राष्ट्रीय समाचार
भारत का प्रथम 'पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क'

- उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लेह (लद्दाख) में सिंधु नदी के तट पर भारत के प्रथम 'पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क' की आधारशिला रखी।
- यह पहल लद्दाख की प्राचीन शैल कला (rock art) को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सम्बन्धित तथ्य :
- उद्देश्य: लद्दाख के सदियों पुराने पेट्रोग्लिफ्स (शैलचित्रों) को अनियंत्रित पर्यटन, बुनियादी ढांचे के विकास और सार्वजनिक जागरूकता की कमी जैसे खतरों से बचाना
- स्थानांतरण और संरक्षण: सिंधु और जांस्कर नदियों के किनारे लगभग 400 स्थानों से लुप्तप्राय शैलचित्रों को इस पार्क में स्थानांतरित किया जाएगा, जहाँ उन्हें एक सुव्यवस्थित और शैक्षिक वातावरण में प्रदर्शित किया जाएगा।
- सहयोग: इस परियोजना के लिए लद्दाख के पुरातत्व विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
- विरासत और विकास: इसे 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण के तहत एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
पेट्रोग्लिफ्स क्या हैं?:
- ये चट्टान की सतह को काटकर या उकेर कर बनाई गई प्रागैतिहासिक छवियां, प्रतीक और नक्काशी हैं।
- लद्दाख में महत्व: यहाँ के शैलचित्रों में शिकार के दृश्य, आइबेक्स (ibex) और हिम तेंदुए जैसे जंगली जानवरों के चित्र मिलते हैं। ये बाद के बौद्ध काल के प्रतीकों (जैसे स्तूप) और शिलालेखों के साथ मिलकर क्षेत्र के सांस्कृतिक संक्रमण और प्राचीन मानव जीवन के इतिहास को दर्शाते हैं।
- कालक्रम: लद्दाख में ये नक्काशी पुरापाषाण काल (Palaeolithic Age) से लेकर बाद के ऐतिहासिक काल तक फैली हुई है
भारत के प्रमुख पेट्रोग्लिफ स्थल:
- रत्नागिरी (महाराष्ट्र): यहाँ मेसोलिथिक काल (लगभग 10,000 ईसा पूर्व) के 1,500 से अधिक शैलचित्र मिले हैं।
- एडक्कल गुफाएं (केरल): नवपाषाण काल के शैलचित्रों के लिए प्रसिद्ध।
- भीमबेटका (मध्य प्रदेश): मुख्य रूप से गुफा चित्रों (Pictographs) के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहाँ कुछ शैल नक्काशी भी पाई जाती है।
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अंतर्राष्ट्रीय समाचार
तंजानिया को 2 टन जीवन रक्षक चिकित्सा सामग्री

- भारत ने 'तंजानिया' के दार-एस-सलाम के 'श्री हिंदू मंडल अस्पताल' को 'दो टन जीवन रक्षक चिकित्सा सामग्री' भेजी है।
- यह सहायता भारत के अपने प्रवासी समुदायों के कल्याण और ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सम्बन्धित तथ्य :
- वितरण का माध्यम: यह सहायता आधिकारिक तौर पर तंजानिया में भारत के उच्चायुक्त बिश्वदीप डे (Bishwadip Dey) द्वारा अस्पताल के ट्रस्टी डॉ. कौशिक एल. रमैया को सौंपी गई। इससे पहले मार्च 2026 में दवाओं की एक खेप भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS त्रिकंद (INS Trikand) के माध्यम से भी भेजी गई थी।
- सामग्री में शामिल: खेप में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, सक्शन यूनिट, ऑक्सीमीटर, माइक्रोस्कोप और स्टेथोस्कोप जैसे चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा इनहेलर, सीरिंज, दस्ताने, पट्टियां और व्हीलचेयर जैसी उपभोग्य वस्तुएं भी प्रदान की गई हैं।
- अस्पताल का इतिहास: श्री हिंदू मंडल अस्पताल की स्थापना 1919 में भारतीय मूल के समुदाय द्वारा की गई थी। वर्तमान में यह तंजानिया में एक प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान है जो प्रतिवर्ष हजारों मरीजों की सेवा करता है।
- फरवरी 2026: इसी अस्पताल को लगभग 120 मिलियन तंजानिया शिलिंग (₹43 लाख से अधिक) मूल्य के कार्डियक मॉनिटर और वेंटिलेटर प्रदान किए गए।
- वर्ष 2026 में भारत ने 'वसुधैव कुटुम्बकम्' और 'सागर' (SAGAR) विजन के तहत विभिन्न देशों को महत्वपूर्ण मानवीय और चिकित्सा सहायता भेजी है।
