09 February, 2026
GK Update
Wed 18 Feb, 2026
संदर्भ :
- प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ शिफ्ट होने के तुरंत बाद लिए अपने प्रथम निर्णय में पीएम राहत (सड़क दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस उपचार) योजना के शुभारंभ को स्वीकृति प्रदान की।
मुख्य बिन्द :
- योजना का पूरा नाम : सड़क दुर्घटना पीड़ित का अस्पताल में भर्ती होना और सुनिश्चित उपचार/Road Accident Victim Hospitalization and Assured Treatment
- प्रमुख उद्देश्य: सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना के पहले 60 मिनट यानी "गोल्डन आवर" (Golden Hour) के दौरान तत्काल और मुफ्त चिकित्सा सहायता प्रदान करना, ताकि मृत्यु दर को कम किया जा सके।
- मंत्रालय नोडल एजेंसी: यह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इसके कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) मुख्य नोडल एजेंसी है।
- नकद रहित (Cashless) उपचार: इसके तहत प्रत्येक पीड़ित को ₹1.5 लाख तक का कैशलेस इलाज मिलता है। यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से 7 दिनों तक मान्य होती है।
- पात्रता: यह योजना भारत के किसी भी सड़क (राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य सड़क, या शहर की गली) पर होने वाली दुर्घटना के सभी पीड़ितों के लिए है, जिसमें भारतीय नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
- तकनीकी एकीकरण: यह योजना सड़क परिवहन मंत्रालय के 'ई-डार' (eDAR) प्लेटफॉर्म और NHA के ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम (TMS 2.0) को जोड़ती है। साथ ही, यह आपातकालीन हेल्पलाइन 112 (ERSS) से भी एकीकृत है।
- फंडिंग: अस्पतालों को भुगतान मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) के माध्यम से किया जाता है।
- यह योजना मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 162 के तहत कानूनी रूप से समर्थित है।
- यह 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50% तक कम करने के भारत के '4E' लक्ष्य (Education, Engineering, Enforcement, Emergency Care) का हिस्सा है।
- गंभीर मामलों (Life-threatening) में 48 घंटे और सामान्य मामलों में 24 घंटे के भीतर पुलिस सत्यापन (Police Authentication) अनिवार्य है।
पीएम राहत (PM RAHAT) योजना की चुनौतियां :
- बुनियादी ढांचे की कमी: ग्रामीण इलाकों और दूरदराज के राजमार्गों पर अच्छी तरह से सुसज्जित ट्रॉमा सेंटरों (Trauma Centers) की कमी योजना की प्रभावशीलता को सीमित करती है।
- 7 दिनों की समय सीमा: कई गंभीर मामलों में 7 दिन का समय और ₹1.5 लाख की सीमा पर्याप्त नहीं होती, जिससे परिवार पर बाद में वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
- प्रशासनिक जटिलता: अस्पतालों को भुगतान के लिए पुलिस सत्यापन (Police Authentication) अनिवार्य है। इसमें देरी होने पर अस्पताल कैशलेस इलाज देने में हिचकिचा सकते हैं।
- जागरूकता का अभाव: आम जनता, एम्बुलेंस सेवाओं और पुलिस को अक्सर योजना के तहत सूचीबद्ध (Empanelled) अस्पतालों की जानकारी नहीं होती।
- फंड की निरंतरता: मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) में बीमा कंपनियों और बजटीय आवंटन से निरंतर फंड की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक चुनौती है।
पीएम राहत योजना vs पीएम केयर्स फंड (मुख्य अंतर) :
| विशेषता | पीएम राहत (PM RAHAT) योजना | पीएम केयर्स (PM-CARES) फंड |
| प्रकार | केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme) है। | यह एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट (Public Charitable Trust) है |
| प्राथमिक उद्देश्य | सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 'गोल्डन आवर' में मुफ्त इलाज प्रदान करना। | महामारी (जैसे COVID-19) या भविष्य की किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटना |
| फंडिंग का स्रोत | MVAF (बीमा कंपनियों का योगदान और सरकारी बजट)। | पूरी तरह से स्वैच्छिक योगदान (व्यक्तिगत, कॉर्पोरेट, PSU) |
| प्रबंधन | सड़क परिवहन मंत्रालय और NHA (राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण)। | प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री (ट्रस्टी) |
| जवाबदेही | यह सीधे सरकारी ऑडिट और विधायी जवाबदेही के अधीन है। | CAG ऑडिट अनिवार्य नहीं है; इसे अक्सर RTI के दायरे से बाहर बताया गया है |









