20 April, 2026
वित्त वर्ष 2025–26 में NMCG की प्रगति
Mon 20 Apr, 2026
संदर्भ :
- राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे सीवेज ट्रीटमेंट अवसंरचना को मज़बूत करने और प्रदूषण कम करने के उपायों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
मुख्य बिन्द :
- इस वर्ष के दौरान लगभग ₹4,700 करोड़ के निवेश से 18 परियोजनाओं के माध्यम से 538.03 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) की संचयी उपचार क्षमता जोड़ी गई है।
- एसटीपी का निर्माण: इस वर्ष कुल 28 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पूरे किए गए, जो पिछले वर्ष (22 STP) की तुलना में 27% की वृद्धि दर्शाते हैं।
- राज्यवार प्रगति: ये परियोजनाएं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में फैली हुई हैं।
- उत्तर प्रदेश: इस राज्य ने सर्वाधिक योगदान दिया। वाराणसी (अस्सी-BHU क्षेत्र) में 55 MLD, प्रयागराज में 43 MLD और आगरा में 166 MLD की क्षमता जोड़ी गई।
- बिहार: दीघा (30 MLD), कंकड़बाग (35 MLD) और भागलपुर (22.5 MLD) में महत्वपूर्ण कार्य हुए।
- झारखंड: फुसरो में 'इंटरसेप्शन और डायवर्जन' (I&D) और STP परियोजना पूरी हुई, जिससे 14 MLD क्षमता बढ़ी।
- उत्तराखंड: ऊधम सिंह नगर (10.3 MLD) और देहरादून (15 MLD) सहित हरिद्वार और मुनि की रेती में सुधार हुआ।
- पश्चिम बंगाल: जंगीपुर (13 MLD), चकदाह (15 MLD) और उत्तर बैरकपुर (30 MLD) में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया।
- निगरानी और पारदर्शिता: मिशन ने STP संचालन की वास्तविक समय में निगरानी और पारदर्शिता के लिए 'गंगा पल्स पब्लिक पोर्टल' (Ganga Pulse Public Portal) लॉन्च किया है।
- बजटीय आवंटन: नमामि गंगे कार्यक्रम को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है, जिसमें 2025-26 के लिए ₹3,400 करोड़ का बजटीय परिव्यय रखा गया है।
राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) :
- स्थापना: इसे 12 अगस्त 2011 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया गया था।
- मंत्रालय: यह भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti) के अंतर्गत कार्य करता है।
- भूमिका: यह राष्ट्रीय गंगा परिषद (National Ganga Council) की कार्यान्वयन शाखा (Implementation Wing) के रूप में कार्य करता है। इसने पहले राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) के लिए भी यही कार्य किया था, जिसे 2016 में भंग कर दिया गया।
- राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (EPA), 1986 के प्रावधानों के तहत गठित किया गया था।
- प्रमुख कार्यक्रम: यह भारत सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम 'नमामि गंगे' (Namami Gange) को लागू करने वाली मुख्य एजेंसी है। मुख्य उद्देश्य:
- प्रदूषण नियंत्रण: सीवेज और औद्योगिक कचरे के प्रबंधन के माध्यम से नदी में प्रदूषण को प्रभावी ढंग से कम करना।
- अविरल और निर्मल धारा: गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और पारिस्थितिक अखंडता बनाए रखने के लिए जल का निरंतर प्रवाह (Minimum Ecological Flow) सुनिश्चित करना।
- जैव विविधता: जलीय जैव विविधता और नदी के किनारे की वनस्पति का संरक्षण और पुनर्विकास करना।
प्रबंधन संरचना (Five-Tier Structure):
- राष्ट्रीय गंगा परिषद: प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में
- अधिकार प्राप्त टास्क फोर्स (ETF): केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की अध्यक्षता में
- राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG): केंद्रीय स्तर पर मुख्य कार्यान्वयन निकाय
- राज्य गंगा समितियां: राज्यों के स्तर पर
- जिला गंगा समितियां: प्रत्येक निर्दिष्ट जिले में
नमामि गंगे के 8 प्रमुख स्तंभ (Pillars):
- सीवेज उपचार अवसंरचना
- नदी तट विकास (Ghats & Crematoria)
- नदी की सतह की सफाई
- जैव विविधता संरक्षण
- वनीकरण (Afforestation)
- जन जागरूकता
- औद्योगिक कचरे की निगरानी
- गंगा ग्राम









