15 January, 2026
जापान–भारत AI रणनीतिक संवाद
Sat 17 Jan, 2026
भारत और जापान ने हाल ही में जापान–भारत AI रणनीतिक संवाद (Japan–India AI Strategic Dialogue) की औपचारिक शुरुआत की है। यह पहल दोनों देशों के बीच उभरती प्रौद्योगिकियों, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) के क्षेत्र में सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृष्ठभूमि
- भारत और जापान के बीच संबंधों की नींव साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन तथा मुक्त, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक की साझा दृष्टि पर आधारित है। समय के साथ यह संबंध केवल आर्थिक और कूटनीतिक दायरे तक सीमित न रहकर अब रणनीतिक, रक्षा, अवसंरचना और प्रौद्योगिकी तक विस्तृत हो चुके हैं।
- वैश्विक स्तर पर AI को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा, डेटा सुरक्षा, नैतिकता और तकनीकी वर्चस्व से जुड़ी चिंताओं के बीच भारत और जापान ने यह महसूस किया कि AI के वैश्विक नियम और मानक लोकतांत्रिक साझेदारियों के माध्यम से तय किए जाने चाहिए।
AI रणनीतिक संवाद के प्रमुख उद्देश्य
इस संवाद का उद्देश्य AI क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करना है। इसके प्रमुख लक्ष्य हैं:
- AI नीति एवं शासन (AI Governance) पर समन्वय
- नैतिक एवं मानव-केंद्रित AI के लिए साझा ढाँचा विकसित करना
- संयुक्त अनुसंधान एवं नवाचार, जहाँ भारत की IT क्षमता और जापान की रोबोटिक्स एवं हार्डवेयर विशेषज्ञता का समन्वय हो
- मानव संसाधन विकास, कौशल आदान-प्रदान और शैक्षणिक सहयोग
- औद्योगिक सहयोग, विशेषकर स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, स्वास्थ्य, फिनटेक, जलवायु मॉडलिंग और आपदा प्रबंधन में
रणनीतिक महत्व
- भारत के लिए यह संवाद डिजिटल इंडिया, IndiaAI मिशन, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों को मजबूती देता है। जापान का तकनीकी अनुभव और निवेश भारत को वैश्विक AI हब बनने की दिशा में सहायता प्रदान कर सकता है।
- जापान के लिए भारत एक विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार, विशाल बाजार और कुशल मानव संसाधन वाला देश है। भारत के साथ सहयोग से जापान को आपूर्ति-श्रृंखला विविधीकरण और भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।
वैश्विक एवं भू-राजनीतिक प्रभाव
- यह संवाद केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। यह सत्तावादी तकनीकी मॉडल के विकल्प के रूप में लोकतांत्रिक, पारदर्शी और उत्तरदायी AI शासन को बढ़ावा देता है।
- यह पहल क्वाड (Quad) जैसे मंचों के अंतर्गत उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग को भी पूरक करती है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता में योगदान देती है।
चुनौतियाँ
हालाँकि, कुछ चुनौतियाँ भी मौजूद हैं:
- डेटा संरक्षण कानूनों में अंतर
- AI तक असमान पहुँच (डिजिटल डिवाइड)
- वास्तविक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सुनिश्चित करना
इन चुनौतियों से निपटने के लिए दीर्घकालिक राजनीतिक प्रतिबद्धता और निजी क्षेत्र की भागीदारी आवश्यक होगी।
भारत–जापान ऐतिहासिक संबंध (संक्षेप में)
- 1952: भारत-जापान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित
- भारत ने जापान के साथ शांति संधि पर हस्ताक्षर किए
- 2000: संबंधों को Global Partnership का दर्जा
- 2014: नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में Special Strategic and Global Partnership
- सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:
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- अवसंरचना (बुलेट ट्रेन, DMIC)
- रक्षा एवं सुरक्षा (2+2 संवाद)
- आर्थिक सहयोग और ODA









