केरल राज्य के नाम में परिवर्तन को मंजूरी
 
  • Mobile Menu
HOME BUY MAGAZINEnew course icon
LOG IN SIGN UP

Sign-Up IcanDon't Have an Account?


SIGN UP

 

Login Icon

Have an Account?


LOG IN
 

or
By clicking on Register, you are agreeing to our Terms & Conditions.
 
 
 

or
 
 




केरल राज्य के नाम में परिवर्तन को मंजूरी

Thu 26 Feb, 2026

संदर्भ :

  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल राज्य का नाम बदलकर केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी।

पृष्ठभूमि और तर्क :

  • भाषाई मूल: मलयालम भाषा में राज्य को हमेशा से 'केरलम' कहा जाता रहा है। 'केरा' का अर्थ नारियल का पेड़ और 'अल्लम' का अर्थ भूमि है, जिसका अर्थ है 'नारियल के पेड़ों की भूमि'
  • विधानसभा का संकल्प: केरल विधानसभा ने जून 2024 में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन करने का आग्रह किया था।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: 1 नवंबर 1956 को भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान इस राज्य का गठन हुआ था, लेकिन आधिकारिक अंग्रेजी नाम 'केरल' ही रहा।

“केरलम” नाम का ऐतिहासिक विकास और उद्भव

प्राचीन ऐतिहासिक साक्ष्य (प्राचीन काल):

  • अशोक के शिलालेख: इस क्षेत्र का सबसे पुराना लिखित प्रमाण तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मिलता है। सम्राट अशोक के द्वितीय शिलालेख (Major Rock Edict II) में इस क्षेत्र के शासकों को 'केरलपुत्र' (Cheras) के रूप में संदर्भित किया गया है।
  • सांस्कृतिक जड़ें: प्राचीन ग्रंथों में इस भूभाग को 'केरलम' कहा गया, जिसका शाब्दिक अर्थ 'नारियल की भूमि' (Kera: नारियल, Alam: भूमि) से जोड़ा जाता है।
  • ऐक्य केरल आंदोलन (20वीं सदी का पूर्वार्ध) :
  • भाषाई एकीकरण: 1920 और 1940 के दशकों में 'ऐक्य केरल आंदोलन' एक सशक्त सामाजिक-राजनीतिक अभियान के रूप में उभरा।
  • उद्देश्य: इस आंदोलन का मुख्य ध्येय मालाबार (ब्रिटिश शासन के अधीन), त्रावणकोर और कोचीन जैसी रियासतों में बिखरे हुए मलयालम भाषी समुदायों को एक प्रशासनिक इकाई के रूप में एकजुट करना था। इसी आंदोलन ने आधुनिक 'केरलम' की वैचारिक और राजनीतिक आधारशिला रखी।

प्रशासनिक पुनर्गठन (स्वतंत्रता के पश्चात) :

  • त्रावणकोर-कोचीन का गठन: 1 जुलाई 1949 को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मील का पत्थर स्थापित हुआ, जब त्रावणकोर और कोचीन की दो बड़ी रियासतों का विलय कर 'त्रावणकोर-कोचीन' राज्य बनाया गया।
  • राज्य पुनर्गठन (1956): अंततः, 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत मालाबार तट को भी इसमें शामिल किया गया और वर्तमान केरल राज्य अस्तित्व में आया।

राज्य का नाम बदलने के लिए संवैधानिक प्रावधान :

  • किसी राज्य का नाम बदलने की शक्ति पूरी तरह से संसद के पास है
  • अनुच्छेद 3: संसद को किसी भी राज्य का नाम बदलने, उसकी सीमाओं में परिवर्तन करने या नया राज्य बनाने का अधिकार देता है
  • राष्ट्रपति की अनुशंसा: नाम बदलने वाला कोई भी विधेयक (Bill) संसद में पेश करने से पहले राष्ट्रपति की सिफारिश अनिवार्य है
  • राज्य विधानसभा की राय: विधेयक संसद में लाने से पहले, राष्ट्रपति उसे संबंधित राज्य की विधानसभा को अपनी राय देने के लिए भेजते हैं। विधानसभा को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपनी राय देनी होती है। हालांकि, यह राय संसद पर बाध्यकारी (binding) नहीं है।
  • संसद में पारित होना: विधेयक को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित होना आवश्यक है।
  • अनुच्छेद 4 और संविधान में संशोधन: विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद, संविधान की पहली और चौथी अनुसूची में बदलाव किया जाता है। अनुच्छेद 4 के अनुसार, इस प्रकार के परिवर्तन को अनुच्छेद 368 के तहत "संविधान संशोधन" नहीं माना जाता।

केरल सामान्‍य जानकारी

  • राजधानी: तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram या Trivandrum)
  • क्षेत्रफल: लगभग 38,863 वर्ग किलोमीटर (भारत के कुल क्षेत्रफल का करीब 1.18%)
  • मुख्य भाषा: मलयालम (Malayalam)
  • अन्य भाषाएँ: अंग्रेजी, तमिल, हिंदी (समझी जाती है)
  • राज्य का गठन: 1 नवंबर 1956 (त्रावनकोर, कोचीन और मलाबार के विलय से)
  • उपनाम: God's Own Country, मसालों की भूमि (Spice Garden of India)
  • प्रमुख पड़ोसी: कर्नाटक (उत्तर), तमिलनाडु (पूर्व), अरब सागर (पश्चिम)
  • प्रमुख शहर: तिरुवनंतपुरम, कोच्चि (Ernakulam), कोझिकोड (Calicut), त्रिशूर, कोल्लम
  • केरल तीन मुख्य भागों में बंटा है:
  • पहाड़ी क्षेत्र (पश्चिमी घाट) — अनामुड़ी (2,695 मीटर) भारत का सबसे ऊँचा पर्वतीय शिखर पेनिनसुलर भारत में यहीं है।
  • मध्य मैदान — चावल, नारियल, रबर, चाय-कॉफी के बागान।
  • तटीय क्षेत्र — 580+ किमी लंबी तटरेखा, बैकवाटर्स (जैसे अलप्पुझा), लगून और बीच (कोवलम, वर्कला, फोर्ट कोच्चि)
  • शास्त्रीय नृत्य: कथकली और मोहिनीअट्टम।
  • मार्शल आर्ट: कलारीपयट्टू (दुनिया की सबसे पुरानी युद्ध कलाओं में से एक)।
  • त्योहार: ओणम (फसल उत्सव) और विशु
  • प्रमुख नदियाँ: पेरियार (सबसे लंबी), भरतपुझा और पम्बा
  • झीलें: वेम्बनाड झील (भारत की सबसे लंबी झील) और अष्टमुडी झील

केरल के राष्ट्रीय उद्यान :

  • एराविकुलम राष्ट्रीय उद्यान (इडुक्की जिला) – प्रसिद्धि: शोला घास के मैदान, लुप्तप्राय नीलगिरी तहर और नीलकुरिंजी फूल (हर 12 साल में एक बार खिलते हैं) – क्षेत्रफल: 97 वर्ग किमी।
  • पेरियार राष्ट्रीय उद्यान (इडुक्की और पथानामथिट्टा जिले) – प्रसिद्धि: पेरियार झील, बाघ, हाथी और नाव सफारी – क्षेत्रफल: 305 वर्ग किमी।
  • साइलेंट वैली राष्ट्रीय उद्यान (पलक्कड़ जिला) – प्रसिद्धि: उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन, शेर-पूंछ वाले मकाक – क्षेत्रफल: 89.52 वर्ग किमी।

Latest Courses