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Fri 10 Apr, 2026

राष्‍ट्रीय समाचार

फिनटेक पोर्टल की शुरूआत

  • अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (CAIT) और श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड ने व्यापारियों के लिए एक नया फिनटेक पोर्टल (cait.shriramfinance.in) शुरू किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • शुभारंभकर्ता : सांसद प्रवीन खंडेलवाल और कंपनी के अधिकारी जी. एम. जिलानी द्वारा
  • पोर्टल का उद्देश्य : देशभर के व्यापारियों, MSME, स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों के लिए सहज रूप से ऋण की उपलब्धता को बढ़ाना
  • CAIT (Confederation of All India Traders): यह लगभग 8 करोड़ व्यापारियों और 40,000 व्यापारिक संघों का प्रतिनिधित्व करने वाला भारत का सबसे बड़ा गैर-सरकारी व्यापारिक निकाय है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है
  • श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड: यह भारत की प्रमुख गैर-बैकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) में से एक है, जो खुदरा परिसंपत्ति वित्तपोषण (retail asset financing) में विशेषज्ञता रखती है।
  • आर्थिक प्रभाव: MSME भारत की GDP में लगभग 31% का योगदान करते हैं, लेकिन उन्हें औपचारिक ऋण प्राप्त करने में बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस तरह के फिनटेक पोर्टल उस "क्रेडिट गैप" को भरने में मदद करते हैं।

सिंधी भाषा में भारत के संविधान का नवीनतम संस्करण जारी

  • उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली में सिंधी भाषा में भारत के संविधान का नवीनतम संस्करण जारी किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • दो लिपियों में उपलब्धता: संविधान का यह अद्यतन (updated) संस्करण देवनागरी और फारसी (Persian) दोनों लिपियों में जारी किया गया है।
  • स्वतंत्रता के बाद पहली बार: भारत की स्वतंत्रता के बाद यह पहली बार है जब संविधान का सिंधी संस्करण देवनागरी लिपि में प्रकाशित हुआ है।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य भाषाई समावेशिता को बढ़ावा देना और आम नागरिकों के लिए उनकी मातृभाषा में संवैधानिक अधिकारों को सुलभ बनाना है।
  • उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा संविधान को अनेक भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की
  • उपराष्ट्रपति ने संविधान को बोडो, डोगरी, संथाली, तमिल, गुजराती और नेपाली आदि भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रयास भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाते हैं।

सिंधी समुदाय :

  • सिंधु घाटी सभ्यता: सिंधी समुदाय की जड़ें प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) से जुड़ी हैं, जो आधुनिक सिंध (पाकिस्तान) के क्षेत्र में फली-फूली थी।
  • विभाजन का प्रभाव: 1947 में भारत के विभाजन के समय, सिंध प्रांत पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। इसके कारण सिंधी हिंदुओं को बड़े पैमाने पर विस्थापन झेलना पड़ा और वे भारत के विभिन्न राज्यों (मुख्यतः गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश) में आकर बस गए।
  • संवैधानिक दर्जा: सिंधी भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची (8th Schedule) में शामिल है। इसे 21वें संविधान संशोधन अधिनियम (1967) द्वारा जोड़ा गया था
  • लिपि: भारत में सिंधी भाषा मुख्य रूप से देवनागरी और अरबी (Persian-Arabic) दोनों लिपियों में लिखी जाती है।
  • साहित्य: सिंधी साहित्य में 'शाह जो रसालो' (शाह अब्दुल लतीफ भिटाई द्वारा रचित) का महत्वपूर्ण स्थान है।
  • झूलेलाल (Ishtdev): सिंधी समुदाय के आराध्य देव भगवान झूलेलाल हैं, जिन्हें वरुण देव (जल के देवता) का अवतार माना जाता है। उनके जन्मोत्सव को 'चेटी चंड' (Cheti Chand) के रूप में मनाया जाता है, जो सिंधी नव वर्ष का प्रतीक है।
  • धर्म: भारत में रहने वाले अधिकांश सिंधी हिंदू धर्म का पालन करते हैं, जबकि पाकिस्तान के सिंध में बहुसंख्यक आबादी इस्लाम (सुन्नी और शिया) को मानती है।
  • सूफीवाद का प्रभाव: सिंधी संस्कृति पर सूफी संतों का गहरा प्रभाव रहा है, जो सांप्रदायिक सद्भाव और शांति का संदेश देते हैं।
  • जाति संरचना: भारत में सिंधी हिंदू मुख्य रूप से लोहना जाति से संबंधित हैं, जिसमें 'आमील' (प्रशासक/शिक्षित वर्ग) और 'भाईबंद' (व्यापारी वर्ग) जैसे उप-समूह शामिल हैं।
  • सिद्दी समुदाय (Siddi Community) से भ्रमित न हों: सिद्दी समुदाय मूल रूप से अफ्रीकी मूल के लोग हैं जो भारत के पश्चिमी तट (गुजरात, कर्नाटक) में रहते हैं और अनुसूचित जनजाति (ST) के अंतर्गत आते हैं। सिंधी और सिद्दी दो अलग-अलग समुदाय हैं।

