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न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START)

Fri 06 Feb, 2026

न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (New START), जो संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस के बीच अंतिम शेष द्विपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता था, 5 फ़रवरी को औपचारिक रूप से समाप्त हो गया। इसके साथ ही विश्व की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के परमाणु शस्त्रागार पर कानूनी रूप से बाध्यकारी सीमाएँ लगाने वाला एक महत्वपूर्ण युग समाप्त हो गया। यह घटनाक्रम वैश्विक परमाणु हथियार नियंत्रण, रणनीतिक स्थिरता और अप्रसार प्रयासों के लिए एक बड़ा झटका है, जिसका प्रभाव भारत जैसे देशों पर भी पड़ता है।

 

पृष्ठभूमि

New START की उत्पत्ति 2000 के दशक के उत्तरार्ध में वाशिंगटन और मॉस्को के बीच हुए कूटनीतिक “रीसेट” के दौर से हुई थी। यह संधि 5 फ़रवरी 2011 को लागू हुई और इसने शीत युद्ध काल की पुरानी हथियार नियंत्रण व्यवस्थाओं का स्थान लिया।

इस संधि के प्रमुख प्रावधान थे:

  • प्रत्येक पक्ष के लिए 1,550 तैनात परमाणु वारहेड्स की अधिकतम सीमा।
  • अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM), पनडुब्बी से प्रक्षेपित बैलिस्टिक मिसाइलों (SLBM) और भारी बमवर्षकों पर सीमाएँ।
  • एक सुदृढ़ सत्यापन व्यवस्था, जिसमें प्रतिवर्ष 18 स्थल निरीक्षण, डेटा का आदान-प्रदान और विवाद समाधान हेतु एक द्विपक्षीय आयोग शामिल था।

इन प्रावधानों ने पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता और पारस्परिक विश्वास को बढ़ावा दिया, जिससे अनपेक्षित टकराव और गलत आकलन का जोखिम कम हुआ।

New START क्यों विफल हुआ?

महत्वपूर्ण होने के बावजूद New START लगातार विवादों से घिरा रहा।

  • रूस का तर्क था कि अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणालियाँ रणनीतिक संतुलन को कमजोर करती हैं और परस्पर सुनिश्चित विनाश (MAD) की अवधारणा को बाधित करती हैं।
  • अमेरिका ने “कन्वेंशनल प्रॉम्प्ट ग्लोबल स्ट्राइक” जैसी क्षमताओं को लेकर चिंता जताई, जिनमें पारंपरिक वारहेड्स को बैलिस्टिक मिसाइलों पर तैनात किया जाता है।

तकनीकी प्रगति ने स्थिति को और जटिल बना दिया। रूस ने सरमत भारी ICBM और अवांगार्ड हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन जैसे नए हथियार तंत्र विकसित किए। हालांकि इन्हें New START के अंतर्गत शामिल किया गया, लेकिन पोसीडॉन परमाणु-चालित अंडरवाटर ड्रोन और बुरेवेस्टनिक परमाणु-चालित क्रूज़ मिसाइल जैसे सिस्टम संधि की तकनीकी परिभाषा से बाहर रहे।

यह संधि मूल रूप से 2021 में समाप्त होनी थी, लेकिन अंतिम क्षणों में इसे 5 वर्ष के लिए बढ़ाकर 5 फ़रवरी 2026 कर दिया गया। हालांकि यूक्रेन संघर्ष के बाद फ़रवरी 2023 में रूस ने इसमें अपनी भागीदारी निलंबित कर दी, जिसके बाद अमेरिका ने भी व्यावहारिक रूप से इससे दूरी बना ली। इससे संधि औपचारिक समाप्ति से पहले ही निष्प्रभावी हो गई।

वैश्विक परिणाम

  • 1972 के बाद पहली बार, अमेरिका और रूस के बीच रणनीतिक परमाणु हथियारों पर कोई कानूनी रूप से बाध्यकारी सीमा नहीं है। सत्यापन के औपचारिक तंत्र समाप्त हो चुके हैं और अब दोनों देश उपग्रह चित्रों और एकतरफा खुफिया सूचनाओं पर निर्भर हैं, जो अधिक त्रुटिपूर्ण और राजनीतिकरण के शिकार हो सकते हैं।
  • इसके साथ ही आधुनिक युद्ध में परमाणु और गैर-परमाणु रणनीतिक प्रणालियाँ आपस में गुँथ चुकी हैं। साइबर हमले, अंतरिक्ष आधारित प्रणालियाँ और हाइपरसोनिक हथियार परमाणु सीमा लांघे बिना भी कमांड और कंट्रोल को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे बड़ा खतरा नए वारहेड्स की संख्या नहीं, बल्कि पूर्वानुमेयता की हानि है।
  • New START की समाप्ति से चीन और अन्य परमाणु शक्तियों को किसी व्यापक अप्रसार व्यवस्था में शामिल करना भी और कठिन हो गया है। अमेरिका, रूस और चीन—तीनों ही अपनी-अपनी रणनीतिक दलीलें देकर किसी नए ढाँचे से दूरी बनाए हुए हैं।

 

भारत पर प्रभाव

भारत के लिए New START की समाप्ति के अप्रत्यक्ष लेकिन महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रभाव हैं:

1. वैश्विक हथियार नियंत्रण मानदंडों का क्षरण

भारत हमेशा जिम्मेदार परमाणु आचरण और रणनीतिक स्थिरता का समर्थक रहा है। हथियार नियंत्रण तंत्र के कमजोर होने से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है।

2. एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर प्रभाव

अमेरिका-रूस प्रतिस्पर्धा का असर चीन की परमाणु नीति पर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव भारत की सुरक्षा गणनाओं पर होगा।

3. अप्रसार प्रयासों को चुनौती

हथियार नियंत्रण की कमजोरी से वैश्विक अप्रसार ढाँचे को मज़बूत करना कठिन हो जाएगा।

4. रणनीतिक स्वायत्तता और प्रतिरोधक क्षमता

भारत को विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोध, कमांड और कंट्रोल की सुरक्षा तथा प्रणाली की जीवितता पर और अधिक ध्यान देना होगा।

 

आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार निकट भविष्य में व्यापक संधियों के बजाय छोटे लेकिन व्यावहारिक उपाय संभव हैं, जैसे पारदर्शिता बहाल करना, P5 देशों के बीच परिभाषाओं का मानकीकरण, तथा हॉटलाइन, लॉन्च नोटिफिकेशन और दुर्घटना रोकथाम उपाय विकसित करना।

निष्कर्ष

New START की समाप्ति वैश्विक परमाणु शासन में एक निर्णायक मोड़ है। यह तत्काल हथियारों की दौड़ नहीं लाती, लेकिन रणनीतिक स्थिरता के महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच को हटा देती है। भारत के लिए यह बदलता परिदृश्य सक्रिय कूटनीति, क्षेत्रीय स्थिरता और जिम्मेदार परमाणु नीति के महत्व को और अधिक रेखांकित करता है।

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