23 February, 2026
'शाहपुर कंडी बैराज/डैम' प्रोजेक्ट
Fri 20 Feb, 2026
संदर्भ :
- भारत, शाहपुर कंडी बैराज/डैम प्रोजेक्ट के माध्यम से रावी नदी के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान जाने से रोकने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है।
शाहपुर कंडी बैराज/डैम परियोजना :
- स्थान: पंजाब के पठानकोट जिले में, रणजीत सागर बांध के डाउनस्ट्रीम (नीचे) और माधोपुर बैराज के अपस्ट्रीम (ऊपर)
- नदी: रावी नदी
- प्रकृति: एक बहुउद्देशीय परियोजना (सिंचाई और जलविद्युत)
उद्देश्य:
- सिंचाई: जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों में 32,173 हेक्टेयर और पंजाब के सीमावर्ती क्षेत्रों में 5,000 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई प्रदान करना।
- पानी का उपयोग: सिंधु जल संधि (1960) के अंतर्गत रावी नदी के पानी का पूर्ण उपयोग करना
- ऐतिहासिक संदर्भ: इसका समझौता 1979 में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच हुआ था और 2008 में इसे 'राष्ट्रीय परियोजना' का दर्जा दिया गया था।
- वित्तपोषण: 80% लागत पंजाब सरकार और शेष 20% केंद्र सरकार द्वारा वहन की जा रही है।
- भू-राजनीति: यह परियोजना पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यह रावी के पानी का उपयोग करती है, जो भारत के लिए रणनीतिक 'सिंधु जल संधि' को मजबूत करता है।
- क्षेत्रीय विकास: जम्मू-कश्मीर (कठुआ/सांबा) और पंजाब में कृषि उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे आर्थिक विकास होगा।
- पर्यावरण और भूगोल: रावी नदी का उद्गम, बहाव और सिंधु प्रणाली में इसकी भूमिका के साथ, इस क्षेत्र की भू-तकनीकी स्थिति जानना महत्वपूर्ण है।
- सीमा पार सहयोग: पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच नदी विवाद का समाधान।
- प्रोजेक्ट 31 मार्च 2026 तक पूरा हो जाएगा।
- अप्रैल 2026 से गर्मियों के सीजन में रावी का सरप्लस पानी पाकिस्तान नहीं जाएगा
रावी नदी :
- सिंधु नदी प्रणाली की एक प्रमुख बारहमासी नदी है, एक सीमा पार नदी है जो भारत और पाकिस्तान से होकर बहती है
- उद्गम: यह हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में रोहतांग दर्रे के पास बारा भंगाल क्षेत्र से निकलकर जम्मू-कश्मीर होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश।
- वैदिक नाम: इसे प्राचीन काल में परुष्णी (Parushni) या इरावती के नाम से जाना जाता था।
- सहायक नदियाँ - सियोल, साईवा, नाई, उझ, बुधिल, आदि।
- लंबाई – इसकी कुल लंबाई 720 किमी है, जिसमें से 320 किमी भारत में और 400 किमी पाकिस्तान में है।
- बाँध और बैराज - रणजीत सागर बाँध, चमेरा बाँध, माधोपुर हेडवर्क्स, सिधनाई बैराज और शाहपुर कंडी बैराज
- संगम: यह पाकिस्तान के झांग जिले के पास चिनाब नदी में मिल जाती है।
- दशराज्ञ युद्ध (Battle of Ten Kings): ऋग्वैदिक काल का यह प्रसिद्ध युद्ध इसी नदी के तट पर लड़ा गया था।
- करतारपुर साहिब: सिख धर्म का पवित्र स्थान करतारपुर साहिब (पाकिस्तान) इसी नदी के तट पर स्थित है।
- इस संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलज (पूर्वी नदियाँ) के पानी का विशेष अधिकार भारत को दिया गया है।
- अंतर्राष्ट्रीय जल संधि (IWT) दक्षिण एशिया की दो प्रमुख सीमा पार जल संधियों में से एक है (दूसरी 1996 की गंगा संधि है)।
- भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हस्ताक्षरित संधि ।
- इसकी मध्यस्थता विश्व बैंक ने की थी।
सिंधु जल संधि (1960):
| नदी खंड | भारत के अधिकार | पाकिस्तान के अधिकार |
| पूर्वी नदियाँ (रावी, ब्यास, सतलज) | इन नदियों के जल पर अनन्य (Exclusive) और अप्रतिबंधित अधिकार। भारत इनका 100% पानी उपयोग कर सकता है। | पाकिस्तान को इन नदियों के जल का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है (अपवाद स्वरूप बहुत कम घरेलू उपयोग)। |
| पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब) | भारत को गैर-उपभोग्य (Non-consumptive) उपयोग का अधिकार है:
1. घरेलू उपयोग 2. कृषि (सीमित क्षेत्र) 3. 'रन-ऑफ-द-रिवर' जलविद्युत परियोजनाएं (बिना पानी रोके बिजली बनाना)। |
इन नदियों के जल पर मुख्य अधिकार पाकिस्तान का है। भारत को इनका पानी मोड़ने या बड़ा भंडारण (Storage) बनाने की अनुमति नहीं है। |









