21 January, 2026
‘डायमंड ट्रायंगल’ विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूची में शामिल
Fri 30 Jan, 2026
संदर्भ :
- यूनेस्को ने ओडिशा के रत्नागिरी, उदयगिरी और ललितगिरी बौद्ध स्थलों के ‘डायमंड ट्रायंगल’ को भारत की विश्व धरोहर स्थल की अस्थायी सूची में शामिल किया।
ओडिशा का 'डायमंड ट्रायंगल' (Diamond Triangle) :
- तीन प्रमुख प्राचीन बौद्ध स्थलों—रत्नागिरी, ललितगिरी और उदयगिरी का एक समूह है।
- ये स्थल जाजपुर और कटक जिलों की पहाड़ियों में स्थित हैं।
नाम का अर्थ और धार्मिक महत्व :
- वज्रयान बौद्ध धर्म: इसका नाम 'वज्रयान' शाखा से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'वज्र वाहन' या 'डायमंड व्हीकल' होता है।
- तीनों शाखाओं का संगम: यह स्थल बौद्ध धर्म की तीनों प्रमुख शाखाओं—हीनयान, महायान और वज्रयान के क्रमिक विकास और इतिहास को दर्शाता है।
प्रमुख स्थलों का विवरण
ललितगिरी (Lalitgiri):
- 'डायमंड ट्रायंगल' का सबसे प्राचीन और पवित्र स्थल माना जाता है। यहाँ का इतिहास दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व (2nd Century BCE) से शुरू होकर 14वीं शताब्दी ईस्वी तक फैला हुआ है।
- भगवान बुद्ध के अवशेष: 1985-1992 की खुदाई के दौरान यहाँ के 'महास्तूप' से पवित्र अवशेष (Relics) मिले थे। ये अवशेष सोने, चांदी और पत्थर के तीन परतों वाले संदूकों (Relic Caskets) में सुरक्षित थे, जो पूर्वी भारत में अपनी तरह की पहली खोज थी।
- अप्सिडल चैत्यगृह (Apsidal Chaitya): यहाँ ईंटों से बना एक विशाल प्रार्थना स्थल मिला है, जिसके केंद्र में एक वृत्ताकार स्तूप है। यह ओडिशा में पाया गया इस तरह का पहला बौद्ध ढांचा है।
- प्राचीन मठ: खुदाई में यहाँ चार विशाल मठों के अवशेष मिले हैं, जहाँ कभी दुनिया भर से भिक्षु और छात्र शिक्षा प्राप्त करने आते थे।
- कला और मूर्तियां: यहाँ बुद्ध की विभिन्न मुद्राओं में मूर्तियाँ, तारा और अवलोकितेश्वर की प्रतिमाएं और कुषाण-ब्राह्मी लिपि में लिखे हुए शिलालेख मिले हैं।
रत्नागिरी (Ratnagiri):
- सबसे भव्य और कलात्मक रूप से समृद्ध स्थल है।
- इसे 'रत्नों की पहाड़ी' भी कहा जाता है।
- यह 5वीं से 13वीं शताब्दी के बीच तांत्रिक बौद्ध धर्म (वज्रयान) का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र था।
- भव्य नक्काशीदार प्रवेश द्वार: रत्नागिरी अपने मठ संख्या-1 (Monastery-1) के प्रवेश द्वार के लिए प्रसिद्ध है, जो हरे क्लोराइट पत्थर पर की गई बेहद बारीक और सुंदर नक्काशी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
- मठों की संरचना: यहाँ से दो विशाल मठ और एक बड़ा स्तूप मिला है। यहाँ भारत का एकमात्र वक्राकार छत (Curvilinear roof) वाला मठ स्थित है, जो वास्तुकला की दृष्टि से अनूठा है।
- मूर्तिकला: यहाँ बुद्ध की एक विशाल 8 फीट ऊंची प्रतिमा है, जिसके आसपास छोटे बुद्ध और अन्य बौद्ध देवी-देवताओं की कलाकृतियाँ हैं। यहाँ की मूर्तियाँ गांधार और मथुरा कला शैली के प्रभाव को दर्शाती हैं।
- ह्वेनसांग का उल्लेख: चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) ने अपने यात्रा वृत्तांत में इस महाविहार की महिमा और इसके आध्यात्मिक महत्व का वर्णन किया था।
- संग्रहालय: यहाँ के ASI स्थानीय संग्रहालय में खुदाई के दौरान मिलीं हजारों छोटी मूर्तियां, टेराकोटा की मुहरें और तांबे की प्लेटें प्रदर्शित की गई हैं।
उदयगिरी (Udayagiri):
- 'डायमंड ट्रायंगल' का सबसे विशाल और क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा स्थल है। प्राचीन काल में इसे 'माधवपुर महाविहार' के नाम से जाना जाता था।
- दो प्रमुख परिसर: उदयगिरी दो भागों में बंटा है—उदयगिरी-1 (माधवपुर महाविहार) और उदयगिरी-2। यहाँ खुदाई में बड़े स्तूप, मठ और कई मंदिर मिले हैं।