सिंधी भाषा :

  • आठवीं अनुसूची: सिंधी भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है।
  • संशोधन: इसे 21वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1967 के माध्यम से 15वीं आधिकारिक भाषा के रूप में जोड़ा गया था। यह उन कुछ भाषाओं में से एक है जिसका कोई अपना विशिष्ट भौगोलिक राज्य (Territorial State) नहीं है
  • भाषा परिवार: यह इंडो-आर्यन (Indo-Aryan) भाषा परिवार का हिस्सा है।

FIU-IND और I4C के बीच समझौता

  • भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी से निपटने के उद्देश्‍य से वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIU-IND) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) समझौता किया।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • उद्देश्य: साइबर-सक्षम वित्तीय अपराधों (Cyber-enabled financial crimes) से मिलकर लड़ना और देश के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को सुरक्षित करना।
  • हस्ताक्षरकर्ता: MoU पर FIU-IND के निदेशक अमित मोहन गोविल और I4C के सीईओ राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए

मुख्य पहलू:

  • सूचना साझाकरण: संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और साइबर अपराध की जानकारी को वास्तविक समय (Real-time) में साझा करना।
  • प्रचालनगत खुफिया जानकारी: जांच एजेंसियों की सहायता के लिए खुफिया जानकारी विकसित करना।
  • परिसंपत्ति वसूली: धोखाधड़ी से की गई परिसंपत्तियों की वसूली में मदद।
  • नीतिगत सुधार: वित्तीय संस्थानों के लिए रेड फ्लैग इंडिकेटर (Red flag indicators) और दिशा-निर्देश जारी करना।

वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIU-IND) :

  • भारत की एक प्रमुख केंद्रीय एजेंसी है, जो मुख्य रूप से धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ काम करती है।
  • मंत्रालय: यह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग (Department of Revenue) के अधीन कार्य करती है।
  • रिपोर्टिंग: यह सीधे आर्थिक खुफिया परिषद (Economic Intelligence Council - EIC) को रिपोर्ट करती है, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री करते हैं।

मुख्य कार्य (Core Functions) :

  • सूचना प्राप्त करना (Receiving): विभिन्न संस्थाओं (जैसे बैंक, वित्तीय संस्थान) से नकदी लेनदेन रिपोर्ट (CTR) और संदिग्ध लेनदेन रिपोर्ट (STR) प्राप्त करना।
  • प्रसंस्करण (Processing): डेटा को व्यवस्थित करना।
  • विश्लेषण (Analysis): लेनदेन के पैटर्न का अध्ययन कर संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाना।
  • प्रसार (Dissemination): विश्लेषण के बाद महत्वपूर्ण जानकारी को प्रवर्तन एजेंसियों (जैसे ED, CBI, आयकर विभाग) और विदेशी FIUs के साथ साझा करना।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) :

  • भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) भारत में साइबर अपराध से निपटने के लिए गृह मंत्रालय (MHA) की सबसे महत्वपूर्ण पहल है
  • स्थापना: इसकी कल्पना 2018 में की गई थी और 10 जनवरी 2020 को इसे आधिकारिक तौर पर राष्ट्र को समर्पित किया गया।
  • मंत्रालय: यह गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs - MHA) के अधीन कार्य करता है।
  • मुख्यालय: इसका मुख्य केंद्र नई दिल्ली में स्थित है।

I4C के सात प्रमुख घटक :

  • नेशनल साइबर क्राइम थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट (TAU): साइबर खतरों का विश्लेषण करना।
  • नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP): जहाँ नागरिक ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करते हैं (www.cybercrime.gov.in)।
  • नेशनल साइबर क्राइम ट्रेनिंग सेंटर (CyTrain): पुलिस अधिकारियों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण और प्रमाणन।
  • नेशनल साइबर क्राइम रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर: नई तकनीकों और समाधानों पर शोध।
  • नेशनल साइबर क्राइम इकोसिस्टम मैनेजमेंट यूनिट: सरकारी और निजी क्षेत्रों के बीच समन्वय।
  • नेशनल साइबर क्राइम फॉरेंसिक लेबोरेटरी (NCFL): डिजिटल साक्ष्यों की जांच के लिए अत्याधुनिक लैब।
  • संयुक्त साइबर अपराध जांच दल (JCCT): अंतर-राज्यीय अपराधों की जांच के लिए राज्यों के बीच तालमेल।

वित्त वर्ष 2025-26 में जेम पोर्टल पर खरीद के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर

  • उत्तर प्रदेश ने वित्त वर्ष 2025-26 में जेम (GeM - Government e-Marketplace) पोर्टल के माध्यम से ₹22,337 करोड़ की रिकॉर्ड खरीद कर देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
  • राज्य ने अपनी 'जेम क्रय नीति-2024' के तहत पारंपरिक निविदा प्रणाली को पूरी तरह से ऑनलाइन पोर्टल में बदलकर पारदर्शिता और शुचिता में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • वित्त वर्ष 2025-26 में यूपी के विभिन्न विभागों द्वारा जेम पोर्टल से की गई खरीद में नगर विकास विभाग सबसे आगे रहा। नगर विकास विभाग: 3,606 करोड़
  • महिला उद्यमियों का बढ़ता योगदान 2025-26: 4,755 करोड़
  • एससी/एसटी उद्यमियों की भागीदारी : 2025-26: 752 करोड़
  • सरकारी ई-मार्केटप्लेस ( GeM ) :
  • भारत में सामान और सर्विस दोनों के लिए एक ऑनलाइन पब्लिक प्रोक्योरमेंट पोर्टल।
  • अगस्त 2016 में लॉन्च किया गया , यह भारत के डिजिटल गवर्नेंस सुधार का एक अहम पिलर है।
  • मंत्रालय: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन ।
  • स्वामित्व: GeM SPV (स्पेशल पर्पस व्हीकल) के पास , जो 100% सरकारी मालिकाना हक वाली, नॉन-प्रॉफिट सेक्शन 8 कंपनी है।
  • कानूनी अधिदेश: सामान्य वित्तीय नियम (जीएफआर), 2017 के नियम 149 के तहत केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों के लिए GeM के माध्यम से खरीद अनिवार्य है ।
  • टारगेट ऑडियंस: केंद्र और राज्य सरकार के डिपार्टमेंट, PSU, ऑटोनॉमस संस्थाएं और लोकल बॉडी। 2022 में, इसका दायरा बढ़ाकर कोऑपरेटिव को खरीदार बनाने की इजाज़त दी गई।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी

मेगालोपिनस वंश की तीन नई प्रजातियों की खोज

  • अरुणाचल प्रदेश में शोधकर्ताओं ने रोव बीटल की तीन नई प्रजातियों (मेगालोपिनस अरुणाचलेन्सिस, मेगालोपिनस मिथुन, और मेगालोपिनस माइक्रोस) की खोज की है।

नई प्रजातियों के नाम :

