01 April, 2026
टेक्सटाइल्स एंड क्लोथिंग मार्केट: नेशनल हाउसहोल्ड सर्वे 2024
Tue 07 Apr, 2026
संदर्भ :
- वस्त्र मंत्रालय ने "वस्त्र और परिधान बाजार: राष्ट्रीय घरेलू सर्वेक्षण 2024" रिपोर्ट जारी किया है।
मुख्य बिन्दु :
- यह सर्वे पहली बार बड़े स्तर पर घरेलू उपभोग (Consumption) का आकलन करता है।
- पहले अधिक ध्यान निर्यात पर था, लेकिन अब घरेलू बाजार को विकास का प्रमुख इंजन माना जा रहा है।
- यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं (Policy Makers) को सही दिशा में निर्णय लेने में मदद करेगी।
- सरकार उत्पादन, रोजगार और निवेश बढ़ाने के लिए नई नीतियाँ बना सकती है।
- टेक्सटाइल उद्योग के लिए यह एक डेटा-आधारित गाइड है।
- कंपनियाँ उपभोक्ता मांग, ट्रेंड और बाजार विस्तार को समझकर अपनी रणनीति तय कर सकती हैं।
- भारत का T&C सेक्टर रोजगार सृजन (Employment Generation) का बड़ा स्रोत है।
- घरेलू मांग बढ़ने से GDP में योगदान और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
- यह रिपोर्ट लंबी अवधि (Long-term) की रणनीति बनाने में मदद करेगी।
- मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को मजबूती मिलेगी।
रिर्पोट के अनुसार :
- पिछले 15 वर्षों में कपड़ों की घरेलू मांग में मजबूत वृद्धि हुई है।
- बाजार का आकार: भारत में वस्त्रों का कुल बाजार आकार 2010 के ₹4.89 लाख करोड़ से बढ़कर 2024 में ₹14.95 लाख करोड़ हो गया है, जो 8.3% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) को दर्शाता है।
- घरेलू और घरेलू मांग: कुल बाजार में से घरेलू बाजार (Domestic Market) का आकार ₹12.02 लाख करोड़ है, जिसमें व्यक्तिगत घरेलू मांग (Household Demand) का हिस्सा ₹8.77 लाख करोड़ है।
- प्रति व्यक्ति मांग: प्रति व्यक्ति वस्त्रों की मांग 2010 के ₹2,119 से बढ़कर 2024 में ₹6,066 हो गई है , जिसमें 7.8% की CAGR वृद्धि हुई, जो मजबूत वृद्धि की दिशा को दर्शाती है।
- अनुमानों से पता चलता है कि उसी अवधि में व्यक्तियों द्वारा कपड़ों की प्रति व्यक्ति मांग में मजबूत वृद्धि हुई।
- महिला उपभोक्ताओं का योगदान: 55.5%
- पुरुष उपभोक्ताओं का योगदान: 44.5%
फाइबर का प्रकार:
- मानव निर्मित फाइबर (MMF) और मिश्रित फाइबर: इनका योगदान सबसे अधिक 52.2% है।
- कपास (Cotton): कपास आधारित उत्पादों का योगदान 41.2% है।
- रेशम और ऊन: इनका योगदान क्रमशः 5.2% और 1.3% है।
- उपभोक्ता रुझान: महिला उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी कुल वस्त्र खरीद में 55.5% है, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 44.5% है।
- MMF और ब्लेंडेड फाइबर का दबदबा: ₹4.47 लाख करोड़ की मांग के साथ यह क्षेत्र बाजार का नेतृत्व कर रहा है। यह दर्शाता है कि टिकाऊपन और कम कीमत के कारण भारतीय उपभोक्ता अब सिंथेटिक और मिश्रित कपड़ों की ओर तेजी से झुके हैं।
- कपास (Cotton) की उच्च विकास दर: भले ही कुल मूल्य में कपास दूसरे स्थान पर है, लेकिन इसकी 10.53% की CAGR (जो MMF की 8.28% से अधिक है) यह बताती है कि प्रीमियम और आरामदायक कपड़ों के लिए प्राकृतिक फाइबर की मांग अभी भी बहुत मजबूत है।
- विविधीकरण: रेशम (8.93%) और ऊन (7.02%) की स्थिर वृद्धि दर्शाती है कि पारंपरिक और मौसमी वस्त्रों का बाजार भी अपनी पकड़ बनाए हुए है।
वृद्धि के प्रमुख कारण :
- घरेलू मांग में तेजी : बदलती जीवनशैली और शहरीकरण से कपड़ों की खपत बढ़ी।
- सिंथेटिक और मिश्रित फाइबर की लोकप्रियता : टिकाऊ और सस्ते विकल्प होने के कारण इनकी मांग सबसे तेजी से बढ़ी।
- महिला उपभोक्ता शक्ति : महिलाओं ने वस्त्र खरीद में सबसे बड़ा हिस्सा लिया।
- फैशन और परिधान उद्योग का विस्तार : ब्रांडेड और रेडीमेड कपड़ों की मांग में उछाल।
भविष्य की संभावनाएँ :
- ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म कपड़ा बाजार को और आगे बढ़ाएंगे।
- सतत फैशन (Sustainable Fashion) की ओर झुकाव – पर्यावरण अनुकूल कपड़ों की मांग बढ़ने की संभावना।
- ग्रामीण बाजारों में विस्तार – बढ़ती आय और जागरूकता से ग्रामीण क्षेत्रों में वस्त्र खपत तेज होगी।
वस्त्र मंत्रालय की प्रमुख योजनाएँ :
| योजना | शुरुआत | प्रमुख विशेषताएँ / उद्देश्य | विज़न / प्रभाव |
| PM MITRA (पीएम मित्र) | 2021 | 7 मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल पार्क; कटाई, बुनाई, प्रसंस्करण एक ही स्थान पर | 5F विज़न: Farm → Fibre → Factory → Fashion → Foreign |
| PLI योजना (वस्त्र) | 2021 | MMF और Technical Textiles के लिए ₹10,683 करोड़ प्रोत्साहन | वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और बड़े निवेश आकर्षित करना |
| राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) | 2020 | मेडि-टेक्स, एग्रो-टेक्स, जियो-टेक्स में R&D और निर्यात | भारत को तकनीकी वस्त्रों में वैश्विक लीडर बनाना |
| समर्थ (SAMARTH) | 2017 | वस्त्र क्षेत्र में कौशल विकास; 10 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित करना | युवाओं को रोजगार योग्य बनाना |
| ATUFS (संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष) | 2016 | मशीनरी पर पूंजी निवेश सब्सिडी; उद्योग का आधुनिकीकरण | तकनीक उन्नत करना और उत्पादन गुणवत्ता सुधारना |
| सिल्क समग्र-2 (Silk Samagra-2) | 2021-22 | रेशम उत्पादन की गुणवत्ता और बीज उत्पादन प्रणाली मजबूत करना | आयातित रेशम पर निर्भरता कम करना |
| राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (NHDP) | 2015-16 | शिल्पकारों को डिजाइन, विपणन और बुनियादी ढांचा सहायता | पारंपरिक कलाओं का संरक्षण और आय वृद्धि |
| ग्रामोद्योग और हथकरघा संवर्धन | सतत | बुनकरों को रियायती धागा और उन्नत लूम उपलब्ध करानाग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण |









