09 February, 2026
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त
Sun 08 Feb, 2026
संदर्भ :
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन समाप्त करने की आधिकारिक घोषणा की।
मुख्य बिन्दु :
- राष्ट्रपति शासन लागू : 13 फरवरी 2025 से, तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के के इस्तीफे के बाद
- क्यों : मेइती और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच जातीय हिंसा के कारण कानून-व्यवस्था बिगड़ने पर
- राष्ट्रपति शासन लागू करने का संवैधानिक : अनुच्छेद 356 के तहत, इसे बाद में 6 महीने के लिए बढ़ाया गया था
राष्ट्रपति शासन का अर्थ :
- राज्य सरकार को निलंबित करके राज्य का प्रशासन सीधे केंद्र सरकार सँभालती है
- संवैधानिक प्रमुख के रूप में कार्य : राज्यपाल द्वारा, प्रशासन राष्ट्रपति की ओर से चलाया जाता है
- राज्य विधानसभा को भंग किया जा सकता है या ‘निलंबित अवस्था’ में रखा जा सकता है
संवैधानिक आधार:
- अनुच्छेद 355: केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करने का अधिकार देता है कि राज्य संविधान के अनुसार कार्य करें।
- अनुच्छेद 356: यदि राज्य सरकार संवैधानिक रूप से कार्य करने में विफल रहती है तो राष्ट्रपति राज्यपाल की सिफारिश पर या राष्ट्रपति के विवेक पर राष्ट्रपति शासन लागू कर सकता है।
- अनुच्छेद 365: यदि कोई राज्य केंद्र के निर्देशों का पालन नहीं करता है तो राष्ट्रपति यह घोषणा कर सकते हैं कि उसकी सरकार संवैधानिक रूप से कार्य नहीं कर सकती
- अवधि: राष्ट्रपति शासन प्रारंभ में छह महीने तक रहता है, जिसे हर छह महीने में संसद की मंजूरी से 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
- तीन वर्ष से अधिक विस्तार के लिये संविधान संशोधन की आवश्यकता होती है (उदाहरण के लिये, उग्रवाद के दौरान पंजाब के लिये 67वाँ और 68वाँ संशोधन)
- निरसन: राष्ट्रपति, संसदीय अनुमोदन के बिना भी किसी भी समय राष्ट्रपति शासन को निरस्त कर सकते हैं
- राष्ट्रपति शासन नागरिकों के मूल अधिकारों पर अंकुश नहीं लगाता है
राष्ट्रपति शासन के अन्य आधार
एस.आर. बोम्मई मामला (1994) और 'उचित' आधार :
- त्रिशंकु विधानसभा : चुनाव के बाद यदि कोई भी दल या गठबंधन सरकार बनाने की स्थिति में न हो।
- बहुमत का अभाव: यदि सत्तारूढ़ दल अपना बहुमत खो दे और कोई वैकल्पिक सरकार संभव न हो।
- धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन: यदि राज्य सरकार संविधान के बुनियादी ढांचे (जैसे धर्मनिरपेक्षता) के विरुद्ध कार्य करती है
- प्रशासनिक पक्षाघात : राज्य सरकार आंतरिक अशांति या उग्रवाद को रोकने में पूरी तरह विफल हो जाए और प्रशासन ठप हो जाए
'अनुचित' आधार (जिन पर शासन नहीं लगाया जा सकता) :
- कुप्रशासन (Maladministration): केवल प्रशासन की अकुशलता या भ्रष्टाचार के आरोपों पर राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जा सकता।
- लोकसभा चुनाव में हार: यदि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी केंद्र के चुनावों में बुरी तरह हार जाए, तो यह विधानसभा भंग करने का आधार नहीं हो सकता।
- पार्टी के आंतरिक विवाद: सत्तारूढ़ दल के भीतर की फूट को सुलझाने के लिए अनुच्छेद 356 का प्रयोग प्रतिबंधित है।
- नोट : राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्णय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के अधीन है। यदि न्यायालय को लगता है कि आधार 'दुर्भावनापूर्ण' (Mala fide) थे, तो वह भंग की गई सरकार को पुनः बहाल कर सकता है।
अवधि और विस्तार :
- प्रारंभिक अवधि: मंजूरी मिलने के बाद यह 6 महीने तक लागू रहता है।
- अधिकतम अवधि: इसे अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है (हर 6 महीने में संसद की मंजूरी के साथ)।
- 1 वर्ष के बाद विस्तार की शर्तें (44वां संशोधन): एक वर्ष से अधिक विस्तार केवल तभी हो सकता है जब:
- देश में या राज्य के किसी हिस्से में राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो।
- चुनाव आयोग प्रमाणित करे कि राज्य में चुनाव कराना कठिन है
राष्ट्रपति शासन में राज्य की विधायी शक्तियाँ :
- राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा के साथ ही राज्य विधायिका की शक्तियाँ संसद (Parliament) के अधिकार क्षेत्र में चली जाती हैं।
- राज्य सूची पर कानून: संसद को उस राज्य के लिए 'राज्य सूची' (State List) के विषयों पर कानून बनाने की शक्ति प्राप्त हो जाती है।
- राज्य बजट: राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) भी संसद द्वारा ही पारित किया जाता है।
विधायी शक्तियों का प्रत्यायोजन (Delegation of Powers) :
- संसद के पास कार्यभार अधिक होने के कारण, संविधान अनुच्छेद 357 के तहत विधायी शक्तियों के प्रत्यायोजन की व्यवस्था करता है:
- राष्ट्रपति को अधिकार: संसद उस राज्य के लिए कानून बनाने की शक्ति राष्ट्रपति या उनके द्वारा निर्दिष्ट किसी अन्य प्राधिकारी को सौंप सकती है।
- राष्ट्रपति के अधिनियम (President's Acts): इस शक्ति का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति जो कानून बनाते हैं, उन्हें 'राष्ट्रपति के अधिनियम' कहा जाता है।
- अध्यादेश जारी करने की शक्ति (Ordinance Making Power) : यदि संसद का सत्र नहीं चल रहा हो, तो राष्ट्रपति उस राज्य के प्रशासन के लिए अध्यादेश जारी कर सकते हैं। यह शक्ति सामान्य समय में राज्यपाल के पास होती है, लेकिन राष्ट्रपति शासन के दौरान यह राष्ट्रपति के पास आ जाती है।
- संचित निधि से व्यय (Expenditure from Consolidated Fund) : जब लोकसभा सत्र में न हो, तो राष्ट्रपति राज्य की संचित निधि से व्यय को अधिकृत कर सकते हैं (बाद में संसद की मंजूरी के अधीन) जब संसद सत्र में न हो, तो राष्ट्रपति राज्य के शासन के लिए अध्यादेश जारी कर सकते हैं।
राष्ट्रपति शासन में राज्य की न्यायपालिका :
- राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राज्य की कार्यपालिका और विधायिका की शक्तियाँ तो केंद्र के पास चली जाती हैं, लेकिन उच्च न्यायालय (High Court) की संवैधानिक स्थिति और शक्तियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को राज्य के प्रशासन के संबंध में व्यापक शक्तियाँ देता है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है कि राष्ट्रपति उच्च न्यायालय से संबंधित किसी भी संवैधानिक प्रावधान को निलंबित नहीं कर सकते और न ही स्वयं को उसकी शक्तियों से जोड़ सकते हैं।
- न्यायिक स्वतंत्रता: उच्च न्यायालय की शक्तियाँ, क्षेत्राधिकार और कार्यप्रणाली वैसी ही बनी रहती हैं जैसी राष्ट्रपति शासन लागू होने से पहले थीं। राज्य का प्रशासन चलाने के लिए राज्यपाल या राष्ट्रपति ऐसा कोई कदम नहीं उठा सकते जो उच्च न्यायालय की गरिमा या अधिकार को कम करता हो।