- अनोखी बावड़ी (Step-well): यहाँ चट्टानों को काटकर बनाई गई एक प्राचीन बावड़ी है, जो भारत के अन्य बौद्ध स्थलों में दुर्लभ है। यह उस समय के उन्नत जल प्रबंधन को दर्शाती है।
- मूर्तिकला वैभव: यहाँ अवलोकितेश्वर की एक विशाल मूर्ति है। साथ ही, यहाँ 'भूमि स्पर्श मुद्रा' में बुद्ध की भव्य प्रतिमाएं और तांत्रिक बौद्ध धर्म से संबंधित देवी-देवताओं की नक्काशी देखने को मिलती है।
- शैलकृत गुफाएं: पहाड़ी की तलहटी में कई छोटी गुफाएं और शिलालेख मिले हैं, जो स्थानीय राजाओं द्वारा इन मठों को दिए गए दान का विवरण देते हैं।
- प्रकृति और शांति: यह स्थल चारों ओर से हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा है, जो इसे ध्यान और शांति के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।
ऐतिहासिक कालखंड :
- इन मठों का निर्माण मुख्य रूप से 5वीं से 13वीं शताब्दी ईस्वी के बीच हुआ था।
- भौमकर राजवंश (8वीं-10वीं शताब्दी) के शासनकाल में ये केंद्र अपने चरम पर थे।
- चीनी यात्री ह्वेनसांग (Xuanzang) ने भी 7वीं शताब्दी में इन क्षेत्रों की यात्रा की थी और इनका उल्लेख किया था।
पर्यटन और कनेक्टिविटी :
- ये स्थल भुवनेश्वर से लगभग 90-100 किलोमीटर और कटक से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं।
- राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-16/12) द्वारा यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।
यूनेस्को
- पूरा नाम: संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन
- अंग्रेज़ी नाम: United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization (UNESCO)
- स्थापना: 1945
- मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस
- प्रमुख उद्देश्य: शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संचार के माध्यम से शांति और सतत विकास को बढ़ावा देना
- विश्व धरोहर सम्मेलन 1972 में यूनेस्को द्वारा बनाया गया एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है
- प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को विश्व विरासत दिवस मनाया जाता है(इस वर्ष (2025) का विषय : "आपदाओं और संघर्षों से खतरे में विरासत: ICOMOS की 60 वर्षों की कार्रवाइयों से तैयारी और सीख")
यूनेस्को की अस्थायी सूची (Tentative List) :
- उन संपत्तियों की एक सूची होती है जिन्हें कोई देश (State Party) भविष्य में विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) के रूप में नामांकित करने के लिए उपयुक्त मानता है।
- यह मुख्य विश्व धरोहर सूची के लिए एक प्रतीक्षा सूची (Waitlist) की तरह काम करती है। किसी भी स्थल को विश्व धरोहर स्थल के रूप में तभी नामांकित किया जा सकता है, जब वह कम से कम एक साल पहले से इस अस्थायी सूची में शामिल हो।
- नामांकन प्रक्रिया: देश (भारत के संदर्भ में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण - ASI) इन स्थलों की पहचान करता है और उनके 'उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य' (Outstanding Universal Value) का विवरण यूनेस्को को भेजता है।
- महत्व: इस सूची में शामिल होना इस बात की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता है कि वह स्थल वैश्विक सांस्कृतिक या प्राकृतिक महत्व रखता है।
- भारत की स्थिति: भारत ने समय-समय पर कई स्थलों को इस सूची में जोड़ा है। वर्तमान में भारत के 44 स्थल मुख्य विश्व धरोहर सूची में हैं (नवीनतम: मराठा सैन्य परिदृश्य), जबकि अस्थायी सूची में अब तक 70 स्थल शामिल हो चुके हैं।
स्थाई सूची में नवीनतम 3 स्थल:
- 44वाँ: मराठा सैन्य परिदृश्य (2025) – इसमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु के 12 महत्वपूर्ण किले शामिल हैं। स्रोत: PIB
- 43वाँ: चराईदेव मोईदाम, असम (2024) – अहोम राजवंश का टीला-दफन प्रणाली।
- 42वाँ: होयसल के पवित्र समूह, कर्नाटक (2023)