- यह सहायता प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध और बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से जूझ रहे देशों के लिए जीवन रक्षक साबित हुई है।
ईरान:
- मार्च 2026: क्षेत्रीय संघर्ष से प्रभावित लोगों के लिए भारत ने चिकित्सा सहायता की पहली खेप भेजी। यह सामग्री ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी को सौंपी गई।
- अप्रैल 2026: चल रहे संकट के बीच भारत ने दूसरी खेप भी रवाना की, जिसमें आवश्यक दवाएं और स्वास्थ्य आपूर्ति शामिल थी।
अफगानिस्तान:
- मार्च 2026: भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय चिकित्सा सहायता भेजी, जो पिछले चार वर्षों में कुल 327 टन दवाओं और टीकों की आपूर्ति का हिस्सा है।
- बुनियादी ढांचा: भारत ने काबुल में एक 30-बिस्तर वाले अस्पताल और विभिन्न प्रांतों में मातृत्व क्लीनिकों के निर्माण जैसी परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया है।
चिकित्सा कूटनीति के अन्य पहल :
- ब्रिक्स (BRICS) स्वास्थ्य कार्य समूह 2026: भारत ने नई दिल्ली में इसकी पहली बैठक की अध्यक्षता की, जिसका मार्गदर्शक विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग एवं स्थिरता" रहा।
- एडवांटेज हेल्थकेयर इंडिया 2026: इस सम्मेलन के माध्यम से भारत ने खुद को 'ग्लोबल हेल्थकेयर हब' के रूप में पेश किया, जिसका उद्देश्य चिकित्सा पर्यटन और अन्य देशों के साथ संस्थागत साझेदारी को बढ़ावा देना है।
- बजट 2026-27: सरकार ने 5 क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज्म हब बनाने और 'बायोफार्मा शक्ति' (₹10,000 करोड़ का फंड) के जरिए सस्ती दवाओं के उत्पादन पर जोर दिया है, जिससे भविष्य में अन्य देशों को निर्यात और सहायता में तेजी आएगी
तंजानिया :
- आधिकारिक नाम: तंजानिया संयुक्त गणराज्य
- पूर्वी अफ्रीका में स्थित एक प्रमुख देश है
- राजधानी: डोडोमा
- दार-एस-सलाम सबसे बड़ा शहर और मुख्य वाणिज्यिक केंद्र है।
- सीमाएँ: इसके उत्तर में केन्या और युगांडा, पश्चिम में रवांडा, बुरुंडी और कांगो (DRC), और दक्षिण में जाम्बिया, मलावी और मोजाम्बिक स्थित हैं। इसके पूर्व में हिंद महासागर है।
- प्रमुख स्थल: अफ्रीका की सबसे ऊँची चोविक्टोरिया झील: अफ्रीका की सबसे बड़ी झील (उत्तर में)।
- तांगानिका झील: दुनिया की दूसरी सबसे गहरी झील (पश्चिम में)।
- न्यासा (मलावी) झील: (दक्षिण में)टी, माउंट किलिमंजारो, यहीं स्थित है।
- द्वीप: प्रसिद्ध जंजीबार (Zanzibar) द्वीप तंजानिया का ही हिस्सा है
- मुद्रा: तंजानिया शिलिंग (Tanzanian Shilling)
- गठन: 1964 में 'तांगानिका' और 'जंजीबार' के विलय से इसका निर्माण हुआ।
- भाषा: स्वाहिली (Swahili) और अंग्रेजी आधिकारिक भाषाएँ हैं।
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अर्थव्यवस्था तथा बैंकिंग
भारत-दक्षिण कोरिया का वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य

- भारत और दक्षिण कोरिया ने द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक $50-54 अरब तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।
- 20 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के बीच हुई बैठक में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए "भविष्योन्मुखी साझेदारी" (Futuristic Partnership) का रोडमैप तैयार किया गया।
सम्बन्धित तथ्य :
- वर्तमान व्यापार: वित्त वर्ष 2022-2025 के दौरान द्विपक्षीय व्यापार लगभग $27.8 अरब रहा।
- नया लक्ष्य: इसे अगले चार वर्षों में गति देते हुए 2030 तक $50 अरब (कुछ रिपोर्टों में $54 अरब) तक ले जाना है।
- वृद्धि दर: इस लक्ष्य को पाने के लिए व्यापार में लगभग 18% की वार्षिक वृद्धि की आवश्यकता होगी।
- तकनीकी: एआई (AI), सेमीकंडक्टर और 'भारत-कोरिया डिजिटल ब्रिज' की शुरुआत।
- विनिर्माण: जहाज निर्माण (Shipbuilding), स्टील और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की आपूर्ति श्रृंखला।
- रक्षा: रक्षा उत्पादन और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए 20 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर।
