09 February, 2026
लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास
Thu 12 Feb, 2026
संदर्भ
लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध एक प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 94(ग) के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया। यह प्रस्ताव लोकसभा के महासचिव को कांग्रेस के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के. सुरेश तथा सचेतक जावेद अहमद द्वारा सौंपा गया। इस प्रस्ताव को कांग्रेस, द्रमुक (DMK), समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) एवं वाम दलों सहित लगभग 118–119 सांसदों का समर्थन प्राप्त बताया गया।
संवैधानिक आधार
लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94(ग) में निहित है।
अनुच्छेद 94 के अनुसार—
- यदि अध्यक्ष लोकसभा की सदस्यता खो देता है तो वह पद से स्वतः हट जाएगा।
- वह उपाध्यक्ष को लिखित रूप में त्यागपत्र दे सकता है।
- उसे सदन के “तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत” से पारित प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है।
यह व्यवस्था अध्यक्ष को उत्तरदायी बनाती है।
पद से हटाने की प्रक्रिया
- प्रस्ताव लाने से पूर्व लिखित नोटिस देना आवश्यक होता है।
- सामान्यतः 14 दिनों का नोटिस काल आवश्यक होता है।
- प्रस्ताव को सदन के “तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत” (Effective Majority) से पारित होना चाहिए।
- प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान अध्यक्ष स्वयं पीठासीन नहीं होते; उपाध्यक्ष अथवा अन्य सदस्य अध्यक्षता करते हैं।
यह प्रक्रिया निष्पक्षता सुनिश्चित करती है।
लोकसभा अध्यक्ष का महत्व
लोकसभा अध्यक्ष भारतीय संसदीय लोकतंत्र में एक संवैधानिक पद है। उनके प्रमुख कार्य—
- सदन में व्यवस्था एवं अनुशासन बनाए रखना।
- प्रश्न, स्थगन प्रस्ताव एवं अन्य कार्यवाहियों की अनुमति देना।
- कार्य संचालन नियमों की व्याख्या करना।
- दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के अंतर्गत अयोग्यता पर निर्णय देना।
- अनुच्छेद 110 के अंतर्गत धन विधेयक का प्रमाणीकरण करना।
- विभिन्न संसदीय समितियों का अध्यक्ष होना।
इन व्यापक शक्तियों के कारण अध्यक्ष से निष्पक्ष एवं तटस्थ भूमिका की अपेक्षा की जाती है।
अविश्वास प्रस्ताव बनाम पदच्युत प्रस्ताव
- अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) सामान्यतः मंत्रिपरिषद के विरुद्ध अनुच्छेद 75(3) के अंतर्गत लाया जाता है।
- अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव अनुच्छेद 94(ग) के अंतर्गत विशेष रूप से विनियमित है।
अतः दोनों प्रक्रियाएँ भिन्न संवैधानिक आधार पर आधारित हैं।
राजनीतिक एवं शासन संबंधी महत्व
ऐसा प्रस्ताव निम्न संकेत देता है—
- सत्तापक्ष एवं विपक्ष के मध्य गहरा राजनीतिक मतभेद।
- संसदीय कार्यवाही की निष्पक्षता पर प्रश्न।
- लोकतांत्रिक संस्थाओं में जवाबदेही की प्रक्रिया।
यह भारतीय लोकतंत्र में संतुलन एवं नियंत्रण (Checks and Balances) की अवधारणा को दर्शाता है।
प्रमुख शब्दावली
- अनुच्छेद 94(ग) – अध्यक्ष/उपाध्यक्ष को हटाने का प्रावधान।
- प्रभावी बहुमत (Effective Majority) – तत्कालीन कुल सदस्यों का बहुमत (रिक्त सीटें घटाकर)।
- पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) – लोकसभा में अध्यक्ष।
- दसवीं अनुसूची – दल-बदल विरोधी कानून।
- धन विधेयक प्रमाणीकरण – अनुच्छेद 110।
- मुख्य सचेतक (Chief Whip) – दल का अनुशासन सुनिश्चित करने वाला पदाधिकारी।
स्थैतिक तथ्य (Static Facts)
- अनुच्छेद 93 – लोकसभा अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का प्रावधान।
- अनुच्छेद 94 – अध्यक्ष का त्यागपत्र एवं पद से हटाना।
- अनुच्छेद 95 – उपाध्यक्ष की शक्तियाँ।
- अनुच्छेद 75(3) – मंत्रिपरिषद की सामूहिक उत्तरदायित्व।
- दसवीं अनुसूची – 52वां संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ी गई।
- लोकसभा का कार्यकाल – 5 वर्ष (अनुच्छेद 83)।
निष्कर्ष
लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध पदच्युत प्रस्ताव भारतीय संसदीय लोकतंत्र में एक गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया है। यह राजनीतिक मतभेदों के बीच भी संविधान द्वारा प्रदत्त संस्थागत जवाबदेही तंत्र को रेखांकित करता है।









