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20वां विद्युत शक्ति सर्वेक्षण (EPS) रिपोर्ट

Sat 21 Mar, 2026

संदर्भ :

  • केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने 20वां विद्युत शक्ति सर्वेक्षण (EPS) रिपोर्ट जारी की है, जिसके तहत 'राष्ट्रीय उत्पादन पर्याप्तता योजना (2026-27 से 2035-36)' पेश की गई है।

रिर्पोट के अनुसार :

  • बढ़ती मांग और नवीकरणीय ऊर्जा (RE) के तेजी से विस्तार के कारण अगले दशक में भारत की विद्युत प्रणाली में एक बड़ा परिवर्तन होने की संभावना है।
  • बिजली मांग में वृद्धि (Power Demand Growth) : वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2035-36 के बीच भारत की चरम (Peak) बिजली मांग में 5.58% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इसी अवधि में कुल बिजली ऊर्जा की आवश्यकता भी तेज़ी से बढ़ते हुए 6.41% CAGR की दर से बढ़ेगी।
  • 2035-36 तक अनुमानित मांग :अनुमान के अनुसार, वर्ष 2035-36 तक भारत की चरम बिजली मांग 459 गीगावाट (GW) तक पहुँच सकती है, जबकि कुल बिजली की आवश्यकता बढ़कर 3,365 अरब यूनिट (BU) होने की उम्मीद है।

क्षमता वृद्धि अनुमान :

  • 31 जनवरी 2026 तक स्थापित विद्युत क्षमता 520 GW से बढ़कर 2035-36 तक 1,121 GW हो जाएगी। यह वृद्धि मांग पूर्ति के लिए आवश्यक है। उत्पादन नियोजन अध्ययन के अनुसार, क्षमता मिश्रण में सौर ऊर्जा प्रमुख होगी।
  • 2035-36 क्षमता मिश्रण
स्रोत क्षमता (GW)
कोयला 315
गैस 20
परमाणु ऊर्जा 22
बड़े जलविद्युत 77
सौर ऊर्जा 509
पवन ऊर्जा 155
बायोमास 16
छोटे जलविद्युत 6
कुल 1,121
  • सौर ऊर्जा 509 GW के साथ विद्युत प्रणाली का प्रमुख योगदानकर्ता बनेगी। यह नवीकरणीय ऊर्जा पर भारत के दांव को दर्शाता है।

ऊर्जा मिश्रण में सौर PV का योगदान :

  • भारत के ऊर्जा परिवर्तन में सौर फोटोवोल्टिक (PV) क्षमता प्रमुख होगी, जो 2035-36 तक कुल स्थापित क्षमता का 45% (509 GW) होगी। कोयला 28% (315 GW) के साथ दूसरा बड़ा स्रोत रहेगा। पवन ऊर्जा 14% (155 GW) और बड़े जलविद्युत 7% (77 GW) का योगदान देगी।

गैर-जीवाश्म ईंधन हिस्सेदारी :

  • गैर-जीवाश्म स्रोतों की कुल क्षमता 786 GW (70%) पहुंचेगी, जो स्वच्छ ऊर्जा की ओर निर्णायक बदलाव दर्शाएगा। परमाणु, गैस और बायोमास का संयुक्त योगदान सीमित रहेगा। यह नवीकरणीय ऊर्जा पर भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।

विशेषज्ञ चिंता: विभूति गर्ग :

  • इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस के दक्षिण एशिया निदेशक विभूति गर्ग के अनुसार, क्षमता वृद्धि से ज्यादा महत्वपूर्ण है उत्पादन का प्रभावी उपयोग। वर्तमान में 37 GW+ नवीकरणीय क्षमता अप्रयुक्त है, जो योजना, एकीकरण और ग्रिड कमियों को उजागर करती है। उन्होंने पारेषण अवसंरचना मजबूत करने और मांग केंद्रों से संरेखण पर जोर दिया।

कोयले का दबदबा बना रहेगा :

  • नवीकरणीय क्षमता में तेज वृद्धि के बावजूद, विश्वसनीय आधारभूत आपूर्ति के कारण कोयला बिजली उत्पादन में प्रमुख रहेगा। 2035-36 तक कुल उत्पादन 3,596 BU होगा, जिसमें कोयला 51% (1,819 BU) का योगदान देगा। संक्रमण काल में कुल उत्पादन का आधा से अधिक हिस्सा कोयले से आएगा।

2035-36 बिजली उत्पादन मिश्रण :

स्रोत उत्पादन (BU) हिस्सेदारी (%)
कोयला 1,819 51
सौर PV 984 27
पवन ऊर्जा 320 9
जलविद्युत 256 7
परमाणु ऊर्जा 147 4
गैस 56 2
बायोमास एवं अन्य 14 1% से कम
कुल 3,596 100

मांग वृद्धि पूर्वानुमान :

  • शुद्ध बिजली उत्पादन 2024-25 के 1,725 BU से बढ़कर 2035-36 तक 3,450 BU हो जाएगा, जो लगभग दोगुनी वृद्धि है। यह आर्थिक विस्तार, शहरीकरण, विद्युतीकरण, डेटा सेंटर और हरे हाइड्रोजन से प्रेरित है। कोयला-लिग्नाइट हिस्सेदारी 64% से घटकर 49% रहेगी, जबकि गैर-जीवाश्म 34% से 49% हो जाएगी।

निवेश, विस्तार और भंडारण :

  • केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल ने 19 मार्च को भारत विद्युत शिखर सम्मेलन में कहा कि अगले दो दशकों में विद्युत क्षेत्र में 2.2 ट्रिलियन डॉलर निवेश जरूरी है।

अध्ययन उद्देश्य :

  • अध्ययन 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 2026-27 से 2035-36 के बीच सबसे कम लागत वाले विस्तार मार्ग की पहचान करता है। यह उत्पादन प्रणाली लागत न्यूनतम रखता है, जिसमें निवेश, परिचालन लागत शामिल हैं। साथ ही, सभी तकनीकी मापदंडों का पालन और मांग की विश्वसनीय पूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • अध्ययन के अनुसार, भारत को 2035-36 तक लगभग 174 गीगावाट/888 गीगावाट-घंटे (GWh) ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी, जिसमें 80 गीगावाट/321 गीगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और 94 गीगावाट/567 गीगावाट पंप भंडारण संयंत्र (PSP) शामिल होंगे।

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