राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में NeVA के संचालन की स्थिती
 
  • Mobile Menu
HOME BUY MAGAZINEnew course icon
LOG IN SIGN UP

Sign-Up IcanDon't Have an Account?


SIGN UP

 

Login Icon

Have an Account?


LOG IN
 

or
By clicking on Register, you are agreeing to our Terms & Conditions.
 
 
 

or
 
 




राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में NeVA के संचालन की स्थिती

Tue 17 Mar, 2026

संदर्भ :

  • केन्‍द्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में बताया कि, वर्तमान में 28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानमंडलों ने नेवा (NeVA) को अपनाने के लिए इन समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किया है।

मुख्य परिचय और उद्देश्य :

  • NeVA एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसे विधानमंडलों की कार्यप्रणाली में गतिशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए विकसित किया गया है।
  • इसका प्राथमिक लक्ष्य पारंपरिक कागजी कार्यवाही को समाप्त कर पूरी विधायी प्रक्रिया को क्लाउड-आधारित ई-गवर्नेंस मॉडल पर स्थानांतरित करना है।
  • शुभारंभ: इसे वर्ष 2022 में विधायी निकायों के आधुनिकीकरण के उद्देश्य से शुरू किया गया था।
  • नेतृत्व: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय इस परियोजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है।
  • सरकार ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानमंडलों द्वारा नेवा (NeVA) को अपनाने का प्रावधान किया है।

वित्तीय संरचना (Funding Pattern) :

  • यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसमें वित्तीय भार का वितरण श्रेणियों के आधार पर किया गया है
  1. पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्य: इन राज्यों के लिए व्यय का 90% हिस्सा केंद्र सरकार और 10% राज्य सरकार वहन करती है।
  2. केंद्रशासित प्रदेश: विधायी परिषद वाले केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 100% वित्तपोषण केंद्र द्वारा किया जाता है।
  3. अन्य राज्य: शेष राज्यों के लिए 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य के बीच लागत साझा की जाती है।
  4. अनुमानित लागत: लोक निवेश बोर्ड (PIB) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए ₹673.94 करोड़ के बजट को स्वीकृति दी है।

तकनीकी विशेषताएँ और कार्यक्षमता :

  • सर्वव्यापी पहुँच: यह वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप दोनों माध्यमों से उपलब्ध है, जिससे जनप्रतिनिधि किसी भी स्थान से सदन की कार्यवाही और दस्तावेजों से जुड़ सकते हैं।
  • डिजिटल सचिवालय: विधेयकों को पेश करने, प्रश्न पूछने और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए अब भौतिक फाइलों की आवश्यकता नहीं है; सब कुछ इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रबंधित होता है।
  • सार्वजनिक जवाबदेही: इसके माध्यम से जनता भी सदन में होने वाली चर्चाओं, पारित विधेयकों और दैनिक कार्यसूची (List of Business) को देख सकती है, जिससे शासन में पारदर्शिता आती है।
  • ई-लर्निंग और लाइब्रेरी: इसमें ई-बुक्स और डिजिटल अभिलेखों का संग्रह है, जो शोध और संदर्भ के लिए सहायक है।

कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति

  • सहभागिता: अब तक 28 विधानसभाओं ने इसे लागू करने हेतु केंद्र के साथ आधिकारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • सक्रियता: वर्तमान में 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधान-मंडलें नेवा (NeVA) प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपना विधायी कामकाज डिजिटल मोड में संचालित कर रही हैं और अन्य 7 कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
  • अग्रणी राज्य: पंजाब विधानसभा ने सितंबर 2023 में इस प्रणाली को अपनाकर देश की पहली पूर्णतः डिजिटल विधान सभा बनने का गौरव प्राप्त किया।

नवाचार का महत्व:

  1. पर्यावरण अनुकूल: कागज की खपत में भारी कटौती से यह पर्यावरण के अनुकूल 'सस्टेनेबल' गवर्नेंस को बढ़ावा देता है।
  2. प्रशासनिक कुशलता: फाइलों के इधर-उधर जाने में लगने वाले समय की बचत होती है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होती है।
  3. लोकतांत्रिक मजबूती: जब विधायी डेटा आम नागरिक के लिए एक क्लिक पर उपलब्ध होता है, तो लोकतंत्र अधिक समावेशी और मजबूत बनता है।

Latest Courses