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पैक्स सिलिका पहल

Wed 21 Jan, 2026

पैक्स सिलिका पहल

पैक्स सिलिका (Pax Silica) पहल एक उभरता हुआ बहुपक्षीय ढांचा है, जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और दुर्लभ मृदा तत्वों (REEs) से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करना है। यह पहल उस समय वैश्विक चर्चा में आई, जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने 12 दिसंबर 2025 को पहला Pax Silica शिखर सम्मेलन आयोजित किया। इसका केंद्रबिंदु था—निर्भरताओं को कम करना, वैश्विक टेक/AI आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित बनाना और विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना का निर्माण।

“Pax Silica” शब्द Pax (लैटिन में ‘शांति’) और Silica (चिप निर्माण में प्रयुक्त प्रमुख यौगिक) से मिलकर बना है। यह इस विचार को दर्शाता है कि नई प्रौद्योगिकियों की स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति शृंखलाएँ ही 21वीं सदी में शांति और समृद्धि का आधार होंगी। Pax Silica घोषणा-पत्र में तीन प्रमुख लक्ष्य रेखांकित किए गए—

  1. निर्भरताओं को घटाना,
  2. वैश्विक टेक/AI आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करना, और
  3. विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना (digital infrastructure) का निर्माण।

 

Pax Silica का महत्व

  • वैश्विक अर्थव्यवस्था एक संरचनात्मक परिवर्तन से गुजर रही है। जहाँ एक ओर उत्तर–दक्षिण आय और संसाधन उपयोग का अंतर बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर सेमीकंडक्टर और AI जैसी उभरती तकनीकें आर्थिक शक्ति के नए चालक बन चुकी हैं। ये तकनीकें स्वास्थ्य, वित्त, रक्षा, लॉजिस्टिक्स और शासन सहित रोज़मर्रा के जीवन के अनेक पहलुओं को प्रभावित करती हैं।
  • इन उन्नत तकनीकों की निर्भरता REEs और जटिल वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं पर है। चीन का REEs के खनन और प्रसंस्करण में वर्चस्व कई देशों के लिए रणनीतिक जोखिम बन गया है। हाल के वर्षों में चीन ने आपूर्ति शृंखलाओं को भू-राजनीतिक साधन की तरह इस्तेमाल किया है। भारत ने भी दुर्लभ-मृदा मैग्नेट्स के आयात में बाधाओं का अनुभव किया, जिससे ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग प्रभावित हुए। कोविड-19 महामारी ने भी एकल-देश पर अत्यधिक निर्भर आपूर्ति शृंखलाओं की सीमाएँ उजागर कीं। इसी पृष्ठभूमि में Pax Silica को रणनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।

सदस्यता और रणनीतिक संरचना

Pax Silica में ऐसे देश शामिल हैं जिनकी तकनीकी क्षमताएँ एक-दूसरे की पूरक हैं—

  • अमेरिका और जापान: वैश्विक तकनीकी नेतृत्व
  • ऑस्ट्रेलिया: लिथियम का प्रमुख निर्यातक और REEs भंडार
  • नीदरलैंड्स: उन्नत लिथोग्राफी तकनीक (ASML)
  • दक्षिण कोरिया: मेमोरी चिप निर्माण में अग्रणी
  • सिंगापुर: वैश्विक चिप निर्माण नेटवर्क का पुराना केंद्र
  • इज़राइल: AI सॉफ्टवेयर, रक्षा तकनीक और साइबर सुरक्षा
  • यूनाइटेड किंगडम: विश्व का तीसरा सबसे बड़ा AI बाज़ार
  • क़तर और UAE: बड़े निवेश कोष और AI-आधारित अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षा

कनाडा, यूरोपीय संघ, OECD और ताइवान पर्यवेक्षक के रूप में शामिल हुए, जो भविष्य में विस्तार की संभावना दिखाता है।

 

भारत की स्थिति: अवसर और सीमाएँ

  • भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मजबूत है और AI बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है।
  • सरकार ने सेमीकंडक्टर और AI मिशन बड़े वित्तीय प्रावधानों के साथ शुरू किए हैं।
  • टाटा समूह और Micron जैसे निवेशकों की भागीदारी से घरेलू क्षमता बन रही है।
  • अमेरिका में प्रशिक्षित उच्च-कौशल मानव संसाधन भारत के लिए दीर्घकालिक संपत्ति बन सकता है।
  • जापान, सिंगापुर और इज़राइल जैसे Pax Silica सदस्यों के साथ पहले से सहयोग मौजूद है।

चुनौतियाँ

भारत पहला विकासशील देश और पहला गैर-अमेरिकी-मित्र (पर रणनीतिक साझेदार) होगा जो Pax Silica में शामिल होगा। इससे अपेक्षा-अंतर (expectation gap) पैदा हो सकता है—

  • अमेरिका की भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं से तालमेल,
  • निर्यात नियंत्रण ढाँचे,
  • सब्सिडी, सरकारी खरीद और आयात विनियमन जैसे औद्योगिक नीतिगत उपाय।

भारत के लिए रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना केंद्रीय चिंता होगी।

भू-राजनीतिक और आर्थिक निहितार्थ

  • Pax Silica से संकेत मिलता है कि भविष्य में दो समानांतर वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ उभर सकती हैं—एक चीन-केंद्रित और दूसरी Pax Silica-केंद्रित।
  • चीन ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं की विकासात्मक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई है। पश्चिमी तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र के साथ भारत के दीर्घकालिक सहयोग को देखते हुए, भारत का झुकाव Pax Silica की ओर हो सकता है—पर संतुलित और चरणबद्ध तरीके से।

निष्कर्ष

  • Pax Silica वैश्वीकरण से रणनीतिक परस्पर-निर्भरता की ओर बदलाव को दर्शाता है, जहाँ आपूर्ति शृंखलाएँ केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक भी हैं।
  • भारत के लिए यह पहल AI और सेमीकंडक्टर लक्ष्यों को गति दे सकती है—बशर्ते नीतिगत स्वायत्तता और विकासात्मक प्राथमिकताओं की रक्षा हो।

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