15 January, 2026
BRICS नौसैनिक सैन्य अभ्यास – दक्षिण अफ्रीका नेतृत्वित ‘Will for Peace 2026’
Sun 18 Jan, 2026
हाल ही में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि “Will for Peace 2026” नामक नौसैनिक अभ्यास BRICS का आधिकारिक या संस्थागत कार्यक्रम नहीं था। यह अभ्यास दक्षिण अफ्रीका की एक स्वतंत्र राष्ट्रीय पहल के रूप में आयोजित किया गया था। यह स्पष्टीकरण BRICS के हालिया विस्तार, वैश्विक भू-राजनीतिक संदर्भ और भारत की संतुलित कूटनीतिक नीति के दृष्टिगत अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पृष्ठभूमि
- “Will for Peace 2026” एक सप्ताह-भर का नौसैनिक अभ्यास था, जो दक्षिण अफ्रीका के जलक्षेत्र में आयोजित हुआ। इसमें चीन, रूस, ईरान, मिस्र, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की नौसेनाओं ने भाग लिया। यद्यपि दक्षिण अफ्रीका BRICS का सदस्य है, फिर भी यह अभ्यास BRICS मंच के अंतर्गत आयोजित नहीं था। भारत और ब्राज़ील—दोनों BRICS सदस्य—ने इसमें भाग नहीं लिया।
- भारत ने यह भी रेखांकित किया कि भारत-ब्राज़ील-दक्षिण अफ्रीका के साथ उसकी नियमित और संरचित समुद्री सहभागिता IBSAMAR नौसैनिक अभ्यास के माध्यम से होती है। इस प्रकार, भारत ने किसी ऐड-हॉक बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास और औपचारिक बहुपक्षीय मंच के बीच स्पष्ट अंतर स्थापित किया।
- भारत और ब्राज़ील के बाहर रहने के कारण
- भारत का बाहर रहना उसकी उस दीर्घकालिक नीति के अनुरूप है जिसके अनुसार BRICS कोई सैन्य/सुरक्षा गठबंधन नहीं है। ऐसे समय में—जब वैश्विक तनाव अधिक हैं—ईरान और रूस जैसे देशों की भागीदारी वाले अभ्यास में शामिल होना भारत की रणनीतिक स्थिति के बारे में गलत संकेत दे सकता था।
भारत के निर्णय के तीन प्रमुख आधार रहे:
- रणनीतिक स्वायत्तता—किसी सैन्य गुट में न बंधना।
- मुद्दा-आधारित सहभागिता—IBSAMAR जैसे स्पष्ट और स्थापित मंचों को प्राथमिकता।
- BRICS का असैन्य चरित्र—आर्थिक सहयोग, विकास वित्त, वैश्विक शासन सुधार और दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर केंद्रित।
ब्राज़ील का बाहर रहना भी BRICS के भीतर सुरक्षा विषयों पर विविध दृष्टिकोण को दर्शाता है।
BRICS के लिए निहितार्थ
- यह प्रकरण स्पष्ट करता है कि BRICS के पास कोई संस्थागत सैन्य आयाम नहीं है। NATO या QUAD के विपरीत, BRICS एक ढीला-ढाला समन्वय मंच है, जहाँ सदस्य देशों की रक्षा-सुरक्षा प्राथमिकताएँ अलग-अलग हैं। हालिया विस्तार से BRICS अधिक विविध तो हुआ है, पर सर्वसम्मति बनाना और जटिल हो गया है।
- भारत की स्पष्टता BRICS को विकास-केंद्रित और सुधारोन्मुख मंच के रूप में बनाए रखने में सहायक है और इसे किसी भू-राजनीतिक सैन्य ब्लॉक के रूप में देखे जाने से रोकती है।
2026 में भारत की भूमिका
भारत ने 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभाली है और 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। भारत के एजेंडे में अपेक्षित प्राथमिकताएँ हैं—
- वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार
- दक्षिण-दक्षिण सहयोग का सुदृढ़ीकरण
- समावेशी व सतत विकास
- प्रौद्योगिकी सहयोग व डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना
अघोषित सैन्य गतिविधियों से दूरी बनाकर भारत BRICS की विश्वसनीयता, तटस्थता और एकजुटता बनाए रखना चाहता है।
निष्कर्ष
- दक्षिण अफ्रीका नेतृत्वित “Will for Peace 2026” ने BRICS की सुरक्षा-सीमाओं को रेखांकित किया। भारत की कूटनीतिक स्पष्टता रणनीतिक स्वायत्तता, नियम-आधारित बहुपक्षवाद और BRICS के असैन्य स्वरूप के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को पुष्ट करती है। विस्तार के इस दौर में, ऐसी स्पष्टता BRICS की एकता के लिए आवश्यक है।
BRICS
| प्रकृति | उभरती अर्थव्यवस्थाओं का अंतर-सरकारी संगठन |
| उद्देश्य | दक्षिण-दक्षिण सहयोग, वैश्विक शासन में सुधार |
| मूल सदस्य | ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन (2006); दक्षिण अफ्रीका (2010) |
| नए सदस्य (1 जनवरी 2024) | मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE |
| नवीनतम सदस्य | इंडोनेशिया (6 जनवरी 2025) |
| पार्टनर-कंट्री श्रेणी | 2024 में शुरू |
| वर्तमान पार्टनर | बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कज़ाख़स्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान, वियतनाम |
| 2025 अध्यक्षता | ब्राज़ील |
| 2025 थीम | “समावेशी व सतत शासन हेतु वैश्विक दक्षिण सहयोग को सुदृढ़ करना” |
| 2026 अध्यक्षता | भारत |
| 2026 प्रमुख कार्यक्रम | 18वाँ BRICS शिखर सम्मेलन (भारत में) |









