01 April, 2026
‘भारतीय अंतरिक्ष स्थिति आकलन रिपोर्ट 2025’
Sun 12 Apr, 2026
संदर्भ :
- ISRO ने ‘भारतीय अंतरिक्ष स्थिति आकलन रिपोर्ट 2025’ (ISSAR 2025) जारी किया है, जो अंतरिक्ष में मलबे (Space Debris) और भारतीय अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा का लेखा-जोखा प्रस्तुत करता है।
वैश्विक प्रक्षेपण स्थिति (2025) :
- विश्व भर की अंतरिक्ष एजेंसियों ने 2025 में 315 रॉकेट लॉन्च किया।
- यह अंतरिक्ष युग की शुरुआत के बाद से अब तक अंतरिक्ष में सक्रिय देशों द्वारा एक वर्ष में किए गए लॉन्च की सबसे अधिक संख्या है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में दर्ज की गई शुद्ध वृद्धि 74.5% है।
ISSAR-2025 रिपोर्ट (प्रकाशन एवं आधार) :
- भारतीय अंतरिक्ष स्थिति आकलन रिपोर्ट (ISSAR)-2025 अंतरिक्ष मलबे के प्रबंधन से संबंधित डेटा पर आधारित है, जिसे बेंगलुरु में आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष यान मिशन संचालन सम्मेलन, SMOPS-2026 में जारी की किया गया।
वर्ष 2024 के प्रक्षेपण आंकड़े :
- 2024 में कुल 261 प्रक्षेपण किए गए, जिनमें से 254 सफल रहे और अंतरिक्ष में 2,578 परिचालन उपग्रह स्थापित हुए।
- यह संख्या 2023 की तुलना में कम है, जब 212 प्रक्षेपणों के माध्यम से 3,135 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए थे।
कक्षा में वस्तुएं एवं पुनः प्रवेश :
- कुल 4,651 वस्तुओं को कक्षा में प्रक्षेपित किया गया और 1,911 वस्तुएं पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर गईं।
प्राकृतिक एवं तकनीकी घटनाएं :
- रिपोर्ट में भीषण भूचुंबकीय तूफानों और LVM-3-M6 मिशन के प्रक्षेपण में 41 सेकंड की देरी का भी उल्लेख किया गया है।
निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) उपग्रह स्थिति :
- 86 निम्न पृथ्वी कक्षा उपग्रहों (एलईओएस) की उपस्थिति का उल्लेख किया गया है, जिनमें से 27 कार्यरत हैं और 23 निष्क्रिय हैं।
- वर्तमान में, कक्षा में 50 एलईओएस मौजूद हैं, जिनमें से 36 क्षयग्रस्त हैं।
- इन 86 एलईओएस में से 60 सरकारी उपग्रह हैं और 26 गैर-सरकारी हैं।
भूस्थिर पृथ्वी कक्षा (GEO) उपग्रह स्थिति :
- अंतरिक्ष में 32 कार्यरत भूस्थिर पृथ्वी कक्षा उपग्रह भी हैं, जिनमें से 26 निष्क्रिय हैं।
भारतीय रॉकेट संरचनाएं (Orbital Debris) :
- भारतीय रॉकेट संरचनाओं पर रिपोर्ट में बताया गया है कि पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) रॉकेट के 42 भाग, लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM-3) के तीन भाग और भूस्थिर उपग्रह के चार भाग मौजूद हैं।
- अंतरिक्ष यान (GSLV) अभी भी कक्षा में है।
अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन के प्रयास :
- इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया कि अंतरिक्ष मलबे को कम करने के लिए खराब हो चुके उपग्रहों को वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
टकराव से बचाव (Collision Avoidance) :
- ISSR रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि LEO और भूस्थिर पृथ्वी कक्षा मिशनों में टकराव से बचने के चार-चार मामले दर्ज किए गए थे।
अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए भारत की पहल :
- IS4OM (ISRO System for Safe and Sustainable Space Operations Management): यह प्रणाली राष्ट्रीय अंतरिक्ष संपत्तियों को मलबे और अन्य खतरों से बचाने के लिए नोडल केंद्र के रूप में कार्य करती है।
- प्रोजेक्ट नेत्रा (Project NETRA): यह अंतरिक्ष मलबे की निगरानी के लिए एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली है। फरवरी 2026 तक इस पर लगभग ₹67.77 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।
- मलबे से मुक्त अंतरिक्ष मिशन (DFSM 2030): भारत ने 2030 तक सभी भारतीय अंतरिक्ष मिशनों को 'मलबा मुक्त' बनाने का लक्ष्य रखा है।
- SpaDeX मिशन (2025): भारत ने अंतरिक्ष में उपग्रहों के स्वायत्त डॉकिंग और अनडॉकिंग का सफल प्रदर्शन किया, जो भविष्य में 'इन-ऑर्बिट सर्विसिंग' और मलबे को हटाने के लिए महत्वपूर्ण है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है
- गठन : 1969
- शुरुआत :1962