- न्यायिक समीक्षा (Judicial Review): राष्ट्रपति शासन लगाने की उद्घोषणा स्वयं न्यायिक समीक्षा के अधीन है। उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय इस बात की जाँच कर सकते हैं कि क्या राष्ट्रपति शासन दुर्भावनापूर्ण आधार पर तो नहीं लगाया गया है( 1994 के एस.आर. बोम्मई मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यदि राष्ट्रपति शासन दुर्भावनापूर्ण, मनमाने या असंवैधानिक आधारों पर लगाया गया है, तो न्यायालय उसे रद्द कर सकता है और निलंबित विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकता है।)
मणिपुर में नई सरकार का गठन
- मणिपुर में 4 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति शासन हटने के तुरंत बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष युम्नाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई निर्वाचित सरकार का गठन हुआ
- युम्नाम खेमचंद सिंह ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की
- राज्यपाल अजय भल्ला ने शपथ ग्रहण कराया।
उप-मुख्यमंत्री (Deputy Chief Ministers): राज्य के विभिन्न जातीय समुदायों के बीच संतुलन और समावेशी शासन सुनिश्चित करने के लिए दो उप-मुख्यमंत्री नियुक्त किए गए हैं:
- नेमचा किपजेन (Nemcha Kipgen): वे मणिपुर की पहली महिला उप-मुख्यमंत्री बनी हैं, जो कुकी-ज़ो समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वर्चुअल (Virtual) माध्यम से शपथ ग्रहण की
- लोसी दिखो (Losii Dikho): नागा पीपल्स फ्रंट (NPF) के नेता और नागा समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने दूसरे उप-मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की
मणिपुर सामान्य जानकारी
- इसे "भारत का गहना" (Jewel of India) कहा जाता है
- मणिपुर को भारत की 'ऑर्किड बास्केट' के रूप में भी जाना जाता है।
- 1947 में भारत में विलय, 1956 में केंद्रशासित प्रदेश, 21 जनवरी 1972 को पूर्ण राज्य का दर्जा
- राजधानी : इंफाल
- अवस्थिति: उत्तर-पूर्वी भारत के 'सेवन सिस्टर्स' राज्यों में से एक
- सीमाएँ: उत्तर में नागालैंड, दक्षिण में मिज़ोरम, पश्चिम में असम और पूर्व में म्यांमार के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है
- राजभाषा : मणिपुरी (मैतेई)
- प्रमुख त्योहार : त्योहार: कुट, चेइराओबा, याोसांग, कांग चिंगबा
- प्रमुख नदी : इंफाल, इरील, नामबुल और बराक
- लोकटक झील (Loktak Lake): यह पूर्वोत्तर भारत की ताजे पानी की सबसे बड़ी झील है। यहाँ दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान 'केयबुल लामजाओ' स्थित है
- मणिपुरी नृत्य: यह भारत के शास्त्रीय नृत्यों में से एक है, जो अपनी शालीनता और 'रासलीला' के लिए जाना जाता है।
- इमा कैथल (Ima Keithel): इंफाल में स्थित यह विश्व का एकमात्र ऐसा बाजार है जिसे पूरी तरह से महिलाएँ चलाती हैं
सामाजिक संरचना :
- मैतेई (Meitei): ये मुख्य रूप से घाटी वाले क्षेत्रों में रहते हैं।
- नागा (Naga): ये पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली प्रमुख जनजाति हैं।
- कुकी (Kuki): ये भी पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाली प्रमुख जनजाति हैं।
वन्यजीव :
- राज्य पशु : संगाई (ब्राउ-एंटलर्ड डियर)
- राज्य पक्षी : मिसेज़ ह्यूम्स तीतर
- राज्य फूल : शिरुई लिली









