07 March, 2026
रायसीना डायलॉग 2026 (11वां संस्करण)
Mon 09 Mar, 2026
समाचार में क्यों?
भारत की राजधानी नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग का 11वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। यह सम्मेलन विश्व के प्रमुख नेताओं, नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, विद्वानों और उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर वैश्विक भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है।
रायसीना डायलॉग के बारे में
- रायसीना डायलॉग भारत का प्रमुख भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक सम्मेलन है, जिसका आयोजन प्रतिवर्ष नई दिल्ली में किया जाता है। इसकी शुरुआत 2016 में हुई थी।
- इसका आयोजन विदेश मंत्रालय (MEA) और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के संयुक्त सहयोग से किया जाता है।
- यह मंच विश्व के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों, सैन्य अधिकारियों, व्यापारिक नेताओं, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है, ताकि वे समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर सकें।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी तुलना म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस और शांगरी-ला डायलॉग जैसे मंचों से की जाती है।
- “रायसीना” नाम नई दिल्ली की रायसीना हिल से लिया गया है, जहां भारत सरकार के प्रमुख संस्थान जैसे राष्ट्रपति भवन स्थित हैं।
रायसीना डायलॉग 2026 का विषय (Theme)
11वें संस्करण (2026) का विषय है:
“संस्कार – Assertion, Accommodation, Advancement”
यह विषय तीन प्रमुख विचारों पर आधारित है—
1. Assertion (दृढ़ अभिव्यक्ति)
वर्तमान बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में देश अपने राष्ट्रीय हितों, पहचान और रणनीतिक स्वायत्तता को अधिक स्पष्ट रूप से स्थापित कर रहे हैं।
2. Accommodation (समायोजन)
विभिन्न देशों के बीच मतभेदों के बावजूद सहयोग और संवाद के माध्यम से सामंजस्य स्थापित करना आवश्यक है।
3. Advancement (उन्नति)
प्रौद्योगिकी, नवाचार और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से सतत विकास और प्रगति को बढ़ावा देना।
यह विषय वैश्विक राजनीति में उभरती बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World Order) को दर्शाता है।
मुख्य चर्चा के क्षेत्र
रायसीना डायलॉग में विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाता है, जिनमें प्रमुख हैं—
- बदलती वैश्विक भू-राजनीतिक संरचना
- आर्थिक सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखलाएं
- जलवायु परिवर्तन और सतत विकास
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती प्रौद्योगिकियां
- डेटा शासन और डिजिटल संप्रभुता
- ऊर्जा परिवर्तन और महत्वपूर्ण खनिज
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा
- वैश्विक कनेक्टिविटी और अवसंरचना
इन चर्चाओं के माध्यम से देशों के बीच सहयोग और नीति-निर्माण की दिशा तय करने में सहायता मिलती है।
रायसीना साइंस डिप्लोमेसी पहल (2026)
2026 संस्करण में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव (RSDI) शुरू किया गया है।
यह पहल निम्न संस्थानों के सहयोग से शुरू की गई है—
- भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय
- ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF)
इस पहल का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कूटनीति के बीच संबंधों को मजबूत करना है।
इसके प्रमुख उद्देश्य हैं—
- उभरती प्रौद्योगिकियों का वैश्विक शासन
- प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्थाएं
- अनुसंधान सुरक्षा
- वैज्ञानिक नवाचार में वैश्विक सहयोग
- अंतरराष्ट्रीय तकनीकी मानकों में भागीदारी
रायसीना डायलॉग का महत्व
1. वैश्विक रणनीतिक संवाद का मंच: यह सम्मेलन विभिन्न देशों को वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों पर चर्चा का अवसर प्रदान करता है।
2. भारत की विदेश नीति को सशक्त बनाना: रायसीना डायलॉग भारत को अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं को प्रस्तुत करने का अवसर देता है, जैसे—
- रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy)
- बहुपक्षीय सहयोग
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा
- ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना
3. भारत की सॉफ्ट पावर में वृद्धि: इस प्रकार के वैश्विक सम्मेलन भारत की कूटनीतिक छवि और सॉफ्ट पावर को मजबूत करते हैं।
4. बहु-हितधारक सहभागिता: यह सम्मेलन पारंपरिक सरकारी बैठकों से अलग है, क्योंकि इसमें सरकार, निजी क्षेत्र, शिक्षाविद और नागरिक समाज सभी भाग लेते हैं।
निष्कर्ष
- रायसीना डायलॉग 2026 भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और कूटनीतिक नेतृत्व को दर्शाता है। यह सम्मेलन वैश्विक शासन, सुरक्षा, तकनीकी विकास और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है।
- इस प्रकार, रायसीना डायलॉग भारत को एक वैश्विक विचार-नेता (Global Thought Leader) के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और एक समावेशी एवं बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में योगदान देता है।









