15 April, 2026
वैश्विक शिक्षा निगरानी (GEM) रिपोर्ट 2026
Tue 31 Mar, 2026
संदर्भ :
- यूनेस्को ने 'ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट 2026: एक्सेस एंड इक्विटी' (GEM Report 2026) जारी की है, जो 'काउंटडाउन टू 2030' श्रृंखला का पहला भाग है।
रिर्पोट के अनुसार :
- मूल विषय: "एक्सेस एंड इक्विटी - काउंटडाउन टू 2030" (Access and Equity: Countdown to 2030)
- असमानता और पहुँच: केवल 2/3 छात्र ही माध्यमिक शिक्षा पूरी कर पाते हैं। ग्रामीण, गरीब और संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच सबसे कम है
वैश्विक शिक्षा नामांकन एवं प्रगति (संशोधित प्रस्तुति):
- वर्ष 2024 में वैश्विक नामांकन लगभग 1.4 अरब रहा, जो वर्ष 2000 की तुलना में 327 मिलियन (30%) अधिक है।
- पूर्व-प्राथमिक स्तर पर नामांकन में वर्ष 2000 से 45% की वृद्धि दर्ज की गई।
- उच्चतर शिक्षा (Higher Education) में नामांकन 161% बढ़ा है।
- नए प्रवेश की दर इतनी है कि लगभग हर मिनट 25 बच्चे स्कूल में दाखिला ले रहे हैं।
शिक्षा पूर्णता दर (Completion Rates):
- प्राथमिक शिक्षा: 77% → 88%
- माध्यमिक शिक्षा: 60% → 78%
- उच्च माध्यमिक शिक्षा: 37% → 61%
- अनुमान है कि 95% पूर्णता दर वर्ष 2105 तक प्राप्त होगी, जो कि SDG-4 (2030 लक्ष्य) से लगभग 75 वर्ष पीछे है।
वैश्विक शिक्षा पर विश्लेषण (संशोधित प्रस्तुति):
- वैश्विक स्तर पर 273 मिलियन बच्चे स्कूल से बाहर हैं, जो केवल शैक्षिक संकट ही नहीं बल्कि नीतिगत विफलता को भी दर्शाता है, जबकि 2000 से नामांकन में 30% वृद्धि हुई है।
- वर्तमान गति को देखते हुए 95% शिक्षा पूर्णता लक्ष्य 2105 तक ही संभव है, जिससे SDG-4 (2030) लक्ष्य लगभग 75 वर्ष पीछे खिसक जाता है। (यह कई पीढ़ियों की असफलता का संकेत है।)
- उच्चतर शिक्षा में 161% की तेज वृद्धि दर्ज की गई है, लेकिन यह असमानता को छुपाती है, क्योंकि इसका लाभ मुख्यतः कम वंचित वर्गों को मिलता है।
- संघर्ष और अस्थिरता एक बड़ी बाधा है : विशेषकर पश्चिम एशिया में अतिरिक्त 13 मिलियन वंचित बच्चे, जो दर्शाता है कि भू-राजनीतिक संकट शिक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं।
- नामांकन बनाम पूर्णता का अंतर गंभीर है :1.4 अरब नामांकन के बावजूद केवल लगभग दो-तिहाई छात्र ही माध्यमिक शिक्षा पूरी कर पाते हैं।
- भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है : बड़ी स्कूली आयु आबादी के कारण भारत के आंकड़े वैश्विक स्थिति को प्रभावित करते हैं; इसके लिए PM पोषण, RTE अधिनियम 2009 और निपुण भारत जैसी योजनाएं लागू की गई हैं।
- रिपोर्ट का मुख्य फोकस “पहुंच और समानता” है : अब लक्ष्य केवल दाखिला नहीं, बल्कि लड़कियों, अल्पसंख्यकों और संघर्ष प्रभावित वर्गों के लिए समान रूप से शिक्षा पूर्णता सुनिश्चित करना है।
- पूर्व-प्राथमिक शिक्षा में 45% वृद्धि सकारात्मक संकेत है, जो यह दर्शाता है कि प्रारंभिक शिक्षा में निवेश सबसे अधिक प्रभावी माना जा रहा है।
सतत विकास लक्ष्य 4 (SDG-4)
- यह 'गुणवत्तापूर्ण शिक्षा' (Quality Education) से संबंधित है
- संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेंडा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- लक्ष्य: "समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और सभी के लिए आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना"।
- मुख्य दर्शन: शिक्षा को एक मौलिक मानवाधिकार और सतत विकास के एक प्रमुख चालक के रूप में देखना।
- प्रतीक: लाल पृष्ठभूमि पर खुली किताब और पेंसिल।
SDG-4 के अंतर्गत 2030 तक के प्रमुख लक्ष्य :
- प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा: सभी लड़कियों और लड़कों के लिए निःशुल्क, समान और गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पूरी करना।
- प्रारंभिक बचपन विकास: गुणवत्तापूर्ण प्री-प्राइमरी शिक्षा तक पहुँच।
- तकनीकी, व्यावसायिक और उच्च शिक्षा: सभी के लिए समान पहुँच, जिसमें विश्वविद्यालय भी शामिल हैं।
- कौशल विकास: रोजगार और उद्यमिता के लिए आवश्यक कौशल (तकनीकी और व्यावसायिक) में वृद्धि।
- लैंगिक समानता और समावेशन: शिक्षा में लैंगिक असमानता को समाप्त करना और दिव्यांगों, स्वदेशी लोगों सहित संवेदनशील लोगों के लिए समान पहुँच।
- साक्षरता: साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (Numeracy) सुनिश्चित करना।
- शिक्षक प्रशिक्षण: विकासशील देशों में योग्य शिक्षकों की आपूर्ति बढ़ाना।
भारत में SDG-4 का कार्यान्वयन (India & SDG-4) :
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: NEP 2020 सीधे तौर पर SDG-4 के साथ संरेखित (Align) है, जो शिक्षा के पुनर्गठन और पुनरुद्धार पर केंद्रित है।
- नीति आयोग (NITI Aayog): नीति आयोग SDG इंडिया इंडेक्स के माध्यम से राज्यों की प्रगति की निगरानी करता है।
प्रमुख उपलब्धियाँ (2023-24):
- प्रारंभिक शिक्षा के लिये समायोजित शुद्ध नामांकन दर (ANER) 96.5% है।
- 88.65% स्कूलों में बिजली और पेयजल की सुविधा है।
- उच्च शिक्षा (18-23 वर्ष) में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता की ओर प्रगति।
- संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क (SDSN) द्वारा जारी 'सतत विकास रिपोर्ट (SDR) 2025' के अनुसार, भारत 167 देशों में से 99वें स्थान पर है, और इसका स्कोर 67 रहा है। यह पहली बार है जब भारत शीर्ष 100 देशों में शामिल हुआ है, जो 2024 (109वें स्थान) की तुलना में एक उल्लेखनीय सुधार है।









