14वें शिखर सम्मेलन में सदस्य बना)।
  • पर्यवेक्षक देश (9): ऑस्ट्रेलिया, चीन, यूरोपीय संघ, ईरान, जापान, मॉरीशस, म्यांमार, दक्षिण कोरिया और अमेरिका।

मुख्य उद्देश्य (Objectives) :

  • दक्षिण एशिया के लोगों के कल्याण को बढ़ावा देना और उनके जीवन स्तर में सुधार करना।
  • क्षेत्र में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और सांस्कृतिक विकास में तेजी लाना।
  • दक्षिण एशियाई देशों के बीच सामूहिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और मजबूत करना।

महत्वपूर्ण पहल और निकाय :

  • SAFTA (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र): सदस्य देशों के बीच व्यापार बाधाओं को कम करने के लिए 2006 में लागू किया गया।
  • सार्क विकास कोष (SDF): क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए।
  • दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (SAU): नई दिल्ली, भारत में स्थित।
  • सार्क आपदा प्रबंधन केंद्र: विभिन्न आपदाओं से निपटने के लिए सहयोग प्रदान करता है।

मालदीव :

  • हिंद महासागर में स्थित एक महत्वपूर्ण द्वीप देश है।
  • स्थिति: भारत के लक्षद्वीप से लगभग 700 किमी दक्षिण-पश्चिम में स्थित।
  • संरचना: 26 प्रवाल एटोल (Coral Atolls) में फैले लगभग 1,192 द्वीप।
  • राजधानी: माले (दुनिया के सबसे घनी आबादी वाले शहरों में से एक)।
  • धर्म एवं भाषा: राजधर्म इस्लाम है और आधिकारिक भाषा धिवेही है।
  • अर्थव्यवस्था: मुख्य रूप से पर्यटन और मत्स्य पालन पर आधारित।

महत्वपूर्ण चैनल्स:

  • 8 डिग्री चैनल: यह मालदीव को भारत के लक्षद्वीप (मिनिकॉय द्वीप) से अलग करता है।
  • 1.5 डिग्री चैनल: यह मालदीव के उत्तर और दक्षिण एटोल को विभाजित करता है।

भारत-मालदीव संबंध :

  • ऐतिहासिक संबंध: भारत 1965 में मालदीव की स्वतंत्रता के बाद उसे मान्यता देने वाले पहले देशों में से एक था।
  • रणनीतिक महत्व: मालदीव हिंद महासागर के प्रमुख समुद्री संचार मार्गों (SLOCs) के पास स्थित है, जो वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

सुरक्षा सहयोग:

ऑपरेशन कैक्टस (1988): भारतीय सेना ने मालदीव में तख्तापलट की कोशिश को नाकाम किया था।

  • अभ्यास (Exercises): भारत और मालदीव के बीच 'एकुवेरिन' (Ekuverin), 'दोस्ती' (Dosti) और 'एकथा' (Ekatha) जैसे सैन्य अभ्यास होते हैं।
  • आर्थिक और विकास सहायता: भारत मालदीव का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार बनकर उभरा है (2023)। भारत ने हनीमाधू हवाई अड्डे और ग्रेटर माले कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट जैसे बुनियादी ढाँचे के लिए 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (LoC) प्रदान की है।

Latest Courses