- ऊर्जा: दक्षिण कोरिया का ग्लोबल सोलर एलायंस में शामिल होना और हरित ऊर्जा में निवेश।
- CEPA का अपग्रेड: 2010 के व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को अगले एक वर्ष में बेहतर बनाने का निर्णय, ताकि व्यापार असंतुलन को कम किया जा सके।
- कोरियाई औद्योगिक टाउनशिप: भारतीय बाजार में कोरियाई छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) को सुगम प्रवेश दिलाने के लिए विशेष टाउनशिप की योजना।
- वित्तीय मंच: निवेश प्रवाह को गति देने के लिए 'भारत-कोरिया वित्तीय मंच' का गठन।
दक्षिण कोरिया (कोरिया गणराज्य) :
- पूर्वी एशिया में स्थित एक विकसित लोकतांत्रिक देश है जो कोरियाई प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग को कवर करता है।
- आधिकारिक नाम: कोरिया गणराज्य (Republic of Korea - ROK)
- राजधानी: सियोल (Seoul), जो दुनिया के सबसे बड़े महानगरीय क्षेत्रों में से एक है।
- आधिकारिक भाषा: कोरियाई (हंगुल लिपि में लिखी जाती है)।
- मुद्रा: दक्षिण कोरियाई वॉन (KRW)
- सीमाएँ: उत्तर में उत्तर कोरिया (DMZ द्वारा विभाजित), पश्चिम में पीला सागर, और पूर्व में जापान सागर (East Sea)।
- भू-आकृति: देश का लगभग 70% हिस्सा पहाड़ी है। हल्लासन (Hallasan) सबसे ऊँची चोटी है, जो जेजू द्वीप पर स्थित है।
- प्रमुख शहर: सियोल के अलावा बुसान (Busan), इंचियोन (Incheon), डेगू (Daegu) और ग्वांगजू (Gwangju) मुख्य केंद्र हैं।
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भारत की अर्थव्यवस्था का अनुमान: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

- संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग एशिया व प्रशांत (ESCAP) द्वारा अप्रैल 2026 में जारी रिर्पोट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था में इस वर्ष 6.4 प्रतिशत और 2027 में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।
सम्बन्धित तथ्य :
- रिपोर्ट में कहा कि दक्षिण एवं दक्षिण-पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्थाएं 2025 में 5.4 प्रतिशत की दर से बढ़ीं, जबकि 2024 में वृद्धि दर 5.2 प्रतिशत थी।
- इसमें भारत की मजबूत वृद्धि का प्रमुख योगदान रहा।
- भारत की वृद्धि दर 2025 में बढ़कर 7.4 प्रतिशत हो गई।
- देश में मुद्रास्फीति के इस वर्ष 4.4 प्रतिशत और 2027 में 4.3 प्रतिशत रहने के आसार हैं
- इसमें अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के अनुमान का भी उल्लेख किया गया जिसके अनुसार वैश्विक स्तर पर लगभग 1.66 करोड़ हरित नौकरियां थीं और 2012 से 2024 के बीच प्रतिवर्ष लगभग आठ लाख नई नौकरियां सृजित हुईं जो सात प्रतिशत वार्षिक वृद्धि को दर्शाती हैं।
- इन 1.66 करोड़ नौकरियों में से 73 लाख चीन में, 13 लाख भारत में और 25 लाख एशिया के अन्य हिस्सों में सृजित हुईं जो वैश्विक कुल का क्रमशः 44 प्रतिशत, 8 प्रतिशत और 15 प्रतिशत हैं
- रिपोर्ट का शीर्षक : ‘इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026’
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वर्ष 2047 तक भारत का परमाणु ऊर्जा क्षमता लक्ष्य

- केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद ने 2047 तक भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 8.8 GW से बढ़ाकर 100 GW करने का लक्ष्य घोषित किया है।
- यह एक महत्वाकांक्षी योजना है, जो 'विकसित भारत 2047' के तहत स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए देश की ऊर्जा सुरक्षा को दस गुना से अधिक बढ़ाएगी।
सम्बन्धित तथ्य :
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भारत का परमाणु ऊर्जा :
- वर्तमान क्षमता: भारत की कुल स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 8.18 गीगावाट (GW) या 8,180 मेगावाट है
- कुल बिजली उत्पादन में योगदान: भारत के कुल विद्युत उत्पादन में इसका हिस्सा लगभग 3.1% है
भविष्य के लक्ष्य:
- 2031-32 तक: क्षमता को बढ़ाकर 22,480 मेगावाट करने का लक्ष्य है.