  • मेगालोपिनस अरुणाचलेन्सिस (Megalopinus arunachalensis): इसका नाम उस राज्य (अरुणाचल प्रदेश) के नाम पर रखा गया है जहाँ इसे खोजा गया है।
  • मेगालोपिनस मिथुन (Megalopinus mithun): इसका नाम अरुणाचल प्रदेश के राज्य पशु, मिथुन (Gayal) के नाम पर रखा गया है।
  • मेगालोपिनस माइक्रोस (Megalopinus micros): 'माइक्रोस' का अर्थ छोटा होता है, जो इसके सूक्ष्म आकार को दर्शाता है।
  • खोजकर्ता: अरुणाचल प्रदेश में राजीव गांधी विश्वविद्यालय और जर्मनी के ट्यूबिंजन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा
  • प्रकाशित : 'सॉइल ऑर्गेनिज़म्स' (Soil Organisms) पत्रिका में

रोव बीटल (Rove Beetle) :

  • परिवार: ये स्टैफिलीनइडे (Staphylinidae) परिवार से संबंधित हैं, जो दुनिया में जीवित जीवों के सबसे बड़े परिवारों में से एक है।
  • विशेषताएँ: इनकी पहचान इनके छोटे एलीट्रा (Elitra - पंख के आवरण) से होती है, जिससे इनके पेट का अधिकांश हिस्सा खुला रहता है।
  • आहार: ये मुख्य रूप से मांसाहारी होते हैं और छोटे कीड़ों का शिकार करते हैं, जिससे ये पारिस्थितिकी तंत्र में कीट नियंत्रण में मदद करते हैं।
  • यह खोज नामदफा राष्ट्रीय उद्यान (Namdapha National Park) के आसपास के क्षेत्रों में की गई है।
  • यह खोज दर्शाती है कि पूर्वी हिमालय क्षेत्र (एक वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट) अभी भी कई अज्ञात प्रजातियों का घर है।

रिर्पोट एवं सूचकांक

‘नवीकरणीय ऊर्जा सांख्यिकी 2026’

  • अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) ने ‘नवीकरणीय ऊर्जा सांख्यिकी 2026’ जारी किया है, जिसके अनुसार भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर है।

वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा रैंकिंग (IRENA 2026) :

 

वैश्विक स्थिति :

  • चीन: 2,258.02 GW
  • संयुक्त राज्य अमेरिका: 467.92 GW
  • भारत: 250.52 GW

भारत में नवीकरणीय ऊर्जा की वर्तमान स्थिति :

  • 31 मार्च 2026 तक, गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से भारत की कुल स्थापित क्षमता 283.46 GW है।
  • वर्ष 2025–26 के दौरान, देश ने 1,845.92 बिलियन यूनिट (BU) बिजली का उत्पादन किया, जिसमें गैर-जीवाश्म स्रोतों का योगदान 29.2% (538.97 BIU) था
  • नवीकरणीय ऊर्जा का योगदान 274.68 GW

इसमें शामिल :

  • सौर ऊर्जा : 150.26 GW
  • पवन ऊर्जा : 56.09 GW
  • जैव ऊर्जा : 11.75 GW
  • लघु जल विद्युत : 5.17 GW
  • बड़ी जल विद्युत : 51.41 GW
  • परमाणु ऊर्जा का योगदान : 8.78 GW
  • राज्यवार संकेंद्रण: नवीकरणीय ऊर्जा की 70% से अधिकक्षमता छह राज्यों में केंद्रित है: राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और मध्य प्रदेश।
  • क्षमता एवं उत्पादन: स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 10.93% की सीएजीआर से वृद्धि हुई (2016-2025), जबकिनवीकरणीय ऊर्जा से कुल बिजली उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 4,16,823 गीगावॉट घंटे तक पहुंच गया।
  • खपत के रुझान: प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत2015-16 में 15,296 मेगावाट जूल से बढ़कर 2024-25 में 18,096 मेगावाट जूल हो गई।
  • दक्षता में वृद्धि: पारेषण और वितरण (टी एंड डी) में होने वाले नुकसान वित्त वर्ष 2015-16 में 22% से घटकरवित्त वर्ष 2024-25 में 17% हो गए।
  • जीवाश्म ईंधन का प्रभुत्व: कोयला प्राथमिक ऊर्जा स्रोत बना हुआ है, जिसकी आपूर्तिवित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 5,52,315 किलोटाइम ई. हो जाएगी।
  • वित्तीय वृद्धि: ऊर्जा क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण का प्रवाह छह गुना से अधिक बढ़ गया है , जो 2021 में ₹1,688 करोड़ से बढ़कर2025 में ₹10,325 करोड़ हो गया है।

