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UDAN योजना को 10 वर्षों के लिए मंजूरी

Wed 25 Mar, 2026

संदर्भ :

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'संशोधित उड़ान' योजना को 10 वर्षों (2026-27 से 2035-36) के लिए मंजूरी दी।

संशोधित उड़ान योजना के मुख्‍य बिन्‍दु :

  • अवधि: वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक, 10 वर्ष
  • कुल परिव्यय: ₹28,840 करोड़

योजना के प्रमुख घटक :

  • हवाई अड्डों का विकास (पूंजीगत व्यय) : मौजूदा अनुपलब्ध हवाई पट्टियों से 100 हवाई अड्डों को विकसित करना, जिसके लिए अगले आठ वर्षों में कुल 12,159 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा।
  • हवाई अड्डों का संचालन एवं रखरखाव (O&M) : क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना (RCS) के तहत उच्च संचालन व रखरखाव लागत और सीमित राजस्व को देखते हुए वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है। इसके अंतर्गत 3 वर्षों तक प्रति हवाई अड्डा ₹3.06 करोड़ तथा प्रति हेलीपोर्ट/वाटर एयरोड्रॉम ₹0.90 करोड़ प्रतिवर्ष सहायता दी जाएगी। इस योजना पर लगभग 441 हवाई अड्डों के लिए कुल ₹2,577 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
  • आधुनिक हेलीपैडों का विकास : पहाड़ी, दूरस्थ, द्वीपीय और विकासशील क्षेत्रों में कनेक्टिविटी संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए, योजना के तहत 15 करोड़ रुपये प्रति हेलीपैड की लागत से 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने का प्रस्ताव है। इसकी कुल आवश्यकता अगले आठ वर्षों में (मुद्रास्फीति-समायोजित) 3,661 करोड़ रुपये होगी। यह योजना प्राथमिकता वाले और विकासशील जिलों पर केंद्रित है ताकि अंतिम-मील कनेक्टिविटी और आपातकालीन कार्रवाई में सुधार किया जा सके।
  • व्यवहार्यता में कमी के समाधान हेतु निधि (VGF) : क्षेत्रीय मार्गों पर हवाई परिचालन को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाने के लिए एयरलाइन संचालकों को 10 वर्षों में कुल ₹10,043 करोड़ की VGF (वायबिलिटी गैप फंडिंग) सहायता दी जाएगी।
  • आत्मनिर्भर भारत विमान अधिग्रहण : कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए पवन हंस हेतु दो HAL ध्रुव हेलीकॉप्टर और एलायंस एयर हेतु दो HAL डोर्नियर विमान खरीदे जाएंगे

उड़ान योजना (उड़े देश का आम नागरिक) :

  • शुरूआत : यह योजना 21 अक्टूबर 2016 को नागरिक उड्डयन मंत्रालय के तहत शुरू की गई थी
  • पहली उड़ान : 27 अप्रैल 2017 को शिमला और दिल्ली के बीच संचालित हुई थी
  • योजना ने 27 अप्रैल 2025 को अपने 8 वर्ष पूरा किया
  • योजना का उद्देश्‍य : टियर-2 और टियर-3 शहरों से कनेक्टिविटी को मजबूत करना
  • पिछले आठ वर्षों में उड़ान योजना ने देश में क्षेत्रीय हवाई अड्डों की संख्या बढ़ाने और हवाई संपर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  • नोडल मंत्रालय : नागर विमानन मंत्रालय
  • कार्यान्वयन निकाय : भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण

योजना के घटक :

  • व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) : किफायती किराया सुनिश्चित करने के लिए एयरलाइनों को वित्तीय सहायता।
  • वहनीयता सुनिश्चित करने के लिए हवाई किराये की सीमा निर्धारित की गई।
  • केंद्र, राज्य, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और निजी हवाईअड्डा संचालकों के बीच सहयोगात्मक शासन।

उड़ान 1.0 (2017) :

  • कवरेज: 5 एयरलाइन संचालकों को 70 हवाई अड्डों के लिए 128 मार्ग आवंटित किये गये इनमें 36 नये हवाई अड्डे भी शामिल हैं।

उड़ान 2.0 (2018) :

  • इस योजना का विस्तार करके इसमें 73 कम जुड़ाव वाले और ऐसे क्षेत्र जिनसे जुड़ाव नहीं था उन हवाई अड्डों को शामिल किया गया
  • पहली बार हेलीपैड को भी उड़ान नेटवर्क से जोड़ा गया

उड़ान 3.0 (2019) :

  • पर्यटन मंत्रालय के समन्वय से पर्यटन मार्ग शुरू किए गए
  • जल हवाई अड्डों को जोड़ने के लिए समुद्री विमान परिचालन को शामिल किया गया
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र के कई मार्गों को इस योजना से जोड़ा गया

उड़ान 4.0 (2020) :

  • पहाड़ी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और द्वीप क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया
  • हेलीकॉप्टर और समुद्री विमान सेवा पर अधिक जोर दिया गया
  • उड़ान 5.0 और 5.5 (2024-25):
  • 50 से अधिक जल निकायों से सीप्लेन सेवाओं के लिए निविदाएँ
  • हेलीपैड, छोटे रनवे, दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवा विस्तार

उपलब्धियां :

  • 28 फरवरी, 2026 तक 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों और वाटर एयरोड्रॉम पर 663 मार्गों को चालू कर दिया गया है।
  • अब तक 341 लाख से अधिक उड़ानें संचालित की जा चुकी हैं, जिनमें 162.47 लाख यात्रियों ने यात्रा की है।
  • दूरस्थ, पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों में संपर्क स्थापित हो गया है, जिससे पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और आपातकालीन सेवाओं को बढ़ावा मिला है।
  • इस योजना ने क्षेत्रीय एयरलाइनों और विविध फ्लीट के संचालन में वृद्धि पर जोर दिया है, जिससे संशोधित उड़ान योजना के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है।

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