01 April, 2026
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन
Tue 14 Apr, 2026
संदर्भ :
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल, 2026 को देहरादून में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे) का उद्घाटन किया।
मुख्य बिन्दु :
- इस परियोजना को दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा दक्षता में सुधार लाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- इसे पर्यावरण के प्रति संवेदनशील अवसंरचना मॉडल के रूप में भी मान्यता दी जा रही है , जो राजमार्ग विकास के भीतर वन्यजीव संरक्षण सुविधाओं को एकीकृत करता है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव:
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: माल ढुलाई सस्ती और तेज़ होगी, जिससे व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
- पर्यटन को बढ़ावा: यह कॉरिडोर हरिद्वार (51 किमी की दूरी) और ऋषिकेश के साथ-साथ चारधाम यात्रा के लिए कनेक्टिविटी को सुगम बनाएगा।
- रोजगार सृजन: निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- ईंधन बचत: कम दूरी और समय से पेट्रोल-डीज़ल की खपत घटेगी।
परियोजना की मुख्य विशेषताएँ :
- कुल लागत : 12,000 करोड़ रुपये
- लंबाई और संरचना: 213 किमी लंबा, छह-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे।
- यात्रा समय: दिल्ली से देहरादून का सफर लगभग आधा हो जाएगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेगा
- यह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्यों से होकर गुजरता है।
- इस परियोजना के कार्यान्वयन में निर्बाध हाई स्पीड कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार प्रमुख पुल और सड़क किनारे 12 जन सुविधाओं (वे साइड अमेनिटीज) का निर्माण भी शामिल है
- इनमें 12 किलोमीटर लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है, जो एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास होगा।
- कॉरिडोर में आठ पशु मार्ग, 200 मीटर लंबे दो हाथी अंडरपास और दात काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है।
- चार धाम, ऋषिकेश, हरिद्वार और मसूरी तक पहुंच आसान कर पर्यटन को नई ऊर्जा देगा।
- इस परियोजना से बागपत, शामली और सहारनपुर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार सृजन के अवसर निर्मित होंगे।
- सहारनपुर के लकड़ी नक्काशी और मुजफ्फरनगर के कागज उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
- ध्वनि अवरोधक (Noise Barriers): वन्यजीवों को गाड़ियों के शोर से बचाने के लिए विशेष साउंड बैरियर और लाइट कंट्रोल सिस्टम लगाए गए हैं।
- यह कॉरिडोर प्रधानमंत्री के ‘पीएम गति शक्ति’ मास्टर प्लान का एक अहम हिस्सा है।
पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) :
- पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) राष्ट्रीय मास्टर प्लान एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे बुनियादी ढांचा (Infrastructure) परियोजनाओं के एकीकृत नियोजन और कार्यान्वयन के लिए अक्टूबर 2021 में लॉन्च किया गया था।
- इसका मुख्य लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना और भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाना है।
प्रमुख विशेषताएं और स्तंभ :
- 7 इंजन: यह योजना विकास के सात इंजनों द्वारा संचालित है: सड़क, रेल, हवाई अड्डे, बंदरगाह, सार्वजनिक परिवहन, जलमार्ग और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचा
- एकीकृत योजना: यह रेलवे और सड़क परिवहन सहित कई मंत्रालयों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाता है ताकि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी और देरी को दूर किया जा सके।
- डिजिटल बैकबोन: यह BISAG-N द्वारा विकसित एक GIS-आधारित डिजिटल मास्टर प्लानिंग टूल का उपयोग करता है, जिसमें सभी मंत्रालयों और राज्यों के डेटा की परतों (layers) को एकीकृत किया गया है।
- व्यापक कवरेज: इसमें मौजूदा और आगामी योजनाएं जैसे भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग और उड़ान (UDAN) को समाहित किया गया है
मुख्य उद्देश्य :
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: भारत की रसद लागत (Logistics cost) को वर्तमान में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 13-14% से घटाकर वैश्विक स्तर (लगभग 8%) पर लाना।
- मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी: लोगों और सामानों की निर्बाध आवाजाही के लिए परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच 'लास्ट-माइल' कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना।
- प्रभावी कार्यान्वयन: परियोजनाओं के दोहराव को रोकना और समय-सीमा के भीतर उनके निष्पादन को सुव्यवस्थित करना।
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे :
| एक्सप्रेसवे का नाम | लंबाई | प्रमुख विशेषता | स्थिति |
| अहमदाबाद-वडोदरा (NE-1) | 93 किमी | भारत का पहला घोषित नेशनल एक्सप्रेसवे | चालू |
| पूर्वी पेरिफेरल (NE-2) | 135 किमी | दिल्ली को भारी वाहनों से बचाने के लिए 'स्मार्ट/ग्रीन' रोड | चालू |
| दिल्ली-मुंबई (NE-4) | ~1,386 किमी | भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे | आंशिक चालू |
| गंगा एक्सप्रेसवे | 594 किमी | यूपी का सबसे लंबा (मेरठ से प्रयागराज) | निर्माणाधीन |
| पूर्वांचल एक्सप्रेसवे | 341 किमी | सुल्तानपुर में हवाई पट्टी की सुविधा | चालू |
| दिल्ली-देहरादून | 213 किमी | एशिया का सबसे लंबा वन्यजीव कॉरिडोर (12 किमी) | चालू |
एक्सप्रेसवे से सम्बन्धित प्रमुख तथ्य
सबसे बड़ा/पहला (Records):
- भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (1,386 किमी)
- भारत का पहला एक्सप्रेसवे: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे (2002 में पूर्ण)
- भारत का पहला 'नेशनल एक्सप्रेसवे': अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे (इसे NE-1 का दर्जा प्राप्त है)
- सर्वाधिक एक्सप्रेसवे वाला राज्य: उत्तर प्रदेश (इसे 'एक्सप्रेसवे प्रदेश' भी कहा जाने लगा है)
विशेष सुविधाएँ (Unique Features) :
- हवाई पट्टी (Airstrip): किन एक्सप्रेसवे पर युद्धक विमान उतर सकते हैं?
- पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (सुल्तानपुर के पास)
- लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे (उन्नाव के पास)
- एनीमल ओवरपास (Wildlife Crossing): भारत में पहली बार दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर नीदरलैंड की तर्ज पर वन्यजीवों के लिए ओवरपास बनाए गए हैं।
- एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ एलीवेटेड कॉरिडोर: दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (12 किमी लंबा सेक्शन)
कनेक्टिविटी (Connectivity) :
- यमुना एक्सप्रेसवे: यह ग्रेटर नोएडा को आगरा से जोड़ता है (165 किमी)।
- पूर्वी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (NE-2): यह दिल्ली को बिना छुए कुंडली (हरियाणा) से पलवल (हरियाणा) को जोड़ता है।
- बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे: यह चित्रकूट को इटावा (NH-19) से जोड़ता है।
तकनीकी और सरकारी तथ्य :
- नोडल एजेंसी: भारत में राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे का निर्माण मुख्य रूप से NHAI (National Highways Authority of India) करता है।
- UPEIDA: उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे का निर्माण 'उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण' करता है।
- ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे: वह एक्सप्रेसवे जो बिल्कुल नई जमीन (New Alignment) पर बनाया जाता है, जहाँ पहले कोई सड़क नहीं थी।
उपनाम (Nicknames) :
- समृद्धि महामार्ग: मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे का आधिकारिक नाम (हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे के नाम पर)।
- नर्मदा एक्सप्रेसवे: मध्य प्रदेश में प्रस्तावित (अमरकंटक से खातगाँव)।









