07 March, 2026
आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955
Tue 10 Mar, 2026
संदर्भ :
- पश्चिम एशिया की स्थिति के मद्देनजर केन्द्र सरकार ने प्राकृतिक गैस पर आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू किया।
मुख्य बिन्दु :
- लागू करने का मुख्य कारण : पश्चिम एशिया (मुख्य रूप से ईरान-अमेरिका-इज़राइल संघर्ष) की वर्तमान स्थिति के कारण
- इस संघर्ष के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और LPG की खेपों में व्यवधान आया है।
- कई सप्लायरों ने फोर्स मेज्योर क्लॉज लागू कर दिया है, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों में आपूर्ति की कमी का खतरा बढ़ गया है।
- भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60-70% आयात करता है, जिसमें से 80-90% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
- आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 अधिसूचित किया है।
- अधिसूचना में कहा गया है कि आपूर्ति को पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत के 100 प्रतिशत परिचालन उपलब्धता के अधीन बनाए रखा जाएगा।
- दायरा: यह पूरे भारत में लागू होता है
- नियंत्रण: सरकार वस्तुओं की कीमत तय कर सकती है और उनके स्टॉक की सीमा निर्धारित कर सकती है
- उल्लंघन पर सजा: कानून तोड़ने पर 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 :
- यह 1955 का एक महत्वपूर्ण केंद्रीय कानून है, जिसका मुख्य उद्देश्य जनता के हित में आवश्यक वस्तुओं की उत्पादन, आपूर्ति, वितरण, भंडारण और व्यापार को नियंत्रित करना है।
सरकार को यह अधिकार देता है कि:
- जमाखोरी (hoarding) और कालाबाजारी (black marketing) रोकी जाए।
- कृत्रिम कमी पैदा न हो।
- उचित मूल्य पर उपलब्धता बनी रहे।
- आपात स्थिति में वस्तुओं का पुनर्वितरण (re-allocation) किया जा सके।
पृष्ठभूमि :
- खाद्यान्न संकट: आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 तब लागू किया गया, जब भारत में खाद्यान्न उत्पादन कम होने के कारण गंभीर खाद्य संकट उत्पन्न हो गया था।
- आयात पर निर्भरता: भारत आयात और खाद्य सहायता पर निर्भर था, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका से सार्वजनिक कानून 480 कार्यक्रम के तहत गेहूँ की आपूर्ति भी शामिल थी।
- जमाखोरी पर रोक: इस अधिनियम का उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं का उचित वितरण सुनिश्चित करना और जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाना था।
प्रमुख प्रावधान:
- केंद्र सरकार की शक्तियां (धारा 3): केंद्र सरकार किसी भी वस्तु को 'आवश्यक' घोषित कर सकती है और उसके स्टॉक की सीमा (Stock Limit) तय कर सकती है।
- शक्तियों का प्रत्यायोजन (धारा 5): केंद्र सरकार अपनी शक्तियां राज्य सरकारों या उनके अधिकारियों को सौंप सकती है ताकि ज़मीनी स्तर पर प्रवर्तन प्रभावी हो सके।
- दंड (धारा 7): अधिनियम के आदेशों का उल्लंघन करने पर कारावास (3 महीने से 7 वर्ष तक) और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
- संज्ञेय अपराध (धारा 10A): इस अधिनियम के तहत किए गए अपराध संज्ञेय (Cognizable) होते हैं।
अधिनियम के तहत आने वाली कुछ प्रमुख वस्तुएं:
- खाद्य पदार्थ: तेल, दालें, अनाज
- ऊर्जा: पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल, LPG
- स्वास्थ्य: दवाएं, मास्क, सैनिटाइज़र
- अन्य: उर्वरक (Fertilizers)
कार्यान्वयन के कुछ प्रमुख उदाहरण और परिस्थितियाँ :
- खाद्य तेल और दालों पर स्टॉक सीमा (2021-22): हाल के वर्षों में, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू उत्पादन में उतार-चढ़ाव के कारण दालों (जैसे अरहर, उड़द) और खाद्य तेलों की कीमतें तेजी से बढ़ीं, तो सरकार ने व्यापारियों के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट तय कर दी ताकि कृत्रिम कमी न पैदा हो।
- फेस मास्क और सैनिटाइज़र (2020): COVID-19 महामारी की शुरुआत में, इन वस्तुओं की भारी मांग और जमाखोरी को देखते हुए सरकार ने इन्हें 'आवश्यक वस्तु' घोषित कर दिया था। इससे इनकी अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) को नियंत्रित करने और उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिली।
- आलू और प्याज का नियंत्रण: प्याज की कीमतें जब भी बेतहाशा बढ़ती हैं, सरकार अक्सर इस कानून का उपयोग करके निर्यात पर रोक लगाती है और व्यापारियों के पास मौजूद स्टॉक की जांच करती है।
- उर्वरक (Fertilizers): किसानों को सही समय और सही दाम पर खाद मिले, इसके लिए उर्वरकों को हमेशा इस अधिनियम के दायरे में रखा जाता है ताकि उनकी कालाबाजारी रोकी जा सके।
- पेट्रोलियम उत्पाद: पेट्रोल, डीजल और केरोसिन जैसे उत्पादों की आपूर्ति और वितरण को इसी अधिनियम के तहत विनियमित किया जाता है ताकि देश भर में इनकी निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।
- प्रमुख क्रियाविधि: इस कानून के तहत सरकार राज्यों को यह शक्ति देती है कि वे छापेमारी कर सकें, जब्त की गई वस्तुओं को नीलाम कर सकें और उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई कर सकें।
वर्ष 2020 का संशोधन: संसद ने वर्ष 2020 में अधिनियम में संशोधन करते हुए केंद्र सरकार की शक्तियों को कुछ विशिष्ट वस्तुओं, जैसे- अनाज, दलहन, आलू, प्याज, खाद्य तिलहन तथा ईंधन तेल के असाधारण परिस्थितियों में विनियमन तक सीमित कर दिया था। इनमें युद्ध, अकाल, असाधारण मूल्य वृद्धि तथा गंभीर प्रकृति की प्राकृतिक आपदा जैसी परिस्थितियाँ सम्मिलित हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य :
- यह एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है जिसकी चौड़ाई लगभग 55 से 95 किलोमीटर के बीच है। यह ईरान एवं अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है।
- यह विश्व का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोक पॉइंट है, जहाँ से वैश्विक तेल का लगभग 20% और एलएनजी निर्यात होता है।
- इस जलडमरूमध्य का उपयोग करने वाले प्रमुख तेल निर्यातकों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर शामिल हैं, जबकि इस तेल का 80% से अधिक हिस्सा एशियाई बाज़ारों, मुख्य रूप से भारत, चीन, जापान तथा दक्षिण कोरिया को जाता है।
- अवस्थिति: उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान/संयुक्त अरब अमीरात।
- महत्व: सऊदी अरब, ईरान, इराक और कतर जैसे देशों से तेल/गैस की मुख्य निकास वाहिनी।
- लंबाई और चौड़ाई: लगभग 167 किमी लंबी और संकरे बिंदु पर मात्र 33 किमी चौड़ी।
- भू-राजनीति: अमेरिकी और ईरानी नौसेना की उपस्थिति के कारण यह एक उच्च-तनाव वाला क्षेत्र है, जिसके बंद होने पर वैश्विक ऊर्जा संकट का खतरा रहता है।
- भारत पर प्रभाव: भारत अपनी अधिकांश एलपीजी और कच्चे तेल की जरूरतों के लिए इस मार्ग पर निर्भर है।









