इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0
 
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इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0

Tue 03 Feb, 2026

संदर्भ :

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने के उद्देश्य से 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0' के शुभारंभ की औपचारिक घोषणा की।

मुख्‍य बिन्‍द :

  • मुख्य उद्देश्य : भारत को केवल चिप असेंबली तक सीमित न रखकर एक संपूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (Ecosystem) के रूप में विकसित करना एवं 2030 तक भारतीय सेमीकंडक्टर बाजार को $100-110 बिलियन तक पहुंचाना
  • मुख्य लक्ष्य: भारत में सेमीकंडक्टर उपकरणों (Equipment) और कच्चे माल (Materials) का उत्पादन करना, भारतीय बौद्धिक संपदा (IP) तैयार करना और एक मजबूत सप्लाई चेन बनाना
  • वित्तीय आवंटन: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹1,000 करोड़ का प्रारंभिक प्रावधान
  • नोडल विभाग: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
  • अनुसंधान एवं विकास (R&D): इस मिशन के तहत उद्योग के नेतृत्व में अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे ताकि कुशल वर्कफोर्स तैयार की जा सके।
  • फैबलेस स्टार्टअप्स को समर्थन: सरकार का लक्ष्य डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना के माध्यम से कम से कम 50 फैबलेस चिप कंपनियों को समर्थन देना है।
  • तकनीकी प्रगति: यह मिशन 3-नैनोमीटर (3nm) और 2-नैनोमीटर (2nm) जैसे अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी नोड्स पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • लक्ष्य: भारत को सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण भागीदार बनाना और चीन-ताइवान पर निर्भरता कम करना।
  • फोकस: अब ध्यान केवल फैब्रिकेशन (Fab) पर नहीं, बल्कि इक्विपमेंट (उपकरण), मटेरियल प्रोडक्शन और भारतीय बौद्धिक संपदा (IP) डिजाइन को बढ़ावा देने पर है।
  • निवेश: सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के लिए ₹40,000 करोड़ का आवंटन किया है।
  • कौशल विकास: इंडस्ट्री-आधारित शोध और ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे ताकि कुशल कार्यबल (skilled workforce) तैयार हो सके।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 1.0:

  • शुरूआत : दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ
  • मुख्य उद्देश्य : देश में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण के लिए एक आत्मनिर्भर इकोसिस्टम तैयार करना और भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना
  • नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)

ISM के अंतर्गत प्रमुख योजनाएँ :

  • सेमीकंडक्टर फैब्स योजना: वेफर फैब इकाइयों के लिए 50% तक वित्तीय सहायता।
  • डिस्प्ले फैब्स योजना: डिस्प्ले फैब्स के लिए परियोजना लागत का 50% तक समर्थन।
  • डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना: डिजाइन, विकास और परिनियोजन चरणों में वित्तीय सहायता।
  • सेमिकॉन इंडिया: उद्योग, नीति-निर्माताओं, अकादमिक जगत और स्टार्ट-अप्स को सहयोग और निवेश हेतु जोड़ने वाला प्रमुख मंच

प्रमुख उपलब्धियां:

  • भारी निवेश और परियोजनाएं: 6 राज्यों में 10 से अधिक सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले फैब, और ओएसएटी (OSAT) इकाइयों को मंजूरी मिली है।
  • प्रमुख सौदे: माइक्रोन (₹22,516 करोड़), टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स (PSMC के साथ ₹91,000 करोड़), टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (₹27,000 करोड़), और सीजी पावर (₹7,600 करोड़) ने निवेश किया है।
  • स्वदेशी चिप: भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप 'विक्रम' इसरो द्वारा विकसित की गई।
  • डेटा और एआई: 315 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में 67,000+ विद्यार्थियों को चिप डिजाइन में प्रशिक्षित किया गया है।
  • स्टार्टअप्स को बढ़ावा: DLI (Design Linked Incentive) स्कीम के तहत 24 स्टार्टअप्स को सहायता और 14 स्टार्टअप्स को वीसी फंडिंग प्राप्त हुई।
  • बुनियादी ढांचा: साणंद, गुजरात में भारत की पहली एंड-टू-एंड ओएसएटी (OSAT) पायलट लाइन शुरू की गई।
  • अर्धचालक क्या होता है?
  • अर्धचालक ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता चालकों (जैसे तांबा, एल्युमीनियम) से कम होती है, लेकिन अचालकों (जैसे कांच, रबर) से अधिक होती है। इनकी सबसे खास बात यह है कि इनकी विद्युत चालकता को तापमान, रोशनी या अन्य बाहरी कारकों से बदला जा सकता है।

गुण:

  • चालकता: चालकों और अचालकों के बीच की चालकता होती है।
  • तापमान पर निर्भरता: तापमान बढ़ने पर इनकी चालकता बढ़ जाती है।
  • अशुद्धियों का प्रभाव: इनमें थोड़ी सी अशुद्धि मिलाकर उनकी चालकता को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • रोशनी का प्रभाव: कुछ अर्धचालक रोशनी के संपर्क में आने पर विद्युत धारा उत्पन्न करते हैं।

अर्धचालकों के प्रकार:

  • आंतरिक अर्धचालक: शुद्ध रूप में पाए जाने वाले अर्धचालक, जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम।
  • बाह्य अर्धचालक: आंतरिक अर्धचालकों में अशुद्धियां मिलाकर बनाए गए अर्धचालक, जैसे n-प्रकार और p-प्रकार के अर्धचालक।

अर्धचालकों के उपयोग:

अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का आधार हैं। इनका उपयोग विभिन्न प्रकार के उपकरणों में होता है, जैसे:

  • ट्रांजिस्टर: इनका उपयोग सिग्नल को बढ़ाने, स्विच करने और एम्पलीफाई करने में होता है।
  • डायोड: इनका उपयोग विद्युत धारा को एक ही दिशा में प्रवाहित करने के लिए होता है।
  • इंटीग्रेटेड सर्किट (IC): इनमें लाखों ट्रांजिस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक घटक होते हैं, जो कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग किए जाते हैं।
  • सौर सेल: ये सूर्य की रोशनी को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलते हैं।

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