पंचामृत लक्ष्य :

  • प्रधान मंत्री ने COP26 (ग्लासगो, 2021) में पाँच अमृत तत्वों की घोषणा की थी
  1. गैर-जीवाश्म क्षमता: 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 GW तक पहुँचाना।
  2. नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा: 2030 तक अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% नवीकरणीय ऊर्जा से पूरा करना। (भारत ने इसे 2025 में ही काफी हद तक छू लिया है)।
  3. कार्बन उत्सर्जन में कमी: अब से 2030 तक कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कमी करना।
  4. कार्बन तीव्रता (Carbon Intensity): 2030 तक अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता को 45% से अधिक कम करना (2005 के स्तर से)।
  5. नेट जीरो: वर्ष 2070 तक 'नेट जीरो' (शुद्ध शून्य उत्सर्जन) का लक्ष्य प्राप्त करना।

रक्षा समाचार

संयुक्त अभ्यास साइक्लोन- IV

  • भारत-मिस्र के बीच संयुक्त अभ्यास साइक्लोन- IV के चौथे संस्करण का आयोजन मिस्र के अनशास में किया जा रहा है।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • प्रकार: यह दोनों देशों के विशेष बलों (Special Forces) के बीच एक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास है।
  • भागीदारी: भारतीय दल में विशेष बलों (Para SF) के 25 कर्मी शामिल हैं, जो मिस्र के समकक्षों के साथ प्रशिक्षण लेंगे।
  • स्थान: यह मिस्र के अनशास स्थित 'रेंजर्स फोर्सेज मुख्यालय' में आयोजित हो रहा है।
  • पृष्ठभूमि: इस अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। पहला संस्करण राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित किया गया था।
  • आयोजन : 9 से 17 अप्रैल, 2026 तक मिस्र के अनशास (Anshas) में
  • पिछला संस्करण: इसका तीसरा संस्करण फरवरी 2025 में राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया था

भारत और मिस्र के बीच अन्य अभ्यास :

  • डेजर्ट वॉरियर (Exercise Desert Warrior): दोनों देशों की वायु सेनाओं के बीच अभ्यास।
  • ब्राइट स्टार (Exercise Bright Star): यह एक बहुपक्षीय अभ्यास है जिसमें दोनों देश भाग लेते हैं।

पुरस्‍कार और सम्‍मान

17वां निर्माण उद्योग विकास परिषद विश्वकर्मा पुरस्कार समारोह

  • 17वें निर्माण उद्योग विकास परिषद विश्वकर्मा पुरस्कार समारोह का आयोजन नई दिल्ली में किया गया, जिसको सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संबोधित किया।
  • गडकरी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य देश भर में निर्माण की गुणवत्ता में सुधार करना और इसकी लागत को कम करना है।
  • उन्होंने भारत के निर्माण और अवसंरचना क्षेत्र की क्षमता को राष्ट्र के आर्थिक विकास के स्तंभ के रूप में उल्‍लेख किया।

‘लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार 2026’

  • नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी को ‘लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार 2026’ से सम्मानित किया जाएगा।
  • यह घोषणा मास्टर दीनानाथ मंगेशकर की 84वीं पुण्यतिथि के अवसर पर की गई है और यह पुरस्कार 24 अप्रैल 2026 को पुणे में प्रदान किया जाएगा।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • पुरस्कार की घोषणा: पद्मश्री पं. हृदयनाथ मंगेशकर ने की।
  • पुरस्कार वितरण तिथि: 24 अप्रैल 2026।
  • स्थान: गणेश कला क्रीडा मंच, पुणे।
  • पुरस्कार के कारण: बाल अधिकार और सामाजिक न्याय के लिए वैश्विक योगदान।
  • मुख्य अतिथि: डॉ. विश्वनाथ कराड (एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक)।