- 2047 तक (विकसित भारत): 2047 तक इसे 100 गीगावाट तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है
त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम :
- भारत के परमाणु कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जे. भाभा थे। भारत ने अपनी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थोरियम भंडार का उपयोग करने के लिए तीन चरणों वाली रणनीति अपनाई है
- प्रथम चरण: दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR), जो प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करते हैं।
- द्वितीय चरण: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR), जो प्लूटोनियम-239 का उपयोग करते हैं।
- तृतीय चरण: थोरियम-आधारित रिएक्टर (थोरियम-233), जो भारत की अंतिम आत्मनिर्भरता का लक्ष्य है।
- भारत में वर्तमान में 7 परमाणु ऊर्जा केंद्रों में कुल मिलाकर 20 से अधिक रिएक्टर संचालन में हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता देश की बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
- इनमें सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kudankulam Nuclear Power Plant – KKNPP) है, जिसकी अंतिम स्थापित‑क्षमता चार‑छः इकाइयों के साथ लगभग 6,000 मेगावाट तक होने वाली है, जिससे यह वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा केंद्र माना जाता है।
- महाराष्ट्र स्थित तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Tarapur Atomic Power Station – TAPS) भारत का सबसे पुराना और पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है, जिसकी पहली इकाई 1969 में व्यावसायिक रूप से चालू हुई और यह देश में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की नींव बनाने वाला मुख्य केंद्र है।
- राजस्थान में स्थित राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन (रावतभाटा – RAPS) भारत‑कनाडा सहयोग के तहत स्थापित किया गया था और इसमें कई PHWR‑प्रकार के रिएक्टर लगे हैं, जो राजस्थान और आस‑पास के क्षेत्रों को बिजली आपूर्ति करते हैं।
- कर्नाटक में स्थित कैगा परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kakrapar Nuclear Power Plant – KGS) देश की स्वदेशी परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जहाँ स्वदेशी‑डिज़ाइन PHWR रिएक्टर चल रहे हैं; यहाँ थोरियम‑आधारित तकनीकों के प्रयोग और नई 700 MWe इकाइयों के विस्तार की योजना भी चल रही है।
- गुजरात में स्थित काकरापार परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Kakrapar Atomic Power Station – KAPS) में हाल ही में भारत की पहली 700 मेगावाट की पूर्ण स्वदेशी द्वितीय‑पीढ़ी PHWR इकाई चालू हुई है, जिसने भारत की स्वदेशी परमाणु इकाई‑क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
- तमिलनाडु में स्थित कल्पक्कम (मद्रास परमाणु ऊर्जा स्टेशन – MAPS) मद्रास परमाणु ऊर्जा संयंत्र के नाम से जाना जाता है, जो देश के प्रारंभिक परमाणु उर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक स्थल है और यहाँ भी PHWR रिएक्टर चल रहे हैं।
- उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के किनारे स्थित नरोरा परमाणु ऊर्जा स्टेशन (Narora Atomic Power Station – NAPS) उत्तरी भारत की ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; यह संयंत्र उत्तर प्रदेश और आस‑पास के राज्यों को विश्वसनीय बेस‑लोड बिजली देता है।
- इन सात‑आठ बड़े परमाणु ऊर्जा केंद्रों के अलावा भारत में अन्य स्थानों पर भी रिएक्टर और निर्माणाधीन इकाइयाँ हैं, जिनके माध्यम से सरकार दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है।
