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भारत का प्रथम स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर

Sun 05 Apr, 2026

संदर्भ :

  • तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित भारत के 500 MWe स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार क्रिटिकैलिटी हासिल किया।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • यह उपलब्धि भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण में औपचारिक प्रवेश का प्रतीक है, जिसकी परिकल्पना डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने की थी।
  • परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने भी इसे डॉ. होमी जहांगीर भाभा के तीन-चरणीय कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश का प्रतीक बताया।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “देश की सिविल न्यूक्लियर यात्रा में निर्णायक कदम” बताया

 

 

प्रथम चरण (Stage 1) :

  • मुख्य तकनीक: PHWR
  • ईंधन (Fuel): इसमें प्राकृतिक यूरेनियम (Natural Uranium) का उपयोग किया जाता है। इसमें केवल 0.7% यूरेनियम-235 (विखंडन योग्य) होता है, बाकी यूरेनियम-238 होता है।
  • मंदक और शीतलक (Moderator & Coolant): इसमें भारी जल का उपयोग किया जाता है। भारी जल न्यूट्रॉन को धीमा करने में बहुत कुशल है, जिससे प्राकृतिक यूरेनियम के साथ भी श्रृंखला अभिक्रिया (chain reaction) संभव हो पाती है।
  • फायदा: इसके लिए यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) की महंगी तकनीक की आवश्यकता नहीं होती।

इस चरण का मुख्य उत्पाद: प्लूटोनियम-239 :

  • जब प्राकृतिक यूरेनियम (U-238) रिएक्टर के अंदर न्यूट्रॉन सोखता है, तो वह प्लूटोनियम-239 (Pu-239) में बदल जाता है।
  • इस खर्च हुए ईंधन (Spent Fuel) को पुनर्चक्रित (Reprocess) करके प्लूटोनियम निकाला जाता है, जो दूसरे चरण (PFBR) के लिए मुख्य ईंधन का काम करता है।
  • भारत में वर्तमान में संचालित अधिकांश परमाणु रिएक्टर (जैसे कैगा, काकरापार, नरोरा) PHWR श्रेणी के ही हैं।
  • इनका संचालन न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) द्वारा किया जाता है।

द्वितीय चरण (Stage 2) :

  • इस रिएक्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जितना विखंडन योग्य ईंधन (Fissile fuel) खर्च करता है, उससे कहीं अधिक नया ईंधन पैदा (Breed) करता है।
  • प्रक्रिया: इसमें प्रथम चरण (PHWR) से प्राप्त प्लूटोनियम-239 को ईंधन के रूप में जलाया जाता है। इसके चारों ओर यूरेनियम-238 की एक परत (Blanket) रखी जाती है। न्यूट्रॉन की बमबारी से यह यूरेनियम-238 फिर से प्लूटोनियम-239 में बदल जाता है।

मुख्य विशेषताएं (PFBR - कल्पक्कम) :

  • ईंधन: मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन (प्लूटोनियम डाइऑक्साइड + यूरेनियम डाइऑक्साइड)।
  • न्यूट्रॉन की गति: इसमें न्यूट्रॉन को धीमा करने के लिए किसी मंदक (Moderator) का उपयोग नहीं किया जाता, इसलिए इसे 'फास्ट' रिएक्टर कहते हैं।
  • शीतलक (Coolant): इसमें पानी के बजाय तरल सोडियम (Liquid Sodium) का उपयोग होता है क्योंकि यह उच्च तापमान पर गर्मी को तेजी से सोखता है।

तृतीय चरण (Stage 3) :

  • भारत के परमाणु कार्यक्रम का तृतीय चरण (Stage 3) अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है, क्योंकि यह भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाने की क्षमता रखता है
  • ईंधन: इस चरण में थोरियम-232 का उपयोग किया जाएगा। थोरियम स्वयं विखंडन योग्य (Fissile) नहीं है, इसलिए इसे दूसरे चरण (FBR) से प्राप्त यूरेनियम-233 (U-233) के साथ मिलाकर उपयोग किया जाएगा।
  • ब्रीडर तकनीक: ये रिएक्टर थोरियम को जलाकर और अधिक U-233 पैदा करेंगे, जिससे ईंधन का एक निरंतर चक्र बन जाएगा।
  • भारत के पास दुनिया के थोरियम भंडार का लगभग 25% हिस्सा है (मुख्यतः केरल और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों की मोनाज़ाइट रेत में)।
  • ऊर्जा सुरक्षा: थोरियम आधारित रिएक्टर आने वाले 300-400 वर्षों तक भारत की बिजली जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
  • सुरक्षा: थोरियम रिएक्टर यूरेनियम रिएक्टरों की तुलना में अधिक सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि इनमें रेडियोधर्मी कचरा कम निकलता है।

