21 January, 2026
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य
Sat 24 Jan, 2026
संदर्भ :
- पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को ‘इको-सेंसिटिव जोन’ (ESZ) घोषित करने संबंधी अधिसूचना जारी किया।
मुख्य विवरण :
- क्षेत्र: अभयारण्य की सीमा से 0 से 1 किलोमीटर तक का बफर जोन ESZ घोषित किया गया है।
- कुल क्षेत्रफल: लगभग 243 वर्ग किलोमीटर।
- प्रभावित गांव: राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों में कुल 94 गांव प्रभावित होंगे (जिनमें गोगुंडा तहसील के 23 गांव शामिल हैं)।
- कानूनी आधार: यह अधिसूचना पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत जारी की गई है।
- पृष्ठभूमि: राजस्थान सरकार ने 2020 में ESZ प्रस्ताव भेजा था, और ड्राफ्ट अधिसूचना पिछले साल जारी हुई थी। अंतिम अधिसूचना अब लागू हो गई है।
कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य :
- राज्य: राजस्थान
- जिले: यह मुख्य रूप से राजसमंद, पाली और उदयपुर जिलों में फैला हुआ है
- क्षेत्रफल: लगभग 610.5 वर्ग किलोमीटर
- पर्वत श्रृंखला: यह अरावली पर्वतमाला की पहाड़ियों (कुंभलगढ़, सादड़ी, देसूरी और बोखड़ा रेंज) में स्थित है
- इस अभयारण्य का नाम प्रसिद्ध कुंभलगढ़ दुर्ग के नाम पर रखा गया है, जो इसी परिसर के भीतर स्थित है।
- यह किला यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल है और मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप की जन्मस्थली भी है।
- वर्ष 1971 में वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया गया।
- वन्यजीव :
- स्तनधारी: तेंदुआ, भेड़िया, सुस्त भालू, धारीदार लकड़बग्घा, सियार, वाइल्ड कैट, साँभर, नीलगाय, चिंकारा, भारतीय पैंगोलिन और ‘इंडियन हेयर’।
- पक्षियों में पेंटेड फ्रैंकोलिन, ग्रे वाइल्डफाउल, व्हाइट ब्रेस्टेड किंगफिशर तथा अनेक अन्य स्थायी और प्रवासी पक्षी प्रजातियाँ शामिल हैं।
इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) :
- इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) वे क्षेत्र होते हैं जो संरक्षित क्षेत्रों (जैसे राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य) के आसपास अधिसूचित किए जाते हैं।
उद्देश्य :
- संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को बाहरी मानवीय दबाव से बचाना
- मूल संरक्षित क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव को कम करना
- नियंत्रित एवं सतत विकास को बढ़ावा देना
- “शॉक एब्जॉर्बर” के रूप में कार्य करना
कानूनी आधार :
- पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986
- अधिसूचना जारी करने वाली संस्था: MoEFCC
- प्रेरणा स्रोत: राष्ट्रीय वन्यजीव कार्य योजना (2002–2016)
ESZ की चौड़ाई :
- कोई निश्चित मानक नहीं — स्थल-विशिष्ट
- पारिस्थितिकी संवेदनशीलता और राज्य सरकारों से परामर्श पर आधारित
- 10 किमी से कम या अधिक हो सकती है
- सामान्यतः कम से कम 1 किमी का दायरा अनिवार्य









