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9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपालों और उपराज्यपालों की नियुक्ति

Sun 08 Mar, 2026

संदर्भ :

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मार्च 2026 में एक बड़े फेरबदल के तहत 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपालों (Governors) और उपराज्यपालों (LGs) की नियुक्ति की है।

नियुक्तियाँ:

  1. हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
  2. तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
  3. नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
  4. लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
  5. तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
  6. केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर तमिलनाडु के राज्यपाल के रूप में कार्यों का निर्वहन करेंगे।
  7. लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
  8. दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया।
  9. तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया।
  • त्यागपत्र स्वीकार: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस का त्यागपत्र राष्ट्रपति द्वारा नए नियुक्तियों की घोषणा से पहले ही स्वीकार कर लिया गया था।

राज्यपाल की नियुक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधान :

  • भारतीय संविधान के तहत राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 155 के तहत की जाती है।
  • वे केंद्र सरकार द्वारा मनोनीत होते हैं और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत (अनुच्छेद 156) पद धारण करते हैं।
  • राज्यपाल का पद संविधान के भाग VI में वर्णित है, जो अनुच्छेद-153 से 162 तथा संबंधित प्रावधानों में शामिल है।
  • अनुच्छेद 153: प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्यपाल होगा।
  • 7वें संविधान संशोधन (1956) के अनुसार, एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के लिए नियुक्त किया जा सकता है (7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 के माध्यम से अनुच्छेद-153 में परिवर्तन किया गया, जिससे एक व्यक्ति को एक साथ दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल नियुक्त करने की अनुमति दी गई)
  • अनुच्छेद 155 (नियुक्ति): राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मुहर सहित वारंट द्वारा की जाती है
  • अनुच्छेद 156 (कार्यकाल): राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं। कार्यकाल सामान्यतः 5 वर्ष का होता है, लेकिन वे राष्ट्रपति के इस्तीफे (इच्छा) तक बने रहते हैं
  • अनुच्छेद159 : शपथ या प्रतिज्ञान: राज्यपाल राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (या उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश) के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेते हैं।

उपराज्यपाल से संबंधित संवैधानिक प्रावधान :

  • भारत के संविधान में उपराज्यपाल (LG) से संबंधित मुख्य प्रावधान भाग VIII में अनुच्छेद 239 से 241 के तहत दिए गए हैं, जो केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन से संबंधित हैं।
  • राष्ट्रपति अपने प्रतिनिधि के रूप में एक प्रशासक (आमतौर पर उपराज्यपाल) नियुक्त करते हैं, जो उनकी ओर से उस केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासन संचालित करता है।
  • अनुच्छेद 239 : संविधान के अनुच्छेद 239 में कहा गया है कि प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन भारत के राष्ट्रपति द्वारा उनके द्वारा नियुक्त "प्रशासक" के माध्यम से किया जाएगा, जिसका पदनाम राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है।
  • पदनाम: राष्ट्रपति इस प्रशासक का पदनाम निर्दिष्ट करते हैं।
  • पांच केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, पुडुचेरी, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह) में, उन्हें उपराज्यपाल (एलजी) के रूप में नामित किया गया है ।
  • चंडीगढ़, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव में उन्हें केवल "प्रशासक" कहा जाता है।
  • अनुच्छेद 239AA (Delhi - Special Provision): दिल्ली (NCT) के लिए उपराज्यपाल को विशेष अधिकार देता है। LG के पास पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि जैसे आरक्षित विषयों पर व्यापक अधिकार हैं।

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