उन्नत भारी जल रिएक्टर (AHWR) :

  • भारत इस चरण के लिए Advanced Heavy Water Reactor (AHWR) विकसित कर रहा है।
  • यह एक स्वदेशी डिजाइन है जो थोरियम-यूरेनियम-233 चक्र का उपयोग करके बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन करेगा।

रिएक्टर की तकनीकी विशेषताएं :

  • डिज़ाइन और निर्माण: इसे इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा निर्मित किया गया है।
  • फास्ट ब्रीडर तकनीक: यह रिएक्टर खपत किए गए ईंधन से अधिक ईंधन (प्लूटोनियम-239) पैदा करता है।
  • ईंधन: इसमें यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग किया जाता है।
  • शीतलक (Coolant): इसमें तरल सोडियम का उपयोग कूलेंट के रूप में किया जाता है।

सामरिक और आर्थिक महत्व :

  • वैश्विक स्थिति: रूस के बाद व्यावसायिक स्तर पर फास्ट ब्रीडर रिएक्टर संचालित करने वाला भारत दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।
  • ऊर्जा सुरक्षा: यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और यूरेनियम के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • थोरियम का मार्ग: PFBR का सफल संचालन भारत के विशाल थोरियम भंडार (दुनिया का लगभग 25%) के उपयोग के लिए आधार तैयार करता है
  • पर्यावरण: यह 2070 तक भारत के नेट जीरो (Net Zero) लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा।
  • क्रिटिकैलिटी का अर्थ: यह वह स्थिति है जहां परमाणु रिएक्टर एक स्व-स्थायी विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया (Self-sustaining fission chain reaction) शुरू करता है, जो नियंत्रित बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक है।

भारत में परमाणु रिएक्टरों के प्रकार और स्थिति

1. दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWR) : 

  • तकनीक: प्राकृतिक यूरेनियम ईंधन और भारी जल को शीतलक व मॉडरेटर के रूप में उपयोग।
  • विशेषता: यूरेनियम संवर्धन की आवश्यकता नहीं।
  • स्थिति: भारत के अधिकांश परिचालन रिएक्टर इसी डिजाइन पर आधारित हैं। कई नए 700 MWe क्षमता वाले PHWR निर्माणाधीन हैं।
  • उदाहरण: कैगा, काकरापार, नरोरा।

2. प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर (PWR) : 

  • तकनीक: उच्च दबाव में सामान्य पानी शीतलक और मॉडरेटर दोनों के रूप में।
  • विशेषता: रिएक्टर कोर से ऊष्मा अलग जल लूप में स्थानांतरित होती है, जिससे टर्बाइन के लिए भाप बनती है।
  • स्थिति: तमिलनाडु के कुडनकुलम में रूस द्वारा डिजाइन किए गए दो PWR चालू हैं, चार अन्य इकाइयाँ निर्माणाधीन।

3. उबलते जल रिएक्टर (BWR) : 

  • तकनीक: पानी सीधे रिएक्टर कोर में उबलकर भाप बनाता है, जो टर्बाइन चलाती है।
  • स्थिति: महाराष्ट्र के तारापुर में दो BWR इकाइयाँ संचालित हैं। भविष्य में नए BWR की योजना नहीं है।

4. फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) : 

  • तकनीक: तीव्र न्यूट्रॉन और तरल सोडियम शीतलक का उपयोग।
  • विशेषता: जितना ईंधन खर्च करता है, उससे अधिक नया ईंधन (Pu-239) पैदा करता है।
  • स्थिति: कलपक्कम में 500 MWe क्षमता वाला PFBR प्रथम क्रिटिकैलिटी प्राप्त कर चुका है और कमीशनिंग जारी है। वहीं छोटा FBTR अनुसंधान हेतु संचालित है।

5. लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) : 

  • तकनीक: छोटे, मॉड्यूलर इकाइयों में डिज़ाइन किए गए कॉम्पैक्ट रिएक्टर।
  • विशेषता: कारखाने में निर्मित होकर साइट पर असेंबल किए जा सकते हैं।
  • स्थिति: भारत में अभी कोई परिचालन में नहीं है, लेकिन BSNR-200 और SMR-55 जैसे स्वदेशी डिज़ाइन पर काम चल रहा है।

6. उन्नत रिएक्टर (Advanced Reactors) : 

  • तकनीक: उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर और पिघले हुए नमक रिएक्टर।
  • विशेषता: हीलियम या पिघले हुए लवण जैसे वैकल्पिक शीतलक का उपयोग, उच्च दक्षता और बेहतर सुरक्षा।
  • स्थिति: भारत में अनुसंधान या अवधारणात्मक चरण में।
  • नोट : भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रीढ़ PHWR हैं।

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