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'परम शक्ति' सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन

Wed 14 Jan, 2026

संदर्भ :

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा IIT मद्रास में 'परम शक्ति' (Param Shakti) सुपरकंप्यूटर का उद्घाटन किया, जो भारत के राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के तहत एक बड़ी उपलब्धि है।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • यह सुपरकंप्यूटर राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) के दूसरे चरण के अंतर्गत स्थापित किया गया है।
  • यह मिशन संयुक्त रूप से MeitY और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संचालित किया जा रहा है और इसका क्रियान्वयन C-DAC (सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग) और IISc द्वारा किया जाता है।
  • उद्घाटनकर्ता: एस. कृष्णन (S. Krishnan), सचिव, MeitY

तकनीकी विशिष्टताएँ (Technical Specifications) :

  • प्रदर्शन क्षमता: इसकी कंप्यूटिंग क्षमता पेटाफ्लॉप्स (Petaflops) स्केल में है, जो इसे भारत के सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर्स की श्रेणी में रखता है।
  • निर्माण: यह 'मेड इन इंडिया' पहल का हिस्सा है, जिसे C-DAC द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और असेंबल किया गया है। इसमें स्वदेशी रूप से विकसित सॉफ्टवेयर स्टैक का उपयोग किया गया है।
  • बुनियादी ढांचा: इसे IIT मद्रास के एक अत्याधुनिक डेटा सेंटर में स्थापित किया गया है, जिसमें कुशल कूलिंग सिस्टम और उच्च-शक्ति बैकअप की व्यवस्था है।
  • कुशलता: इसमें 1.2 से 1.4 का पावर यूसेज एफेक्टिवनेस (PUE) है, जो इसे अत्यंत ऊर्जा-कुशल बनाता है
  • क्षमता: यह 3.1 पेटाफ्लॉप प्रणाली है, जो प्रति सेकंड 3.1 क्वाड्रिलियन से अधिक गणनाएँ कर सकती है।

NSM का संदर्भ :

  • NSM के तहत देशभर में अब तक 37 सुपरकंप्यूटर (कुल ~39 पेटाफ्लॉप्स क्षमता) स्थापित हो चुके हैं (नवंबर 2025 तक)
  • Param Shakti इसका 37वाँ सिस्टम है
  • IIT बॉम्बे और IIT दिल्ली के सिस्टम से क्षमता में लगभग बराबर
  • आगे बड़े सिस्टम (जैसे बेंगलुरु में सबसे बड़ा) आने वाले हैं
  • कुल मिलाकर भारत एक्सास्केल (Exascale) कंप्यूटिंग की ओर तेजी से बढ़ रहा है

प्रमुख अनुप्रयोग और उपयोग (Key Applications) :

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग: जटिल AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए।
  • मौसम विज्ञान: सटीक मौसम पूर्वानुमान और जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए।
  • स्वास्थ्य सेवा: ड्रग डिस्कवरी (दवाओं की खोज) और जीनोमिक्स अनुसंधान में बड़े डेटा विश्लेषण के लिए।
  • इंजीनियरिंग और डिजाइन: विमानन, ऑटोमोबाइल और रक्षा प्रणालियों के जटिल सिमुलेशन के लिए।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग: क्वांटम एल्गोरिदम के परीक्षण और सिमुलेशन के लिए एक मंच के रूप में।

शैक्षणिक और रणनीतिक महत्व :

  • शोधकर्ताओं के लिए वरदान: यह IIT मद्रास के छात्रों और संकाय के साथ-साथ पड़ोसी शैक्षणिक संस्थानों के शोधकर्ताओं को भी उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग सुविधा प्रदान करेगा।
  • आत्मनिर्भर भारत: विदेशी सुपरकंप्यूटिंग तकनीकों पर निर्भरता कम करके, भारत ने उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) के क्षेत्र में अपनी संप्रभुता मजबूत की है।
  • वैश्विक रैंकिंग: ऐसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर्स की स्थापना से भारत की स्थिति 'TOP500' वैश्विक सुपरकंप्यूटिंग सूची में और बेहतर होने की संभावना है।

IndiaAI मिशन से जुड़ाव :

  • सरकार एक ही तकनीक/हार्डवेयर पर निर्भरता नहीं चाहती, इसलिए अलग-अलग GPU आर्किटेक्चर को बढ़ावा दे रही है। यह विविधता AI इकोसिस्टम को मजबूत और लचीला बनाती है।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM)

  • भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है
  • शुरुआत : 2015
  • उद्देश्य: भारत में सुपरकंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे का एक विशाल नेटवर्क स्थापित करना और वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं तथा संस्थानों को उच्च-क्षमता वाली कंप्यूटिंग (HPC) सुविधाएं प्रदान करना।
  • संचालन: यह मिशन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है।

