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भारत में जनसांख्यिकीय परिवर्तन और राज्य वित्त

Sun 25 Jan, 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट “State Finances: A Study of Budgets of 2025–26” जारी की है। इस रिपोर्ट की थीम “भारत में जनसांख्यिकीय परिवर्तन — राज्य वित्त पर प्रभाव” है। रिपोर्ट इस तथ्य को रेखांकित करती है कि भारत के विभिन्न राज्यों में जनसंख्या की आयु-संरचना में अंतर अब उनकी वित्तीय स्थिति (Fiscal Health) को निर्णायक रूप से प्रभावित करने लगा है।

भारत का जनसांख्यिकीय संक्रमण: पृष्ठभूमि

  • भारत वर्तमान में एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय चरण से गुजर रहा है। देश की माध्य आयु लगभग 28 वर्ष है, जो यह दर्शाती है कि कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या ऐतिहासिक शिखर के निकट है।
  • परंतु यह राष्ट्रीय औसत राज्य स्तर पर मौजूद भारी विविधताओं को छिपा देता है। कुछ राज्य अभी भी युवा जनसंख्या के चरण में हैं, जबकि कुछ राज्य पहले ही वृद्धावस्था की ओर बढ़ चुके हैं। RBI की रिपोर्ट बताती है कि ये अंतर अब केवल सामाजिक संकेतक नहीं रहे, बल्कि राज्य वित्त को आकार देने वाले प्रमुख कारक बन गए हैं।

 

राज्यों में असमान जनसांख्यिकीय स्वरूप

रिपोर्ट राज्यों को व्यापक रूप से तीन वर्गों में रखती है:

1. युवा राज्य (Youthful States)

बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में युवा जनसंख्या का अनुपात अधिक है।

  • इन राज्यों के पास लंबी जनसांख्यिकीय अवसर अवधि है।
  • यदि शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में पर्याप्त निवेश किया जाए, तो ये राज्य दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि हासिल कर सकते हैं।

2. मध्यवर्ती राज्य (Intermediate States)

तेलंगाना और उत्तराखंड जैसे राज्यों में कार्यशील आयु वर्ग की वृद्धि धीमी पड़ने लगी है।

  • इन राज्यों में जनसांख्यिकीय लाभ की अवधि संकुचित हो रही है।
  • समय पर नीतिगत हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है।

3. वृद्धावस्था की ओर बढ़ते राज्य (Ageing States)

केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य जनसांख्यिकीय मोड़ (Demographic Turning Point) को पार कर चुके हैं।

  • यहाँ कार्यशील आयु वर्ग की हिस्सेदारी घटने लगी है।
  • वृद्ध जनसंख्या का अनुपात लगातार बढ़ रहा है।

राज्य वित्त पर जनसांख्यिकीय परिवर्तन का प्रभाव

RBI की रिपोर्ट जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कई वित्तीय प्रभावों को उजागर करती है:

1. कर आधार का संकुचन

  • वृद्ध राज्यों में श्रमबल के घटने से दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि धीमी होती है। इसका सीधा प्रभाव कर संग्रह की क्षमता पर पड़ता है, जिससे राजस्व वृद्धि सीमित हो जाती है।

2. प्रतिबद्ध व्यय में वृद्धि

  • वृद्ध राज्यों में पेंशन और ब्याज भुगतान जैसे प्रतिबद्ध खर्चों का दबाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024–25 में वृद्ध राज्यों ने अपने सामाजिक क्षेत्र के व्यय का लगभग 30% केवल पेंशन पर खर्च किया, जिससे विकासात्मक व्यय के लिए संसाधन सीमित हो जाते हैं।

3. बढ़ती वित्तीय संवेदनशीलता

  • इन राज्यों में ऋण–GSDP अनुपात और राजस्व प्राप्तियों में ब्याज भुगतान का अनुपात अधिक पाया गया है, जिससे वे आर्थिक झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील बन जाते हैं।
  • वहीं दूसरी ओर, युवा राज्यों में यदि मानव पूंजी में निवेश नहीं किया गया, तो बेरोज़गारी, असंगठित क्षेत्र का विस्तार और सामाजिक अस्थिरता अंततः राज्य वित्त पर बोझ बढ़ा सकती है।

नीतिगत संकेत (Policy Imperatives)

RBI की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि एक समान नीति सभी राज्यों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती:

  • युवा राज्यों के लिए:

शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य में बड़े पैमाने पर निवेश अनिवार्य है ताकि युवा जनसंख्या को उत्पादक कार्यबल में बदला जा सके।

  • मध्यवर्ती राज्यों के लिए:

दोहरी रणनीति अपनानी होगी—

  1. शेष जनसांख्यिकीय लाभ का अधिकतम उपयोग
  2. भविष्य की वृद्धावस्था के लिए सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य ढांचे का निर्माण
  • वृद्ध राज्यों के लिए:

“सिल्वर इकोनॉमी” को बढ़ावा देना आवश्यक है, जिसमें

    • कार्य जीवन का विस्तार
    • जीवन प्रत्याशा के अनुरूप सेवानिवृत्ति आयु में संशोधन
    • बुज़ुर्गों के लिए लचीले कार्य अवसर शामिल हों।

निष्कर्ष

  • RBI की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत का जनसांख्यिकीय लाभ समयबद्ध और असमान रूप से वितरित है।
  • यदि राज्यों की नीतियाँ उनकी जनसंख्या संरचना के अनुरूप नहीं रहीं, तो वित्तीय असंतुलन गहराने की आशंका है। सतत विकास और मज़बूत राज्य वित्त के लिए जनसांख्यिकी-संवेदनशील नीतियाँ अनिवार्य होंगी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)

  • स्थापना: 1 अप्रैल 1935
  • मुख्यालय: मुंबई, महाराष्ट्र
  • कानूनी आधार: RBI अधिनियम, 1934
  • प्रथम गवर्नर: सर ऑसबोर्न स्मिथ
  • प्रथम भारतीय गवर्नर: सी. डी. देशमुख
  • प्रमुख कार्य:
    • मौद्रिक नीति का निर्माण व कार्यान्वयन
    • मुद्रा निर्गमन
    • बैंकों का विनियमन व पर्यवेक्षण
    • विदेशी मुद्रा प्रबंधन (FEMA)
    • सरकार का बैंकर
  • RBI की प्रमुख रिपोर्टें:
    • वार्षिक रिपोर्ट
    • मौद्रिक नीति रिपोर्ट
    • वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट
    • State Finances: A Study of Budgets

 

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