23 February, 2026
'स्टडी इन इंडिया एडु-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026'
Fri 06 Mar, 2026
संदर्भ :
- केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा 'स्टडी इन इंडिया एडु-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026' का आयोजन नई दिल्ली में किया गया।
मुख्य बिन्दु :
- आयोजन स्थल : सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली
- मुख्य अतिथि: केंद्रीय शिक्षा मंत्री, श्री धर्मेंद्र प्रधान
- प्रतिभागिता : 50 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और राजनयिक प्रतिनिधि
- मुख्य उद्देश्य: इसका उद्देश्य भारत को एक वैश्विक शिक्षा केंद्र (Global Education Hub) के रूप में स्थापित करना और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना
इस सम्मेलन में निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए:
- भारतीय ज्ञान प्रणाली एक वैश्विक शैक्षणिक पेशकश के रूप में
- SPARC और GIAN के माध्यम से अकादमिक साझेदारी
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकियां
- भारत में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों के लिए यूजीसी विनियम 2023
- अंतर्राष्ट्रीय शाखा परिसर और सहायक ढाँचे
- भारत की कौशल संरचना का अंतर्राष्ट्रीयकरण
- भारत इनोवेट्स 2026
प्रमुख घोषणाएँ और पहल:
- विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों की स्थापना: UGC के 2023 नियमों के तहत वैश्विक स्तर पर रैंक प्राप्त विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने के लिए आमंत्रित किया गया।
- 19 विदेशी विश्वविद्यालयों की प्रक्रिया: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि लगभग 19 विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
- NEP 2020 का कार्यान्वयन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत लचीलापन, बहु-विषयक शिक्षा और वैश्विक जुड़ाव पर जोर दिया गया।
- सहयोगात्मक मॉडल: भारत ने स्पष्ट किया कि वह 'भारतीय मॉडल' थोपने के बजाय साझा चुनौतियों (जैसे जलवायु परिवर्तन) से निपटने के लिए एक सहयोगात्मक मॉडल बनाना चाहता है।
- तीन मुख्य स्तंभ: भारतीय शिक्षा ढांचे को गुणवत्ता, नवाचार और सामर्थ्य (Quality, Innovation, and Affordability) के तीन स्तंभों पर आधारित बताया गया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy 2020) :
परिचय :
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित की गई थी।
- यह नीति 1986 में जारी हुई पिछली शिक्षा नीति के बाद पहली बार व्यापक बदलाव लेकर आई है।
- नीति का उद्देश्य भारत को एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना और शिक्षा को समावेशी, समग्र, लचीला तथा 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।
- यह नीति डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आधारित है
स्कूली शिक्षा की नई संरचना (5+3+3+4) :
पारंपरिक 10+2 ढांचे को बदलकर अब 5+3+3+4 का नया शैक्षणिक ढांचा लागू किया गया है
| चरण | अवधि | आयु वर्ग | विवरण |
| बुनियादी (Foundational) | 5 वर्ष | 3-8 वर्ष | आंगनवाड़ी/प्री-स्कूल (3 वर्ष) + कक्षा 1-2 (2 वर्ष) खेल-आधारित शिक्षा पर जोर |
| प्रारंभिक (Preparatory) | 3 वर्ष | 8-11 वर्ष | कक्षा 3 से 5। खेल, खोज और इंटरैक्टिव कक्षा शिक्षण |
| मध्य (Middle) | 3 वर्ष | 11-14 वर्ष | कक्षा 6 से 8। कोडिंग की शुरुआत और व्यावसायिक (Vocational) प्रशिक्षण |
| माध्यमिक (Secondary) | 4 वर्ष | 14-18 वर्ष | कक्षा 9 से 12। विषयों के चयन में लचीलापन और आलोचनात्मक सोच पर ध्यान |
मुख्य विशेषताएं और लक्ष्य :
- सकल नामांकन अनुपात (GER): 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% और 2035 तक उच्च शिक्षा में 50% GER प्राप्त करने का लक्ष्य है।
- भाषा: कम से कम कक्षा 5 (अधिमानतः कक्षा 8) तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा रखने पर जोर दिया गया है।
- बहु-विषयक शिक्षा: छात्र अब विज्ञान के साथ संगीत या वाणिज्य के साथ इतिहास जैसे विषयों का चुनाव कर सकेंगे।
- परख (PARAKH): छात्रों के मूल्यांकन के लिए एक नया राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र स्थापित किया गया है जो रटने के बजाय वैचारिक समझ को मापेगा।
- उच्च शिक्षा में सुधार: 'मल्टीपल एंट्री और एग्जिट' विकल्प के साथ 4 वर्षीय स्नातक प्रोग्राम और एम.फिल (M.Phil) को समाप्त करना।
- GDP निवेश: शिक्षा पर सार्वजनिक व्यय को जीडीपी के 6% तक बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
नीति के 5 मूलभूत स्तंभ :
- पहुंच (Access): सभी के लिए शिक्षा की उपलब्धता
- समानता (Equity): बिना किसी भेदभाव के समान अवसर
- गुणवत्ता (Quality): उच्च स्तरीय शिक्षा मानक
- वहनीयता (Affordability): सस्ती और सुलभ शिक्षा
- जवाबदेही (Accountability): शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता









