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जल जीवन मिशन का पुनर्गठन

Wed 11 Mar, 2026

संदर्भ :

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission - JJM) की अवधि को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने और इसे JJM 2.0 के रूप में पुनर्गठित करने की मंजूरी दी।

मुख्य फैसले और बजट विवरण :

  • कुल परिव्यय (Total Outlay): ₹8.69 लाख करोड़ रुपये
  • केंद्र सरकार की सहायता (Central Assistance): ₹3.59 लाख करोड़ रुपये
  • मूल स्वीकृत बजट (2019-20 में): ₹2.08 लाख करोड़ रुपये (केंद्र हिस्सा)
  • अतिरिक्त केंद्र सहायता: ₹1.51 लाख करोड़ रुपये (मूल से बढ़ोतरी)

जल जीवन मिशन का पुनर्गठन (JJM 2.0) :

  • "सुजलम भारत" (Sujalam Bharat): एक समान राष्ट्रीय डिजिटल फ्रेमवर्क विकसित किया जाएगा, जिसके तहत प्रत्येक गाँव को एक विशिष्ट 'सुजल गाँव/सेवा क्षेत्र आईडी' (Sujal Gaon/Service Area ID) दी जाएगी। यह स्रोत से लेकर नल तक की पूरी जलापूर्ति व्यवस्था की डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करेगा।
  • सेवा-केंद्रित मॉडल: मिशन को 'इन्फ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित' से बदलकर 'नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण मॉडल' बनाया गया है। इसका लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को सतत रूप से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
  • सामुदायिक स्वामित्व: 'हर घर जल' प्रमाणीकरण के लिए ग्राम पंचायतों और 'ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों' (VWSCs) की भागीदारी को 'जल अर्पण' जैसी पहलों के माध्यम से अनिवार्य बनाया गया है।
  • वर्तमान स्थिति : वर्ष 2019 में नल-जल कनेक्शन वाले 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों की आधारभूत स्थिति से, अब तक जल जीवन मिशन (जेजेएम) योजना के तहत 12.56 करोड़ से अधिक अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को नल-जल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। वर्तमान में, देश में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा चिन्हित 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से, लगभग 15.80 करोड़ (81.61 प्रतिशत) परिवारों के पास नल-जल कनेक्शन उपलब्ध हैं।

जल जीवन मिशन (JJM) :

  • मिशन की शुरूआत : 2019
  • शुरुआत में लक्ष्य : 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करना
  • इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मिशन की अवधि 2028 तक बढ़ा दी गई है
  • मिशन के तहत ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति/पानी समिति में कम-से-कम 50% सदस्य महिलाएं होना अनिवार्य है
  • पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का पुनर्गठन किया गया और उसे जल जीवन मिशन में शामिल कर लिया गया।
  • नोडल मंत्रालय/विभाग: केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के तहत पेयजल और स्वच्छता विभाग।
  • योजना का प्रकार: केन्द्र प्रायोजित योजना।
  • केंद्र और राज्य के बीच वित्त-पोषण पैटर्न:
  • हिमालयी राज्यों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश) और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए 90:10 अनुपात में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी;
  • केंद्र शासित प्रदेश के लिए 100% वित्त-पोषण केंद्र सरकार द्वारा।
  • शेष राज्यों के लिए केंद्र-राज्य वित्त-पोषण अनुपात 50:50 है।
  • मुख्य घटक :
  • नल से जल आपूर्ति: 2024 तक देश के 19.25 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन देने का लक्ष्य था, जिसकी समय सीमा अब 2028 तक बढ़ा दी गई है।

जल गुणवत्ता: स्वच्छ पेयजल के माध्यम से जलजनित रोगों (Waterborne diseases) के संक्रमण को कम करना।

  • जल स्रोत की संधारणीयता (Sustainability): भूजल पुनर्भरण (Groundwater recharge) और जल संरक्षण को बढ़ावा देना ताकि पानी के स्रोत लंबे समय तक बने रहें।
  • ग्रे वॉटर प्रबंधन: रसोई और स्नान से निकले अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग करना।
  • कौशल विकास एवं रोजगार: स्थानीय लोगों को जल आपूर्ति संरचना बनाने और उसके रखरखाव के लिए प्रशिक्षित करना, जिससे रोजगार के अवसर पैदा हों।
  • महिला सशक्तिकरण: जल आपूर्ति की योजना बनाने, निगरानी और प्रबंधन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • बॉटम अप प्लानिंग: योजनाओं के क्रियान्वयन और संचालन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता देना।
  • भविष्य की पीढ़ी पर ध्यान: स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और जनजातीय छात्रावासों में नल से जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

उपलब्धियां:

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार 2019 में इस मिशन की शुरुआत के समय केवल 3.23 करोड़ परिवारों को नल से पेयजल प्राप्त हो रहा था। अब ऐसे परिवारों की संख्या बढ़कर 12 करोड़ हो चुकी है।
  • जिन राज्यों में 100% परिवारों को नल से जल प्राप्त हो रहा है, वे हैं; अरुणाचल प्रदेश, गोवा, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, पंजाब, तेलंगाना और मिजोरम।
  • जिन केंद्र शासित प्रदेशों में 100% परिवारों को नल से जल प्राप्त हो रहा है, वे हैं: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह; दादरा नगर हवेली और दमन दीव तथा पुडुचेरी।

राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों/व्यक्तियों द्वारा JJM के प्रभावों का आकलन :

  • SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, JJM ने 9 करोड़ महिलाओं को पानी ढोने के काम से मुक्त किया है
  • WHO के अनुमान के अनुसार, JJM से महिलाओं के श्रमसाध्य कार्य में प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे की बचत हुई है, डायरिया से होने वाली 4 लाख मौतों को रोका जा सका है और 14 मिलियन विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष (DALY) की बचत हुई
  • नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर ने पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 30 प्रतिशत की संभावित कमी का अनुमान लगाया है, जिससे प्रतिवर्ष 1,36,000 बच्चों की जान बचाई जा सकती है
  • IIM बैंगलोर और अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (IIM) ने JJM के माध्यम से 59.9 लाख प्रत्यक्ष और 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष व्यक्ति-वर्ष के संभावित रोजगार सृजन का अनुमान लगाया है
  • JJM 2.0 देश भर के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को दिसंबर 2028 तक नल-जल कनेक्शन उपलब्ध कराकर सभी ग्राम पंचायतों को ‘हर घर जल’ के प्रमाणन में सहयोग देगा।

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