15 March, 2026
‘राष्ट्रीय राजमार्ग हरित आवरण सूचकांक (NH-GCI) 2025–26’
Fri 13 Mar, 2026
संदर्भ :
- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने ‘राष्ट्रीय राजमार्ग हरित आवरण सूचकांक (NH-GCI) 2025–26’ की पहली वार्षिक रिपोर्ट जारी की।
मुख्य बिन्दु :
- संस्थागत साझेदारी: यह रिपोर्ट भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (NRSC) के सहयोग से तैयार की गई है
- समझौता ज्ञापन (MoU): यह पहल जनवरी 2024 में NHAI और NRSC के बीच हस्ताक्षरित तीन वर्षीय समझौते का हिस्सा है
- उद्देश्य: राष्ट्रीय राजमार्गों के मार्ग (RoW) के भीतर हरित आवरण की वैज्ञानिक और मात्रात्मक निगरानी करना
कार्यप्रणाली और तकनीक :
- उपग्रह डेटा: मूल्यांकन के लिए ISRO के Resourcesat-2/2A उपग्रह से 5-मीटर रिज़ॉल्यूशन वाले मल्टी-स्पेक्ट्रल डेटा का उपयोग किया जाता है, जिसे Cartosat-2S इमेजरी के साथ क्रॉस-सत्यापित किया जाता है।
- क्लोरोफिल डिटेक्शन: उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले सेंसर क्लोरोफिल संकेतों का उपयोग करके वनस्पति की पहचान करते हैं।
- सूचकांक की गणना: NH-GCI को एक प्रतिशत मान के रूप में दर्शाया जाता है, जो राजमार्ग के राइट ऑफ वे (RoW) के भीतर प्रत्येक 1 किलोमीटर के खंड में हरित आवरण के अनुपात को मापता है।
प्रथम मूल्यांकन चक्र के परिणाम :
- कवरेज: पहले चक्र (जुलाई-दिसंबर 2024) में 24 राज्यों में फैले लगभग 30,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का विश्लेषण किया गया।
- शीर्ष राज्य: रिपोर्ट के अनुसार, असम में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे सबसे अधिक हरित आवरण दर्ज किया गया, जिसके बाद गुजरात, तेलंगाना, बिहार और तमिलनाडु का स्थान है।
- न्यूनतम आवरण वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश: सबसे कम हरित आवरण हिमाचल प्रदेश (13.5%), दिल्ली (25.37%), छत्तीसगढ़, ओडिशा और जम्मू-कश्मीर में पाया गया।
महत्व और उद्देश्य :
- वर्ष-दर-वर्ष निगरानी: यह सूचकांक भविष्य में वृक्षारोपण के प्रबंधन, रैंकिंग और समय पर हस्तक्षेप करने के लिए एक विश्वसनीय आधार (baseline) प्रदान करता है।
- संवैधानिक लक्ष्य: यह पहल भारत की हरित राजमार्ग नीति (Green Highways Policy) के उद्देश्यों और पेरिस समझौते के तहत जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में सहायक है।
- सार्वजनिक पहुँच: इसके परिणाम और इंटरैक्टिव मानचित्र NRSC के ओपन-सोर्स Bhuvan web GIS portal पर उपलब्ध कराए जाते हैं।
राज्यों की विस्तृत रैंकिंग (Performance Highlights) :
- सूचकांक में राज्यों को उनके राजमार्गों के किनारे मौजूद 'हरित आवरण प्रतिशत' के आधार पर रैंक किया गया है
शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य (Top 5):
- असम: सबसे अधिक हरित आवरण (यहाँ वर्षावन और अनुकूल जलवायु का लाभ मिला है)
- गुजरात: शुष्क क्षेत्र होने के बावजूद बेहतर वृक्षारोपण प्रबंधन
- तेलंगाना: राज्य की 'हरिथा हरम' जैसी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव
- बिहार: गंगा के मैदानी इलाकों में सघन वृक्षारोपण
- तमिलनाडु: तटीय और प्रायद्वीपीय राजमार्गों पर अच्छी हरियाली
न्यूनतम प्रदर्शन वाले राज्य/UT:
- हिमाचल प्रदेश (13.5%): कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और निर्माण कार्यों के कारण सबसे कम
- दिल्ली (25.37%): अत्यधिक शहरीकरण और सीमित स्थान
- जम्मू-कश्मीर: सुरक्षा और निर्माण संबंधी बाधाएं
रिमोट सेंसिंग तकनीक (The Tech Behind NH-GCI) :
- NHAI और ISRO ने इस सूचकांक को वस्तुनिष्ठ (objective) बनाने के लिए अत्याधुनिक अंतरिक्ष तकनीक का उपयोग किया है
- उपग्रह और सेंसर: मुख्य रूप से Resourcesat-2/2A उपग्रह का उपयोग किया गया है। इसमें लगा LISS-IV (Linear Imaging Self-Scanning Sensor) 5.8 मीटर का उच्च रिज़ॉल्यूशन प्रदान करता है, जिससे सड़क के किनारे के छोटे पेड़ों को भी पहचाना जा सकता है।
- मल्टी-स्पेक्ट्रल इमेजरी: यह तकनीक प्रकाश के विभिन्न तरंग दैर्ध्य (wavelengths) को मापती है। पौधे Infrade-red (IR) प्रकाश को परावर्तित करते हैं, जिसे उपग्रह पकड़ लेता है।
- Cartosat-2S का उपयोग: सूक्ष्म विवरणों और सड़क की सीमाओं (Right of Way) के सटीक सीमांकन के लिए इसका उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा 'क्रॉस-चेकिंग' के लिए उपयोग किया जाता है।
- भुवन (Bhuvan) पोर्टल: सारा डेटा ISRO के भुवन प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया गया है, जो 'जियो-टैगिंग' के माध्यम से वास्तविक समय में निगरानी (Real-time monitoring) सुनिश्चित करता है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) :
- स्थापना : NHAI अधिनियम, 1988 के तहत
- परिचालन शुरू : फरवरी 1995 में
- मुख्यालय: नई दिल्ली
- मंत्रालय: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH)
- वर्तमान अध्यक्ष : संतोष कुमार यादव
- सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 10,000 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण का लक्ष्य रखा है









