01 April, 2026
INS Aridaman
Mon 06 Apr, 2026
संदर्भ :
- भारत ने अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी 'INS Aridaman' को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में शामिल किया।
मुख्य बिन्दु :
- अरिहंत श्रेणी की यह पनडुब्बी भारत की 'सेकंड स्ट्राइक' (पलटवार) क्षमता को मजबूत करती है और समुद्री परमाणु प्रतिरोध (Sea-based deterrence) को बढ़ाती है।
- प्रकार: अरिहंत श्रेणी की तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN)
- निर्माण: यह स्वदेशी परियोजना है, जिसे विशाखापत्तनम में शिप बिल्डिंग सेंटर (SBC) में बनाया गया है।
- क्षमता: यह लंबी दूरी की मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है, जो भारत की 'पहले इस्तेमाल न करने' (No-First-Use) की नीति को 'सेकंड स्ट्राइक' के साथ सुदृढ़ करती है।
- परमाणु त्रिशूल (Nuclear Triad): INS अरिदमन के शामिल होने से भारत की जल, थल और नभ से परमाणु हमला करने की क्षमता (Nuclear Triad) अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद हो गई है।
- महत्व: यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करता है, क्योंकि भारत अब चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन, यूके) के साथ परमाणु-संचालित पनडुब्बी क्षमता में शामिल है।
- मारक क्षमता: इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो अपने पूर्ववर्तियों (अरिहंत और अरिघात) की तुलना में दोगुनी हैं। यह 3,500 किमी रेंज वाली K-4 और 750 किमी रेंज वाली K-15 परमाणु सक्षम मिसाइलें ले जाने में सक्षम है।
- तकनीकी विनिर्देश: लगभग 7,000 टन वजन वाली यह पनडुब्बी उन्नत 83 मेगावाट के कॉम्पैक्ट लाइट वाटर रिएक्टर द्वारा संचालित है और इसकी समुद्री गति 24 समुद्री मील (knots) तक है।
- प्रणोदन: यह 83 MW के स्वदेशी प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर (BARC) द्वारा संचालित है, जो इसे समुद्र की गहराई में असीमित समय तक रहने की शक्ति देता है।
- सुरक्षा व तकनीकी: इसमें आधुनिक 'एनेकोइक टाइल्स' और उन्नत 'सोनार सिस्टम' का उपयोग किया गया है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बच सकती है।
- रणनीतिक महत्व: इसके शामिल होने से भारत के पास लगातार समुद्र में 3 परिचालन SSBN मौजूद रहेंगे, जो समुद्र में भारत की निगरानी क्षमता को बढ़ाता है।
भारत की पनडुब्बी शक्ति (Submarine Fleet) :
- भारत की पनडुब्बी शक्ति को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है: परमाणु-संचालित (Nuclear) और पारंपरिक (Diesel-Electric)
परमाणु-संचालित पनडुब्बियां (Nuclear-powered) : ये दो प्रकार की होती हैं:
- SSBN (बैलिस्टिक मिसाइल ले जाने वाली) और SSN (हमलावर पनडुब्बियां)
अरिहंत श्रेणी (SSBN):
- INS अरिहंत (S2): भारत की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी (2016 में शामिल)
- INS अरिघात (S3): दूसरी पनडुब्बी, जो अगस्त 2024 में शामिल हुई
- INS अरिधमन (S4): हाल ही में शामिल तीसरी और अधिक शक्तिशाली पनडुब्बी
पारंपरिक पनडुब्बियां (Diesel-Electric / SSK) :
- कलवरी श्रेणी (Scorpene Class - Project 75): ये फ्रांस के सहयोग से मझगांव डॉक (MDL) में बनी हैं।
- INS कलवरी, INS खांडेरी, INS करंज, INS वेला, INS वागीर, और INS वाग्शीर। (सभी 6 शामिल हो चुकी हैं)।
- सिंधुघोष श्रेणी (Kilo Class): ये रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) से ली गई थीं।
- प्रमुख नाम: INS सिंधुघोष, INS सिंधुराज, INS सिंधुरत्न, INS सिंधुकेसरी आदि। (कुछ सेवानिवृत्त हो चुकी हैं)।
- शिशुमार श्रेणी (Type 209): ये जर्मनी के सहयोग से बनी थीं।
- नाम: INS शिशुमार, INS शल्की, INS शकुश और INS शंकुल
भविष्य की रणनीतिक रूपरेखा:
- भारत वर्तमान में चौथी SSBN (कोडनेम एस-4, जिसके 2027 में सेवा में आने की संभावना है) का निर्माण कर रहा है और परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बी (SSN) कार्यक्रम के साथ-साथ AIP (वायु-स्वतंत्र प्रणोदन) प्रौद्योगिकी से लैस उन्नत पारंपरिक पनडुब्बियों के लिए परियोजना-75आई पर काम कर रहा है।
INS तारागिरी (Taragiri) :
- इसी अवसर पर भारतीय नौसेना ने चौथे नीलगिरी-क्लास स्टील्थ फ्रिगेट, INS तारागिरी को भी सेवा में शामिल किया
- प्रोजेक्ट 17A: यह 'नीलगिरी श्रेणी' के तहत बना चौथा स्टील्थ फ्रिगेट है। इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 7 युद्धपोत बनाए जा रहे हैं (4 मझगांव डॉक और 3 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स द्वारा)।
- स्टील्थ क्षमता: इसमें उन्नत 'रडार एब्जॉर्बेंट कोटिंग' और कम 'मैग्नेटिक सिग्नेचर' तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसे दुश्मन के रडार द्वारा पकड़ना मुश्किल होता है।
- हथियार प्रणाली: यह बराक-8 (मिसाइल डिफेंस), ब्रह्मोस (क्रूज मिसाइल) और उन्नत टॉरपीडो लॉन्चरों से लैस है।
- स्वदेशी योगदान: इसमें लगभग 75% सामग्री स्वदेशी है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को मजबूती देती है।
प्रोजेक्ट 17A के अन्य जहाज:
- INS नीलगिरी (पहला जहाज, MDL द्वारा निर्मित)
- INS हिमगिरी (GRSE द्वारा निर्मित)
- INS उदयगिरी (MDL द्वारा निर्मित)
- INS दूनागिरी
- INS विंध्यगिरी
- INS महेंद्रगिरी