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भारत की GDP वृद्धि दर SBI के अनुसार

- भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शोध रिपोर्ट ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.8% से 7.1% के बीच रहने का अनुमान लगाया है।
SBI रिसर्च के प्रमुख निष्कर्ष (FY27 के लिए):
- GDP वृद्धि: 6.8% - 7.1% (अनुमानित)
- आधार (FY26): अनुमानित 7.6% वृद्धि
- मुद्रास्फीति (Inflation): लगभग 4.5% औसतन
- राजकोषीय घाटा: 4.5% - 4.6% के बीच रहने का अनुमान
- मुख्य जोखिम:सुपर अल नीनो' का प्रभाव विकास अनुमानों को प्रभावित कर सकता है
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भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत

- वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल-दिसंबर) के आंकड़ों के अनुसार, सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है।
सम्बन्धित तथ्य :
- उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-दिसंबर सत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में सबसे अधिक 17.6 अरब डॉलर का निवेश सिंगापुर से हुआ, जो कुल निवेश का 37% था।
- अमेरिका और मॉरीशस का योगदान क्रमशः 16% और 10% रहा।
- कर आश्रय स्थल केमैन द्वीप समूह से FDI पांच गुना बढ़कर 2024 के 422 मिलियन डॉलर से 2026 के 2026 डॉलर से 2026 के 2026 डॉलर हो गया।
- साइप्रस, जो एक अन्य कर आश्रय स्थल है, ने भारत में 1.4 अरब डॉलर का निवेश किया, जबकि 2024 में यह 1.2 अरब डॉलर था।
- इसी अवधि में लक्ज़मबर्ग से निवेश 352.67 मिलियन डॉलर से बढ़कर 545 मिलियन डॉलर हो गया।
- भारत को वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल-दिसंबर सत्र में 47.87 अरब डॉलर का FDI प्राप्त हुआ, जिसमें से 7.8 अरब डॉलर अमेरिका से और 4.8 अरब डॉलर मॉरीशस से आए।
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आठ प्रमुख उद्योगों में गिरावट दर्ज

- वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, मार्च 2026 में भारत के आठ प्रमुख उद्योगों के संयुक्त सूचकांक में पिछले वर्ष की तुलना में 0.4% की गिरावट दर्ज की गई।
सम्बन्धित तथ्य :
- औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (ICI) आठ प्रमुख उद्योगों, जैसे कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, परिष्कृत उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली के संयुक्त और व्यक्तिगत उत्पादन प्रदर्शन को मापता है।
- ये आठ प्रमुख उद्योग औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में शामिल वस्तुओं के भार का 40.27 प्रतिशत हिस्सा हैं।
आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक :
- कोयले का उत्पादन मार्च 2026 में मार्च 2025 की तुलना में 4.0% घटा, जबकि अप्रैल–मार्च 2025–26 में संचयी रूप से 0.5% कम रहा।
- कच्चे तेल का उत्पादन 5.7% घटा और वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान संचयी सूचकांक 2.8% कम दर्ज हुआ।
- प्राकृतिक गैस का उत्पादन 6.4% बढ़ा, परंतु सालभर की संचयी वृद्धि दर 2.8% कम रही।
- परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादन में मार्च 2026 में मुश्किल‑से 0.1% की बढ़ोतरी हुई, जबकि पूरे वित्त वर्ष में संचयी वृद्धि दर 0.1% नीचे रही।
- उर्वरक उत्पादन 24.6% कम हो गया और वर्षcular संचयी सूचकांक 0.1% घट गया।
- इस्पात उत्पादन में मार्च 2026 में 2.2% वृद्धि दर्ज हुई और अप्रैल–मार्च 2025–26 में संचयी रूप से 9.1% बढ़ोतरी हुई।
- सीमेंट उत्पादन में मार्च 2026 में 4.0% की वृद्धि हुई और वित्त वर्ष के अंत तक संचयी वृद्धि 8.6% रही।
- विद्युत उत्पादन मार्च 2026 में 0.5% घट गया, लेकिन पूरे वित्त वर्ष में संचयी रूप से 0.9% की वृद्धि दर्ज हुई।
- आधार वर्ष (Base Year): इन उद्योगों के सूचकांक की गणना के लिए वर्तमान आधार वर्ष 2011-12 है।
- जारीकर्ता: यह सूचकांक वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) द्वारा मासिक रूप से जारी किया जाता है।
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रक्षा समाचार
T-72 और T-90 टैंकों के लिए समझौता

- रक्षा मंत्रालय ने T-72 और T-90 टैंकों के लिए लगभग 975 करोड़ रुपये की लागत से ट्रॉल असेंबली की खरीद के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किया।
सम्बन्धित तथ्य :
- हस्ताक्षरकर्ता: रक्षा मंत्रालय द्वारा भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) और इलेक्ट्रो न्यूमेटिक्स एंड हाइड्रोलिक्स (India) प्राइवेट लिमिटेड के बीच
- उपकरण का विकास: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से
- उद्देश्य: यह उपकरण भारतीय सेना की बारूदी सुरंगों को भेदने की क्षमता को बढ़ाएगा। यह एंटी-टैंक माइंस वाले क्षेत्रों में 'वाहन सुरक्षित मार्ग' बनाने में मदद करता है।
- श्रेणी: यह खरीद 'बाय (इंडियन-IDDM)' (Indigenously Designed, Developed and Manufactured) श्रेणी के तहत की गई है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक-इन-इंडिया' पहल को बढ़ावा देती है।
T-72 'अजेय' (T-72 Ajeya)
- यह भारतीय सेना का सबसे भरोसेमंद और संख्या में सबसे अधिक पाया जाने वाला टैंक है।
- उत्पत्ति: 1970 के दशक का सोवियत डिज़ाइन। भारत ने इसे 1980 के दशक में अपनाना शुरू किया।
- मुख्य हथियार: 125 मिमी 2A46 स्मूथबोर तोप। यह 'फायर एंड फॉरगेट' मिसाइलों के बजाय मुख्य रूप से गोलों (Shells) पर निर्भर है।
- संख्या: भारतीय सेना के पास लगभग 2,400+ T-72 टैंक हैं, जो 'बख्तरबंद कोर' की रीढ़ हैं।
- सुरक्षा (सुधार): मूल T-72 में सुरक्षा कम थी, लेकिन भारतीय संस्करण (अजेय) अब ERA (Explosive Reactive Armour) से लैस है, जो इसे मिसाइलों से बचाता है।
- इंजन: इसका मूल इंजन 780 HP का था, जिसे अब 1000 HP के शक्तिशाली इंजन से बदला जा रहा है (Project Combat Improved Ajeya)।
- गति: सड़क पर 60 किमी/घंटा और युद्धक्षेत्र (Off-road) में 35-45 किमी/घंटा।
T-90 'भीष्म' (T-90 Bhishma)
- यह T-72 का ही अत्यधिक उन्नत और आधुनिक संस्करण है, जिसे भारत ने 2001 में रूस से लिया था।
- उत्पत्ति: 1990 के दशक का रूसी डिज़ाइन। इसे T-72 के चेसिस और T-80 के फीचर्स को मिलाकर बनाया गया है।
- मारक क्षमता (सुधार): इसकी 125 मिमी तोप से 'इनवार' (Invar) मिसाइल दागी जा सकती है, जो 5 किमी दूर स्थित टैंक या धीमी गति से उड़ रहे हेलीकॉप्टर को नष्ट कर सकती है।
- हंटर-किलर क्षमता: इसमें कमांडर के पास 'इंडिपेंडेंट थर्मल साइट' होती है, जिससे वह गनर के निशाना लगाने के दौरान ही अगले दुश्मन को खोज सकता है। यह सुविधा T-72 में नहीं है।
- सुरक्षा: इसमें उन्नत 'कंचन' आर्मर और 'कंटैक्ट-5' (Kontakt-5) ERA लगा है, जो इसे आधुनिक एंटी-टैंक हथियारों के खिलाफ अभेद्य बनाता है।
- इंजन: 1000 HP का V-92S2 डीजल इंजन, जो इसे रेगिस्तान की गर्मी में भी तेज रफ्तार देता है।
- रेंज: लगभग 550 किमी (अतिरिक्त ईंधन टैंक के साथ यह और बढ़ जाती है)।
मुख्य अंतर (Summary Table) :
| विशेषता |
T-72 अजेय |
T-90 भीष्म |
| पीढ़ी |
दूसरी पीढ़ी (2nd Gen) |
तीसरी पीढ़ी (3rd Gen) |
| मिसाइल क्षमता |
नहीं (सीमित अपग्रेड्स में है) |
हाँ (इनवार मिसाइल) |
| रात में युद्ध |
थर्मल साइट्स (अपग्रेड के बाद) |
अत्यधिक उन्नत फ्रांसीसी थर्मल साइट्स |
| सुरक्षा |
बेसिक ERA |
एडवांस्ड 'कंटैक्ट-5' ERA |
