01 April, 2026
भारत का प्रथम स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर
Sun 05 Apr, 2026
संदर्भ :
- तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित भारत के 500 MWe स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार क्रिटिकैलिटी हासिल किया।
मुख्य बिन्दु :
- यह उपलब्धि भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में औपचारिक प्रवेश का प्रतीक है, जिसकी परिकल्पना डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने की थी।
- परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने भी इसे डॉ. होमी जहांगीर भाभा के तीन-चरणीय कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश का प्रतीक बताया।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “देश की सिविल न्यूक्लियर यात्रा में निर्णायक कदम” बताया
|
प्रथम चरण (Stage 1) :
इस चरण का मुख्य उत्पाद: प्लूटोनियम-239 :
द्वितीय चरण (Stage 2) :
मुख्य विशेषताएं (PFBR - कल्पक्कम) :
तृतीय चरण (Stage 3) :
उन्नत भारी जल रिएक्टर (AHWR) :
|
रिएक्टर की तकनीकी विशेषताएं :
- डिज़ाइन और निर्माण: इसे इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा निर्मित किया गया है।
- फास्ट ब्रीडर तकनीक: यह रिएक्टर खपत किए गए ईंधन से अधिक ईंधन (प्लूटोनियम-239) पैदा करता है।
- ईंधन: इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग किया जाता है।
- शीतलक (Coolant): इसमें तरल सोडियम का उपयोग कूलेंट के रूप में किया जाता है।
सामरिक और आर्थिक महत्व :
- वैश्विक स्थिति: रूस के बाद व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला भारत दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।
- ऊर्जा सुरक्षा: यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और यूरेनियम के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- थोरियम का मार्ग: PFBR का सफल संचालन भारत के विशाल थोरियम भंडार (दुनिया का लगभग 25%) के उपयोग के लिए आधार तैयार करता है
- पर्यावरण: यह 2070 तक भारत के नेट जीरो (Net Zero) लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।
- क्रिटिकैलिटी का अर्थ: यह वह स्थिति है जहां परमाणु रिएक्टर एक स्व-स्थायी विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया (Self-sustaining fission chain reaction) शुरू करता है, जो नियंत्रित बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक है।
भारत में परमाणु रिएक्टरों के प्रकार और स्थिति
1. दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWR) :
- तकनीक: प्राकृतिक यूरेनियम ईंधन और भारी जल को शीतलक व मॉडरेटर के रूप में उपयोग।
- विशेषता: यूरेनियम संवर्धन की आवश्यकता नहीं।
- स्थिति: भारत के अधिकांश परिचालन रिएक्टर इसी डिजाइन पर आधारित हैं। कई नए 700 MWe क्षमता वाले PHWR निर्माणाधीन हैं।
- उदाहरण: कैगा, काकरापार, नरोरा।
2. प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर (PWR) :
- तकनीक: उच्च दबाव में सामान्य पानी शीतलक और मॉडरेटर दोनों के रूप में।
- विशेषता: रिएक्टर कोर से ऊष्मा अलग जल लूप में स्थानांतरित होती है, जिससे टर्बाइन के लिए भाप बनती है।
- स्थिति: तमिलनाडु के कुडनकुलम में रूस द्वारा डिजाइन किए गए दो PWR चालू हैं, चार अन्य इकाइयाँ निर्माणाधीन।
3. उबलते जल रिएक्टर (BWR) :
- तकनीक: पानी सीधे रिएक्टर कोर में उबलकर भाप बनाता है, जो टर्बाइन चलाती है।
- स्थिति: महाराष्ट्र के तारापुर में दो BWR इकाइयाँ संचालित हैं। भविष्य में नए BWR की योजना नहीं है।
4. फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) :
- तकनीक: तीव्र न्यूट्रॉन और तरल सोडियम शीतलक का उपयोग।
- विशेषता: जितना ईंधन खर्च करता है, उससे अधिक नया ईंधन (Pu-239) पैदा करता है।
- स्थिति: कलपक्कम में 500 MWe क्षमता वाला PFBR प्रथम क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर चुका है और कमीशनिंग जारी है। वहीं छोटा FBTR अनुसंधान हेतु संचालित है।
5. लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) :
- तकनीक: छोटे, मॉड्यूलर इकाइयों में डिज़ाइन किए गए कॉम्पैक्ट रिएक्टर।
- विशेषता: कारखाने में निर्मित होकर साइट पर असेंबल किए जा सकते हैं।
- स्थिति: भारत में अभी कोई परिचालन में नहीं है, लेकिन BSNR-200 और SMR-55 जैसे स्वदेशी डिज़ाइन पर काम चल रहा है।
6. उन्नत रिएक्टर (Advanced Reactors) :
- तकनीक: उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर और पिघले हुए नमक रिएक्टर।
- विशेषता: हीलियम या पिघले हुए लवण जैसे वैकल्पिक शीतलक का उपयोग, उच्च दक्षता और बेहतर सुरक्षा।
- स्थिति: भारत में अनुसंधान या अवधारणात्मक चरण में।
- नोट : भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रीढ़ PHWR हैं।









