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RELIEF योजना का शुभारंभ

Sun 22 Mar, 2026

संदर्भ :

  • भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण प्रभावित भारतीय निर्यातकों को सहायता प्रदान करने के लिए 497 करोड़ रुपये की RELIEF (Resilience and Logistics Intervention for Export Facilitation) योजना का शुभारंभ किया।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • उद्देश्य: खाड़ी क्षेत्र और पश्चिम एशिया समुद्री गलियारे में व्यवधानों के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान को कम करना और निर्यात निरंतरता बनाए रखना
  • कार्यान्वयन एजेंसी: एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ECGC)
  • लक्षित देश: यह योजना यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन, इराक, ईरान, इजरायल और यमन सहित लगभग 17-18 भौगोलिक क्षेत्रों के लिए जाने वाले शिपमेंट को कवर करती है

प्रमुख घटक :

  • सबसे पहले, जिन निर्यातकों ने पात्र खेपों के लिए पहले ही ECGC क्रेडिट बीमा कवर प्राप्त कर लिया है, उन्हें पात्र अवधि (14 फरवरी, 2026 से 15 मार्च, 2026 तक) के दौरान मौजूदा ECGC कवर के अतिरिक्त 100% तक जोखिम कवरेज का लाभ मिलेगा, जिससे अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बिना बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
  • दूसरा, आगामी तीन महीनों (16 मार्च, 2026 से 15 जून, 2026 तक) के दौरान आगामी खेप की योजना बना रहे निर्यातकों को मौजूदा ECGC कवर के अतिरिक्त 95% तक जोखिम कवरेज के लिए सरकारी सहायता के साथ ECGC कवर प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जो निर्यातकों के आत्मविश्वास को बनाए रखने और रसद संबंधी अनिश्चितताओं के बावजूद निरंतर शिपमेंट प्रवाह को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा।
  • तीसरा, यह मानते हुए कि कुछ MSME निर्यातकों ने क्रेडिट बीमा (14 फरवरी, 2026 से 15 मार्च, 2026 तक) का लाभ नहीं उठाया होगा, लेकिन उन्हें माल ढुलाई और बीमा अधिभार का भारी बोझ उठाना पड़ रहा है, राहत योजना में पात्र गैर-ECGC-बीमित MSME निर्यातकों के लिए आंशिक प्रतिपूर्ति (50% तक) की व्यवस्था शामिल है। यह सहायता निर्धारित शर्तों, दस्तावेजी सत्यापन और अधिसूचित सीमा (प्रति निर्यातक 50 लाख रुपये तक) के अधीन दी जाएगी , और इसका उद्देश्य संघर्ष से संबंधित रसद लागत में वृद्धि के विरुद्ध समय पर राहत प्रदान करना है।

निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) के अंतर्गत राहत की मुख्य विशेषताएं :

  • सरकार ने निर्यात संवर्धन मिशन के अंतर्गत निर्यात सुविधा के लिए राहत - लचीलापन और लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप को मंजूरी दे दी है।
  • यह हस्तक्षेप खाड़ी और पश्चिम एशिया के समुद्री गलियारे में रसद संबंधी व्यवधानों और लागत वृद्धि के जवाब में किया गया है।
  • ईसीजीसी जोखिम कवरेज और प्रतिपूर्ति तंत्र के लिए नोडल कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
  • राहत योजना में पात्र पूर्व शिपमेंट और संभावित निर्यात दोनों शामिल हैं, जिसमें MSME सहायता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
  • इस परियोजना को ईपीएम के तहत वित्त पोषित किया जाएगा और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के आधार पर समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाएगी।

एक्सपोर्ट क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (ECGC) :

  • स्थापना : 1957, 'क्रेडिट रिस्क इंश्योरेंस' प्रदान करके देश से निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य से
  • मुख्यालय: मुंबई
  • केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की पूर्ण स्वामित्व वाली संस्था है
  • पहले ‘भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम लिमिटेड’ कहा जाता था
  • मुख्य कार्य:
  • निर्यातकों को ऋण बीमा (Credit Insurance) प्रदान करना ताकि वे बिना डरे नए बाज़ारों में व्यापार कर सकें
  • बैंकों को गारंटी देना ताकि निर्यातकों को निर्यात-पूर्व (Pre-shipment) और निर्यात-पश्चात (Post-shipment) ऋण आसानी से मिल सके

निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission - EPM) :

  • निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission - EPM) भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसे बजट 2025-26 में घोषित किया गया और नवंबर 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई।
  • इसका मुख्य उद्देश्य भारत के बिखरे हुए निर्यात सहायता कार्यक्रमों को एक एकीकृत और डिजिटल ढांचे के तहत लाना है
  • कार्यान्वयन एजेंसी: विदेश व्यापार महानिदेशालय
  • वित्तीय व्यय: ₹25,060 करोड़
  • मिशन अवधि: छह वर्ष (वित्त वर्ष 2025–26 से 2030–31 तक)

दो उप-योजनाएं:

  • निर्यात प्रोत्साहन (वित्तीय सहायता): नए बाजारों में व्यापार विविधीकरण के लिए सुलभ और किफायती व्यापार वित्त-पोषण प्राप्ति में सुधार करना
  • निर्यात दिशा (गैर-वित्तीय सहायता): निर्यातकों को बाजार की मांग के लिए तत्परता और व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना

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