16 March, 2026
‘लघु जलविद्युत विकास योजना’ को मंजूरी
Fri 20 Mar, 2026
संदर्भ :
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ‘लघु जलविद्युत विकास योजना’ (Small Hydro Power - SHP) को मंजूरी दी।
मुख्य बिन्दु :
- अवधि: वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31
- लागत: ₹2,584.60 करोड़ का केंद्रीय परिव्यय
- लक्ष्य: 1500 मेगावाट की लघु जलविद्युत (SHP) क्षमता स्थापित करना
- निवेश: इस क्षेत्र में लगभग ₹15,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद है
- उद्देश्य: स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में विकास, रोजगार सृजन और "आत्मनिर्भर भारत" के तहत 100% स्वदेशी उपकरणों का उपयोग
- परियोजना का दायरा: यह 1 मेगावाट से 25 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं का समर्थन करती है। भारत में 25 मेगावाट तक की जलविद्युत परियोजनाओं को 'लघु जलविद्युत' (SHP) श्रेणी में रखा जाता है।
- नोडल मंत्रालय: यह नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के अंतर्गत आता है (बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं विद्युत मंत्रालय के अधीन होती हैं)
- रन-ऑफ-द-रिवर तकनीक: ये परियोजनाएं मुख्य रूप से नदी के प्राकृतिक प्रवाह का उपयोग करती हैं, जिससे बड़े बांधों की आवश्यकता नहीं होती और पारिस्थितिक प्रभाव न्यूनतम रहता है।
- आत्मनिर्भर भारत: योजना के तहत संयंत्र और मशीनरी की 100% घरेलू खरीद अनिवार्य है।
- भविष्य की तैयारी: लगभग 200 भावी परियोजनाओं के लिए 'विस्तृत परियोजना रिपोर्ट' (DPR) तैयार करने हेतु ₹30 करोड़ का अलग से प्रावधान किया गया है।
- आर्थिक प्रभाव: इससे लगभग ₹15,000 करोड़ के निजी निवेश को आकर्षित करने और निर्माण के दौरान 51 लाख 'पर्सन-डेज़' (person-days) रोजगार सृजन की उम्मीद है।
केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) संरचना :
- उत्तर पूर्वी राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे जिलों में : केंद्र सरकार द्वारा प्रति मेगावाट 3.6 करोड़ रुपये या परियोजना लागत का 30 प्रतिशत (जो भी कम हो) इन राज्यों की अधिकतम सीमा प्रति परियोजना 30 करोड़ रुपये होगी
- अन्य राज्यों में : प्रति मेगावाट 2.4 करोड़ रुपये या परियोजना लागत का 20 प्रतिशत (जो भी कम हो) की सहायता प्रदान की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परियोजना 20 करोड़ रुपये होगी।
लघु जलविद्युत परियोजना (SHP) :
- भारत में लघु जलविद्युत परियोजना (Small Hydro Power - SHP) को स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
- भारत में 25 मेगावाट (MW) या उससे कम स्थापित क्षमता वाली जलविद्युत परियोजनाओं को 'लघु जलविद्युत' (SHP) की श्रेणी में रखा जाता है।
- तकनीक: मुख्य रूप से 'रन-ऑफ-द-रिवर' (Run-of-the-River) तकनीक, जिसमें नदी के प्राकृतिक बहाव का उपयोग किया जाता है और बड़े बांध बनाने की आवश्यकता नहीं होती।
लघु जल विद्युत परियोजनाओं के लाभ :
- पर्यावरणीय लाभ : भूमि अधिग्रहण कम, वनों की कटाई कम, विस्थापन से बचाव
- आर्थिक विकास : रोजगार सृजन, परियोजनाओं की लंबी आयु (40–60 वर्ष)
- सामाजिक लाभ : ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली उपलब्धता, स्थानीय आजीविका में सुधार, ऊर्जा सुरक्षा में योगदान