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कोरिया युद्ध में भारत के योगदान पर आधारित प्रदर्शनी का आयोजन दिल्ली में :

- वर्ष 1950 से 1954 तक चले कोरिया युद्ध में भारत के योगदान पर आधारित एक विशेष फोटो प्रदर्शनी नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में शुरू हुई।
- 'गार्जियंस ऑफ न्यूट्रैलिटी' शीर्षक वाली यह प्रदर्शनी भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस की भूमिका को रेखांकित करती है।
- प्रदर्शनी का दौरा कोरिया गणराज्य के विदेश मंत्री चो ह्यून, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने किया।
- प्रदर्शनी का विषय "कोरियाई युद्ध में भारत का संतुलन: तटस्थता, कूटनीति और मानवीय सहायता" है।
महत्वपूर्ण दिवस
'रचनात्मकता और नवाचार दिवस'

- प्रतिवर्ष 21 अप्रैल को 'रचनात्मकता और नवाचार दिवस' मनाया जाता है, जिसका इस वर्ष विषय "वैश्विक प्रगति के लिए रचनात्मकता का उपयोग" है।
सम्बन्धित तथ्य :
- मुख्य उद्देश्य : मानवीय समस्याओं के समाधान और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने में रचनात्मकता और नवाचार की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाना
- इतिहास: इसकी शुरुआत 2002 में हुई थी, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 2017 में आधिकारिक रूप से इसे मनाने का प्रस्ताव अपनाया।
- प्रथम आयोजन : 2018
- विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा जारी ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स (GII) 2025 में भारत 139 देशों में 38वें स्थान पर है।
- विश्व रचनात्मकता एवं नवाचार सप्ताह (WCIW) :
- अवधि : 15-21 अप्रैल 2025 ( 15 अप्रैल को लियोनार्डो दा विंची की जयंती के साथ मेल खाता है)।
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पुरस्कार और सम्मान
9वां प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन पुरस्कार

- ICAR-IARI के निदेशक डॉ. सी.एच. श्रीनिवास राव को 2024-25 के लिए 9वें प्रो. एम.एस. स्वामीनाथन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सम्बन्धित तथ्य :
योगदान: उन्हें यह सम्मान जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Resilient Agriculture) और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन
- में उनके अग्रणी कार्यों के लिए दिया गया है।
- महत्व: यह पुरस्कार चक्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत की हरित क्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के जन्म शताब्दी वर्ष (Birth Centenary) के अवसर पर दिया गया है।
- संस्थान: यह पुरस्कार रिटायर्ड आईसीएआर कर्मचारी संघ (RICAREA) द्वारा नुजिवीडु सीड्स लिमिटेड (NSL) के सहयोग से 2004-05 में शुरू किया गया था।
- उल्लेखनीय कार्य: डॉ. राव ने भारत के 650 से अधिक जिलों के लिए कृषि आकस्मिक योजनाएं (Contingency Plans) विकसित करने और जलवायु-अनुकूल तकनीकों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- पुरस्कार स्वरूप: इसमें एक स्वर्ण पदक, प्रशस्ति पत्र और ₹2 लाख की नकद राशि प्रदान की जाती है।
डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन :
- एम.एस. स्वामीनाथन (1925-2023) भारत में हरित क्रांति के जनक थे, जिन्होंने 1960 के दशक में उच्च उपज वाली गेहूँ-चावल किस्मों के माध्यम से देश को खाद्य आत्मनिर्भर बनाया। एक प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक, उन्होंने 2004 में राष्ट्रीय किसान आयोग की अध्यक्षता की और 'सदाबहार क्रांति' व MSP में 50% लाभ (स्वामीनाथन फॉर्मूला) का सुझाव दिया।
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