मिशन के मुख्य चरण (Phases) :

  • चरण 1: सुपरकंप्यूटर्स के पुर्जों को बाहर से लाकर भारत में असेंबल करना।
  • चरण 2: भारत में ही मुख्य घटकों (जैसे मदरबोर्ड) का निर्माण और असेंबली करना।
  • चरण 3: पूरी तरह से स्वदेशी रूप से सुपरकंप्यूटर का डिजाइन और निर्माण करना

प्रमुख सुपरकंप्यूटर और उनकी स्थापना :

  • परम शिवाय: IIT (BHU) वाराणसी (पहला सुपरकंप्यूटर)
  • परम शक्ति: IIT खड़गपुर और हाल ही में IIT मद्रास
  • परम ब्रह्मा: IISER पुणे
  • परम सिद्धि-AI: भारत का सबसे तेज एआई सुपरकंप्यूटर (C-DAC पुणे)
  • परम कामरूप: IIT गुवाहाटी
  • परम अनंत: IIT गांधीनग
  • स्वदेशी विकास: 'रुद्र' (Rudra) : NSM के तहत भारत ने अपना स्वदेशी सर्वर प्लेटफॉर्म 'रुद्र' (Rudra) विकसित किया है। यह 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि अब भारत सुपरकंप्यूटिंग के लिए आवश्यक सर्वर नोड्स खुद डिजाइन कर रहा है।

सुपरकंप्यूटिंग के उपयोग (Applications) :

  • मौसम का पूर्वानुमान: मानसून और चक्रवात की सटीक भविष्यवाणी।
  • ड्रग डिस्कवरी: नई दवाओं और टीकों की खोज (जैसे कोविड-19 के दौरान उपयोग)।
  • बाढ़ प्रबंधन: शहरों के लिए बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली बनाना।
  • जेनेटिक्स: मानव जीनोम अनुक्रमण (Genome Sequencing)।
  • रक्षा: मिसाइल सिमुलेशन और एयरोस्पेस डिजाइन।

मार्च 2026 तक का लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक 90 पेटाफ्लॉप्स (PF) की कुल कंप्यूटिंग क्षमता स्थापित करना है।

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC)

  • भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत एक प्रमुख अनुसंधान और विकास (R&D) संस्था है
  • इसे भारत में सुपरकंप्यूटिंग क्रांति का जनक माना जाता है।
  • स्थापना: 1988
  • कारण: 1980 के दशक के उत्तरार्ध में जब अमेरिका ने भारत को 'क्रे' (Cray) सुपरकंप्यूटर देने से मना कर दिया था, तब भारत ने स्वदेशी सुपरकंप्यूटर बनाने के लक्ष्य के साथ C-DAC की स्थापना की थी।
  • मुख्यालय: पुणे, महाराष्ट्र

प्रमुख उपलब्धियां (सुपरकंप्यूटिंग) :

  • परम 8000 (PARAM 8000): 1991 में C-DAC ने भारत का पहला स्वदेशी सुपरकंप्यूटर बनाया।
  • परम सिद्धि-AI: यह भारत का सबसे तेज़ AI सुपरकंप्यूटर है, जिसने वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
  • राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): C-DAC इस मिशन का मुख्य कार्यान्वयनकर्ता है, जिसके तहत देशभर के IITs और NITs में सुपरकंप्यूटर्स (जैसे परम शक्ति, परम कामरूप) स्थापित किए जा रहे हैं।

कार्य के प्रमुख क्षेत्र (Key Focus Areas) :

  • C-DAC केवल सुपरकंप्यूटिंग तक सीमित नहीं है, इसके कार्यक्षेत्र बहुत व्यापक हैं:
  • बहुभाषी कंप्यूटिंग (GIST): भारतीय भाषाओं में टाइपिंग और सॉफ्टवेयर (जैसे- ISM) विकसित करना।
  • साइबर सुरक्षा: ई-प्रमाण (e-Pramaan) और अन्य सुरक्षा टूल बनाना।
  • स्वास्थ्य सेवा (e-Sanjeevani): भारत की प्रमुख टेलीमेडिसिन सेवा 'ई-संजीवनी' C-DAC द्वारा ही विकसित की गई है।
  • शिक्षा और प्रशिक्षण: ACTS (Advanced Computing Training School) के माध्यम से छात्रों को उच्च-स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण देना।

प्रमुख केंद्र :

  • पुणे के अलावा C-DAC के केंद्र बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता, तिरुवनंतपुरम, और मोहाली जैसे शहरों में स्थित हैं, जो अलग-अलग तकनीकी विशेषज्ञता (जैसे साइबर सुरक्षा या वीएलएसआई डिजाइन) पर काम करते हैं।

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