15 April, 2026
इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट, 2026
Tue 24 Mar, 2026
संदर्भ :
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) के 14वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान "इंडिया बायोइकोनॉमी रिपोर्ट, 2026" (IBER 2026) जारी किया।
रिपोर्ट के अनुसार :
- बायोइकोनॉमी में शानदार वृद्धि: भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy) 2025 में बढ़कर 195.3 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 195.3 billion) तक पहुंच गई है, जो 2014 में केवल 10 अरब अमेरिकी डॉलर थी।
- GDP में योगदान: यह क्षेत्र अब भारत की राष्ट्रीय GDP में लगभग 4.8 प्रतिशत का योगदान दे रहा है, इसकी वृद्धि दर लगभग 18 प्रतिशत है।
- स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र: देश में जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स की संख्या 11,800 से अधिक हो गई है।
- क्षेत्रीय अग्रणी: जैव -औद्योगिक क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक था, जिसका मूल्य 90.2 बिलियन डॉलर था ।
- बायोफार्मा की मजबूती: इस सेगमेंट का मूल्य 64.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है , और वैश्विक पेटेंट की समय सीमा समाप्त होने के साथ बायोसिमिलर और पेप्टाइड विनिर्माण में महत्वपूर्ण वृद्धि की उम्मीद है।
- जैवसेवाएं और कृषि: जैवसेवाओं का योगदानकुल अर्थव्यवस्था में 26 अरब डॉलर था , जबकि जैवकृषि का योगदान 14.6 अरब डॉलर था।
- GCC का विस्तार: भारत में अब 150 से अधिक स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC ) स्थित हैं , जिनमें 300,000 से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं।
- 2030 का लक्ष्य: भारत 2030 तक 300 अरब डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
जैव-अर्थव्यवस्था :
- एक ऐसा आर्थिक मॉडल है जो टिकाऊ उत्पादों, सेवाओं और ऊर्जा के उत्पादन के लिए जैविक संसाधनों (जैसे पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव और अपशिष्ट) के ज्ञान-आधारित उपयोग पर निर्भर करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देना है।
जैव-अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र :
- बायो-फार्मा: जीवनरक्षक दवाएं, टीके और नैदानिक परीक्षण उपकरण
- बायो-एग्रीकल्चर: उच्च उपज वाली फसलें, जैविक खाद और जैव-कीटनाशक
- बायो-इंडस्ट्री: एंजाइम, बायोप्लास्टिक और अन्य जैव-आधारित औद्योगिक सामग्री
- बायो-एनर्जी: एथेनॉल और बायोडीजल जैसे हरित ईंधन
महत्व और लाभ :
- सतत विकास: यह कार्बन उत्सर्जन कम करने और 'नेट जीरो' (Net Zero) लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है
- खाद्य सुरक्षा: कृषि उत्पादकता बढ़ाकर बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा करता है
- रोजगार: यह विशेष रूप से टीयर-II और टीयर-III शहरों में नए रोजगार के अवसर पैदा करता है।
प्रमुख सरकारी पहलें :
- BioE3 नीति: यह विनिर्माण, अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी पर केंद्रित है।
- BIRAC: यह संस्था बायोटेक स्टार्टअप्स को फंडिंग और बुनियादी ढांचा प्रदान करती है।
- राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क: नवाचार को गति देने के लिए देश के पहले नेटवर्क की शुरुआत की गई है
जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) :
- जैव-प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) एक गैर-लाभकारी, सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (PSE) है, जिसकी स्थापना भारत सरकार के जैव-प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा की गई है।
- इसकी स्थापना 20 मार्च 2012 को की गई थी।
प्रमुख भूमिका (Role) :
- सेतु (Interface): यह 'अकादमिक जगत' और 'उद्योग' के बीच की दूरी को पाटने वाली एजेंसी है।
- स्टार्टअप पोषण: यह स्टार्टअप्स को केवल फंडिंग ही नहीं, बल्कि 'इन्क्यूबेशन' (लैब और उपकरण) और 'मेंटरशिप' भी प्रदान करता है।
- बौद्धिक संपदा (IP): यह स्टार्टअप्स को उनके नवाचारों के पेटेंट और बौद्धिक संपदा प्रबंधन में सहायता करता है।