- मुख्यालय :कर्नाटक, बेंगलुरु(भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) के रूप में, डॉ. विक्रम साराभाई द्वारा)
उद्देश्य:
- भारत के लिए स्वदेशी उपग्रह व प्रक्षेपण यान तकनीक का विकास
- अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग सामाजिक व आर्थिक विकास में करना
- दूरसंचार, मौसम, टेलीमेडिसिन, संसाधन सर्वेक्षण में सहायता देना
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट (1975)
- चंद्रयान-1 (2008), मंगलयान (2013), चंद्रयान-2 (2019) जैसे प्रमुख मिशन
- 2017 में PSLV-C37 मिशन के तहत एक बार में 104 उपग्रह प्रक्षेपित कर विश्व रिकॉर्ड
- आदित्य-L1, गगनयान, मंगलयान-2 जैसे आगामी मिशन
- ISRO ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) और भू-स्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान (GSLV) विकसित किए हैं
प्रमुख केंद्र:
- विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC), तिरुवनंतपुरम – रॉकेट विकास
- यू.आर. राव अंतरिक्ष केंद्र (URSC), बेंगलुरु – उपग्रह डिजाइन एवं विकास
- सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC), श्रीहरिकोटा – उपग्रह एवं रॉकेट प्रक्षेपण
- द्रव नोडन प्रणाली केंद्र (LPSC), वलियमाला और बेंगलुरु – क्रायोजेनिक इंजन विकास
- राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC), हैदराबाद – सुदूर संवेदन डेटा प्रबंधन
- अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC), अहमदाबाद – संचार और सुदूर संवेदन अनुप्रयोग
नेतृत्व:
- ISRO का अध्यक्ष अंतरिक्ष विभाग के सचिव भी होते हैं
- जनवरी 2025 से डॉ. वी. नारायणन ISRO के अध्यक्ष हैं, जिन्होंने श्री एस. सोमनाथ का स्थान ग्रहण किया
वाणिज्यिक शाखा:
- एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Antrix Corporation Limited) ISRO की वाणिज्यिक शाखा है, जो अंतरिक्ष उत्पादों और सेवाओं का विपणन करती है और तकनीकी हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाती है।
| प्रक्षेपण यान का नाम | विवरण |
| SLV (Satellite Launch Vehicle) | ISRO का पहला प्रक्षेपण यान, 1980 के दशक में विकसित, छोटा भार (लगभग 40 किग्रा) प्रक्षेपित करता था |
| ASLV (Augmented Satellite Launch Vehicle) | SLV का उन्नत संस्करण, 150 किग्रा तक उपग्रह प्रक्षेपित कर सकता था |
| PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) | ISRO का सबसे विश्वसनीय और बहुप्रचलित प्रक्षेपण यान, 500-1500 किग्रा तक उपग्रह प्रक्षेपित करता है। चंद्रयान-1 और मंगलयान मिशन में उपयोग |
| GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle) | भूस्थिर कक्षा के लिए उपयुक्त, 2-4 टन तक उपग्रह प्रक्षेपित करता है, क्रायोजेनिक इंजन वाला रॉकेट |
| GSLV Mk III (LVM-3) | ISRO का सबसे भारी प्रक्षेपण यान, 8 टन तक पृथ्वी की निचली कक्षा में और 4 टन तक भूस्थिर कक्षा में उपग्रह प्रक्षेपित कर सकता है। मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए विकसित। |
| SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) | छोटे उपग्रहों (10 से 500 किग्रा) के लिए नवीनतम प्रक्षेपण यान, कम लागत, तेज़ प्रक्षेपण, और लचीला |
ऐतिहासिक मिशन
चंद्रयान-1 (2008):
- भारत का पहला चंद्र मिशन
- चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा और वैज्ञानिक डेटा संग्रह किया
- इसमें ‘मून इम्पैक्ट प्रोब’ ने चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग की
मंगलयान / मंगल ऑर्बिटर मिशन (2013):
- भारत का पहला मंगल मिशन
- पहला सफल प्रयास में मंगल कक्षा में पहुंचा
- विश्व में ऐसा करने वाला पहला एशियाई देश बना
चंद्रयान-2 (2019) :
- चंद्रमा का ऑर्बिटर अब भी सक्रिय है।
- लैंडर ‘विक्रम’ लैंडिंग के दौरान क्रैश हो गया।
- मिशन का ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह का अध्ययन कर रहा है।
आदित्य-L1 (2023) :
- सूर्य के अध्ययन के लिए मिशन।
- सूर्य-पृथ्वी L1 बिंदु पर स्थित है।
चंद्रयान-3 (2023) :
- भारत का तीसरा चंद्र मिशन।
- 14 जुलाई 2023 को लॉन्च हुआ।
- 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग की।
- भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग करने वाला पहला देश बना।
- इसमें लैंडर और रोवर शामिल हैं, लेकिन ऑर्बिटर नहीं।









