15 April, 2026
उत्तर प्रदेश का तीसरा ‘फ्लोटिंग सोलर प्लांट’
Thu 26 Mar, 2026
संदर्भ :
- उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने गोरखपुर को 'सोलर सिटी' के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से चिलुआ ताल पर 20 MW के फ्लोटिंग सोलर प्लांट को मंज़ूरी दी।
मुख्य बिन्दु :
- स्थान: चिलुआताल, गोरखपुर (खाद कारखाना के पास)
- क्षमता: 20 मेगावाट (MW)
- उत्पादन का लक्ष्य : लगभग 33.29 से 38.54 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा, प्रति वर्ष
- निवेश: लगभग ₹140 करोड़
- कार्यान्वयन एजेंसी: कोल इंडिया लिमिटेड
- क्षेत्रफल: लगभग 80 एकड़ में विस्तारित
- उद्देश्य: नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के मानकों के अनुसार, सोलर सिटी के रूप में विकसित शहरों में 5 वर्षों के भीतर पारंपरिक ऊर्जा की मांग में कम से कम 10% की कमी लाना अनिवार्य है। गोरखपुर के लिए यह लक्ष्य लगभग 121.8 मिलियन यूनिट निर्धारित किया गया है।
- परियोजना के लिए पर्यटन विभाग की 11.4181 हेक्टेयर (28.20 एकड़) भूमि कोल इंडिया लिमिटेड को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी
- चिन्हित भूमि ताल श्रेणी की है और धारा-77(1) के अंतर्गत सुरक्षित श्रेणी में आती है।
उत्तर प्रदेश में फ्लोटिंग सोलर प्लांट की स्थिति :
- गोरखपुर का यह प्लांट प्रदेश का तीसरा प्रमुख फ्लोटिंग सोलर प्लांट होगा।
- औरैया: 20 MW क्षमता का प्लांट (NTPC द्वारा स्थापित)।
- खुर्जा (बुलंदशहर): 11 MW क्षमता का प्लांट (THDC द्वारा स्थापित)
- उत्तर प्रदेश ने बीते 9 वर्षों में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को देश के अग्रणी हरित ऊर्जा राज्यों में स्थापित किया है।
- उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2017 और 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में सौर क्षमता बढ़कर 5000 मेगावाट से अधिक हो गई है।
- प्रभावी नीतियों, बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स और जनभागीदारी के चलते 4 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं
- प्रदेश सरकार ने सौर ऊर्जा नीति-2022 के तहत 22,000 मेगावाट सौर क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
- टोरेंट पावर द्वारा गोरखपुर में 0.5 मेगावाट का ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है, जिसकी उत्पादन क्षमता लगभग 9 किलोग्राम प्रति घंटा है।
- वहीं जीरो फुटप्रिंट इंडस्ट्रीज प्रा लि द्वारा रामपुर में 22.5 किलोग्राम प्रति घंटा क्षमता का ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया जा रहा है।
फ्लोटिंग सोलर प्लांट (Floating Solar Plant) :
- पानी के निकायों (जलाशयों, झीलों) पर तैरते हुए सौर पैनल हैं, जो भूमि की बचत करते हैं और जल वाष्पीकरण कम करते हैं।
- भारत में सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर (600 MW) में नर्मदा नदी पर स्थित है।
- यह परियोजनाएं 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा के लक्ष्य को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
महत्व :
- भूमि की बचत: यह कृषि या विकास के लिए भूमि का उपयोग किए बिना खाली जलाशयों का उपयोग करता है।
- उच्च दक्षता: पानी के कूलिंग इफेक्ट (Cooling Effect) के कारण पैनल की दक्षता 5-10% बढ़ जाती है।
- जल संरक्षण: यह पानी के वाष्पीकरण को कम करता है।
- पारिस्थितिक लाभ: यह पानी में शैवाल (Algae) की वृद्धि को रोकता है।
भारत में प्रमुख फ्लोटिंग सोलर प्लांट :
- ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर पार्क (मध्य प्रदेश): यह भारत और दुनिया की सबसे बड़ी तैरती सौर ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है। इसकी कुल क्षमता 600 मेगावाट (MW) है और यह खंडवा जिले में नर्मदा नदी पर ओंकारेश्वर बांध के बैकवाटर पर स्थित है.
- रामागुंडम फ्लोटिंग सोलर प्लांट (तेलंगाना): एनटीपीसी (NTPC) द्वारा विकसित इस प्लांट की क्षमता 100 मेगावाट है। जुलाई 2022 में इसके पूरी तरह चालू होने के समय, यह भारत की सबसे बड़ी चालू परियोजना थी.
- कायमकुलम फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट (केरल): केरल के अलप्पुझा जिले में स्थित इस प्लांट की क्षमता 92 मेगावाट है, जिसे एनटीपीसी द्वारा स्थापित किया गया है
- सिम्हाद्रि फ्लोटिंग सोलर पीवी प्रोजेक्ट (आंध्र प्रदेश): विशाखापत्तनम के सिम्हाद्रि थर्मल स्टेशन के जलाशय में स्थित इसकी क्षमता 25 मेगावाट है
- रिहंद बांध फ्लोटिंग सोलर प्लांट (उत्तर प्रदेश): सोनभद्र जिले में स्थित इस परियोजना की प्रस्तावित/स्थापित क्षमता 150 मेगावाट है
- सगरदीघी फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट (पश्चिम बंगाल): मुर्शिदाबाद में स्थित इस संयंत्र की क्षमता लगभग 5 मेगावाट है









