कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य
 
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कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य

Sat 24 Jan, 2026

संदर्भ :

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को ‘इको-सेंसिटिव जोन’ (ESZ) घोषित करने संबंधी अधिसूचना जारी किया।

मुख्य विवरण :

  • क्षेत्र: अभयारण्य की सीमा से 0 से 1 किलोमीटर तक का बफर जोन ESZ घोषित किया गया है।
  • कुल क्षेत्रफल: लगभग 243 वर्ग किलोमीटर।
  • प्रभावित गांव: राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों में कुल 94 गांव प्रभावित होंगे (जिनमें गोगुंडा तहसील के 23 गांव शामिल हैं)।
  • कानूनी आधार: यह अधिसूचना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत जारी की गई है।
  • पृष्ठभूमि: राजस्थान सरकार ने 2020 में ESZ प्रस्ताव भेजा था, और ड्राफ्ट अधिसूचना पिछले साल जारी हुई थी। अंतिम अधिसूचना अब लागू हो गई है।

कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य :

  • राज्य: राजस्थान
  • जिले: यह मुख्य रूप से राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों में फैला हुआ है
  • क्षेत्रफल: लगभग 610.5 वर्ग किलोमीटर
  • पर्वत श्रृंखला: यह अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों (कुंभलगढ़, सादड़ी, देसूरी और बोखड़ा रेंज) में स्थित है
  • इस अभयारण्य का नाम प्रसिद्ध कुंभलगढ़ दुर्ग के नाम पर रखा गया है, जो इसी परिसर के भीतर स्थित है।
  • यह किला यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल है और मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप की जन्मस्थली भी है।
  • वर्ष 1971 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया।
  • वन्यजीव :
  • स्तनधारी: तेंदुआ, भेड़िया, सुस्त भालू, धारीदार लकड़बग्घा, सियार, वाइल्ड कैट, साँभर, नीलगाय, चिंकारा, भारतीय पैंगोलिन और ‘इंडियन हेयर’।
  • पक्षियों में पेंटेड फ्रैंकोलिन, ग्रे वाइल्डफाउल, व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर तथा अनेक अन्य स्थायी और प्रवासी पक्षी प्रजातियाँ शामिल हैं।

इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) :

  • इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) वे क्षेत्र होते हैं जो संरक्षित क्षेत्रों (जैसे राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य) के आसपास अधिसूचित किए जाते हैं।

उद्देश्य :

  • संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बाहरी मानवीय दबाव से बचाना
  • मूल संरक्षित क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव को कम करना
  • नियंत्रित एवं सतत विकास को बढ़ावा देना
  • “शॉक एब्जॉर्बर” के रूप में कार्य करना

कानूनी आधार :

  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
  • अधिसूचना जारी करने वाली संस्था: MoEFCC
  • प्रेरणा स्रोत: राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (2002–2016)

ESZ की चौड़ाई :

  • कोई निश्चित मानक नहीं — स्थल-विशिष्ट
  • पारिस्थितिकी संवेदनशीलता और राज्य सरकारों से परामर्श पर आधारित
  • 10 किमी से कम या अधिक हो सकती है
  • सामान्यतः कम से कम 1 किमी का दायरा अनिवार्य

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