MSE के लिए बिना गारंटी वाले ऋण की सीमा ₹20 लाख
 
  • Mobile Menu
HOME BUY MAGAZINEnew course icon
LOG IN SIGN UP

Sign-Up IcanDon't Have an Account?


SIGN UP

 

Login Icon

Have an Account?


LOG IN
 

or
By clicking on Register, you are agreeing to our Terms & Conditions.
 
 
 

or
 
 




MSE के लिए बिना गारंटी वाले ऋण की सीमा ₹20 लाख

Tue 10 Feb, 2026

संदर्भ :

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज (MSE) के लिए बिना कोलैटरल (गारंटी/सुरक्षा) वाले ऋण की सीमा को ₹10 लाख से दोगुना करके ₹20 लाख कर दिया है।

मुख्य प्रावधान और बदलाव :

  • अनिवार्य नियम: बैंक MSE सेक्टर की यूनिट्स को ₹20 लाख तक के लोन पर कोई कोलैटरल सिक्योरिटी नहीं मांग सकते। यह पहले ₹10 लाख था (जो 2010 से लगभग अपरिवर्तित था)।
  • PMEGP के तहत: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत फाइनेंस की गई सभी यूनिट्स को भी ₹20 लाख तक कोलैटरल-फ्री लोन अनिवार्य रूप से देना होगा।
  • अतिरिक्त छूट: अगर MSE यूनिट का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा है और वित्तीय स्थिति मजबूत है, तो बैंक अपनी आंतरिक नीति के अनुसार ₹25 लाख तक कोलैटरल-फ्री लोन दे सकते हैं।
  • क्रेडिट गारंटी स्कीम: जहां लागू हो, बैंक CGTMSE (Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises) जैसी क्रेडिट गारंटी स्कीम का फायदा उठा सकते हैं, जिससे बैंक का रिस्क कम होता है।
  • वॉलंटरी गोल्ड/सिल्वर प्लेज: अगर उधारकर्ता खुद से गोल्ड या सिल्वर गिरवी रखना चाहे (₹20 लाख की लिमिट के अंदर), तो यह नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
  • लागू होने की तारीख: सभी नए/रिन्यू लोन पर 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी।

सकारात्मक प्रभाव :

  1. क्रेडिट एक्सेस में सुधार अधिकांश माइक्रो और छोटे उद्यमों के पास संपत्ति/जमीन जैसी कोलैटरल नहीं होती। ₹10 लाख की पुरानी लिमिट मुद्रास्फीति और बढ़ती लागत के कारण अब काफी कम प्रभावी हो गई थी। ₹20 लाख तक बिना गारंटी लोन मिलने से बहुत से छोटे कारोबारी (दुकानदार, छोटे मैन्युफैक्चरर, सर्विस प्रोवाइडर) बैंक से आसानी से फंडिंग ले पाएंगे, बजाय अनौपचारिक स्रोतों (साहूकार) से महंगे कर्ज लेने के।
  2. उद्यमिता और रोजगार सृजन यह कदम छोटे उद्यमों को बढ़ावा देगा, खासकर ग्रामीण/अर्ध-शहरी इलाकों में। ज्यादा फॉर्मल क्रेडिट → ज्यादा निवेश → ज्यादा उत्पादन → ज्यादा नौकरियां। सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' जैसी योजनाओं से यह अच्छी तरह जुड़ता है।
  3. बैंकों के लिए फायदेमंद CGTMSE जैसी गारंटी स्कीम के कारण बैंक का क्रेडिट रिस्क काफी हद तक कवर हो जाता है (कई मामलों में 75-85%)। इससे बैंक ज्यादा आक्रामक तरीके से MSE सेगमेंट में लेंडिंग बढ़ा सकते हैं।
  4. महिलाओं, SC/ST और युवा उद्यमियों पर असर कई सरकारी स्कीमों (Stand-Up India, PMEGP आदि) में पहले से कोलैटरल-फ्री प्रावधान हैं, लेकिन अब सामान्य MSE लोन में भी यह सीमा बढ़ने से इन वर्गों को और फायदा होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक :

स्थापना वर्ष स्थापना : 1 अप्रैल, 1935 को RBI अधिनियम, 1934 के तहत
राष्ट्रीयकरण 1949 में
प्रथम गवर्नर सर ओसबोर्न स्मिथ (1935-1937)
प्रथम भारतीय गवर्नर सी.डी. देशमुख (1943-1949)
मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र
मुद्रा जारी RBI अधिनियम की धारा 22 RBI को देश में मुद्रा जारी करने का एकमात्र अधिकार प्रदान करती है
मौद्रिक नीति समिति (MPC) रेपो दर निर्धारित करने और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए 2016 में गठित
रेपो दर वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को उधार देता है
नकद आरक्षित अनुपात (CRR) बैंकों को RBI के पास जमाराशि का कितना प्रतिशत रखना होगा।
वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) बैंकों को शुद्ध मांग और सावधि देयताओं का प्रतिशत तरल परिसंपत्तियों में रखना चाहिए।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Latest Courses