वर्ष 2026 के अन्य प्रमुख विजेता :

  • संगीत: महेश काले
  • चित्रपट (सिनेमा): रवीना टंडन और प्राजक्ता माली
  • नाटक व फिल्म: सुबोध भावे
  • साहित्य: अच्युत गोडबोले
  • नृत्य: शमा भाटे
  • पत्रकारिता: सुशील कुलकर्णी
  • विशेष पुरस्कार: डॉ. आनंद भागवत (समाज सेवा)

लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार :

  • स्थापना: इसकी शुरुआत वर्ष 2022 में भारत रत्न लता मंगेशकर की स्मृति में की गई थी।
  • संस्था: यह पुरस्कार 'मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान' द्वारा दिया जाता है।
  • उद्देश्य: यह उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने राष्ट्र, इसके लोगों और समाज के लिए "असाधारण और पथ-प्रदर्शक" योगदान दिया हो।

पूर्व प्राप्तकर्ता:

  • 2022 (प्रथम): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • 2023: आशा भोसले
  • 2024: अमिताभ बच्चन
  • 2025: कुमार मंगलम बिड़ला

कैलाश सत्यार्थी :

  • एक प्रसिद्ध भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता है
  • जन्म: 11 जनवरी, 1954 को मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में हुआ।
  • मूल नाम: उनका जन्म का नाम कैलाश शर्मा था, लेकिन सामाजिक समानता और छुआछूत के खिलाफ संदेश देने के लिए उन्होंने अपना उपनाम बदलकर 'सत्यार्थी' (सत्य की खोज करने वाला) कर लिया।
  • बचपन बचाओ आंदोलन (BBA): 1980 में उन्होंने इस संगठन की स्थापना की, जिसके माध्यम से अब तक 1,00,000 से अधिक बच्चों को बाल श्रम, तस्करी और गुलामी से मुक्त कराया जा चुका है।
  • नोबेल शांति पुरस्कार (2014): उन्हें यह सम्मान पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से "बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ उनके संघर्ष" के लिए दिया गया।
  • आत्मकथा: उनकी आत्मकथा का नाम 'दियासलाई' है, जो उनके जीवन के संघर्षों और प्रेरणाओं को दर्शाती है।

महत्‍वपूर्ण दिवस

‘विश्व होम्योपैथी दिवस’

  • होम्योपैथी के संस्थापक, जर्मन चिकित्सक डॉ. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनीमैन की जयंती के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 10 अप्रैल को ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ मनाया जाता है।
  • भारत में इसे पहली बार 2005 में मनाया गया था।

सम्‍बन्धित तथ्‍य :

  • इस वर्ष (2026) की थीम : “स्थायी स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी” (Homoeopathy for Sustainable Health)
  • सैमुअल हैनिमैन (1755-1843) एक जर्मन चिकित्सक थे, जिन्होंने 18 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में होम्योपैथी की स्थापना की । उनकी मौलिक रचना, ' ऑर्गेनॉन ऑफ मेडिसिन' , विश्व स्तर पर होम्योपैथी के अभ्यास का मार्गदर्शन करती है, और उनकी जयंती 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाई जाती है।
  • होम्योपैथी ने भारत में पहली बार 1810 में प्रवेश किया जब जर्मन मिशनरियों ने दवाओं का वितरण शुरू किया
  • भारत में 3.45 लाख पंजीकृत होम्योपैथी डॉक्टर, 8,593 होम्योपैथी औषधालय, 277 होम्योपैथी शिक्षण संस्थान और 34 अनुसंधान केंद्र हैं।
  • 1847: तमिलनाडु के तंजौर में सबसे शुरुआती होम्योपैथिक अस्पतालों में से एक की स्थापना हुई।
  • 1973: होम्योपैथी की केंद्रीय परिषद की स्थापना
  • 1978: होम्योपैथी अनुसंधान के लिए केंद्रीय परिषद की स्थापना

 

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