20 April, 2026
भारत की सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR-7)
Mon 16 Mar, 2026
संदर्भ :
- भारत ने जैविक विविधता पर कन्वेंशन (Convention on Biological Diversity - CBD) को अपनी सातवीं राष्ट्रीय रिपोर्ट (Seventh National Report या NR-7) प्रस्तुत की, वर्ष 2022 में अपनाए गए ‘कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे’ (KMGBF) के लक्ष्यों की दिशा में भारत की प्रगति का पहला पूर्ण मूल्यांकन है।
मुख्य बिन्दु :
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, यह रिर्पोट एक ठोस, संकेतक-आधारित राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रस्तुत करती है
रिर्पोट के अनुसार :
- रिपोर्ट का आधार : यह रिपोर्ट 23 राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों (NBT) के अनुरूप 142 राष्ट्रीय संकेतकों पर आधारित है।
- विभिन्न संस्थाओं का सहयोग : इस मूल्यांकन में 33 केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्य सरकारों, वैधानिक प्राधिकरणों, अनुसंधान संस्थानों और अन्य हितधारकों से प्राप्त समन्वित सुझावों को शामिल किया गया है।
- भारत का दर्ज वन क्षेत्र : भारत का दर्ज वन क्षेत्र 7,75,377 वर्ग किमी है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 23.59% है। इनमें से वन आवरण 5,20,365 वर्ग किमी (15.83%) है।
- कुल वन एवं वृक्ष आवरण : भारत में कुल वन एवं वृक्ष आवरण 8,27,356.95 वर्ग किमी तक पहुंच गया है, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 25.17% है।
- रामसर आर्द्रभूमियों की संख्या में वृद्धि : अंतरराष्ट्रीय महत्व की अधिसूचित रामसर आर्द्रभूमियों की संख्या 2014 में 26 से बढ़कर 2026 तक 98 हो गई है।
- भारत का संरक्षण नेटवर्क : भारत के संरक्षण नेटवर्क में अब 58 बाघ अभ्यारण्य, 33 हाथी अभ्यारण्य, 18 जीवमंडल अभ्यारण्य, 106 राष्ट्रीय उद्यान और 574 वन्यजीव अभ्यारण्य शामिल हैं।
- प्रमुख वन्यजीवों की आबादी : भारत में 3,682 बाघ (वैश्विक बाघ आबादी का 70% से अधिक) हैं। इसके अलावा 4,014 एक सींग वाले गैंडे, 22,446 जंगली हाथी, 891 एशियाई शेर और लगभग 718 हिम तेंदुए पाए जाते हैं।
- डॉल्फिन परियोजना : डॉल्फिन परियोजना के तहत नदी डॉल्फिन की आबादी के पहले आकलन की रिपोर्ट जारी की गई है, जिसके अनुसार देश में 6,327 नदी डॉल्फिन पाई जाती हैं।
- कृषि जैव विविधता संरक्षण : भारत ने 22 कृषि जैव विविधता हॉटस्पॉट का दस्तावेजीकरण किया है तथा विविधता, विशिष्टता और कृषि विरासत के आधार पर 171 देशी फसलों, 230 देशी पशु नस्लों और 769 जंगली पौधों (CWR) के संरक्षण को प्राथमिकता दी है।
- कानूनी संरक्षण : संरक्षित क्षेत्रों को देश के प्रमुख कानूनों जैसे भारतीय वन अधिनियम, 1927; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; जैव विविधता अधिनियम, 2002; तथा वन पंचायत अधिनियम, 1931 के तहत कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
- जनभागीदारी और पहल : भारत की NR-7 योजना में नागरिकों के योगदान को भी शामिल किया गया है, जिसमें ‘मिशन लाइफ’ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) के अंतर्गत गतिविधियाँ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलों के माध्यम से किए गए योगदान शामिल हैं।
- कानूनी संरक्षण : संरक्षित क्षेत्रों को देश के प्रमुख कानूनों जैसे भारतीय वन अधिनियम, 1927; वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972; पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986; जैव विविधता अधिनियम, 2002; तथा वन पंचायत अधिनियम, 1931 के तहत अपेक्षित कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
- संरक्षण रणनीति : भारत की संरक्षण रणनीति में प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र और कृषि जैव विविधता दोनों के सतत प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए पर्यावास बहाली और प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रमों से लेकर स्थानीय और बाह्य उपायों को एकीकृत किया गया है।
- उन्नत तकनीकों का उपयोग : भारत वन संसाधनों और मुक्त विचरण करने वाली प्रजातियों की निगरानी और आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के लिए रिमोट सेंसिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS), उपग्रह टेलीमेट्री, मानवरहित हवाई वाहन (UAV), कैमरा ट्रैप और डीएनए आधारित उपकरणों जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहा है।
कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचा (KMGBF) :
- दिसंबर 2022 में COP15 (CBD) में अपनाया गया एक ऐतिहासिक समझौता है, जिसका उद्देश्य 2030 तक जैव विविधता की हानि को रोकना और 2050 तक "प्रकृति के साथ सामंजस्य" स्थापित करना है।
- इसे अक्सर प्रकृति के लिए "पेरिस समझौते" के रूप में जाना जाता है, जिसमें 23 लक्ष्य (जैसे 30x30 लक्ष्य) शामिल हैं।
- लक्ष्य (Targets): 2030 तक जैव विविधता की रक्षा के लिए 23 लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
- मुख्य 30x30 लक्ष्य: 2030 तक पृथ्वी के कम से कम 30% भूमि, तटीय और समुद्री क्षेत्रों का संरक्षण (Protected Areas) और प्रबंधन करना।
अन्य प्रमुख लक्ष्य:
- 30% अवक्रमित पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन (Restoration) करना
- कीटनाशकों और प्रदूषण से होने वाले जोखिम को 50% तक कम करना
- संरक्षण के लिए सालाना कम से कम $200 बिलियन का धन जुटाना
- दीर्घकालिक लक्ष्य: 2050 तक प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना









