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IRENA की सभा का 16वां सत्र

Tue 13 Jan, 2026

संदर्भ :

  • अंतर्राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की सभा का 16वां सत्र 10 से 12 जनवरी, 2026 तक अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित किया गया।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • थीम : "मानवता को ऊर्जा प्रदान करना: साझा समृद्धि के लिए नवीकरणीय ऊर्जा"
  • प्रतिभागी: 139 देशों के मंत्रियों और अधिकारियों सहित 1,500 से अधिक प्रतिनिधि
  • अध्यक्षता: इस सत्र की अध्यक्षता डोमिनिकन गणराज्य (Dominican Republic) द्वारा की गई
  • चर्चा के विषय: ऊर्जा संक्रमण को तेज करने की रणनीतियाँ, ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन, ऊर्जा ग्रिड, डिजिटल नवाचार और वित्तपोषण
  • भारत का पक्ष: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भारत के 2025 तक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के 50% लक्ष्य को प्राप्त करने और ऊर्जा भंडारण, ग्रिड आधुनिकीकरण पर जोर देने की बात कही
  • महत्व: यह वर्ष का पहला प्रमुख वैश्विक ऊर्जा सम्मेलन था और अबू धाबी सस्टेनेबिलिटी वीक (ADSW) की शुरुआत भी थी

मुख्य बिंदु और चर्चाएँ :

  • वैश्विक लक्ष्य की समीक्षा: COP28 में तय किए गए "2030 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता को तीन गुना करने" के लक्ष्य की प्रगति की समीक्षा की गई।
  • AI और डिजिटल नवाचार: पहली बार ऊर्जा संक्रमण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका पर गहन चर्चा हुई। यह देखा गया कि AI कैसे ग्रिड प्रबंधन और ऊर्जा दक्षता को बेहतर बना सकता है।
  • वित्तीय सहायता: विकासशील देशों, विशेष रूप से अफ्रीका और छोटे द्वीप देशों (SIDS) के लिए रियायती वित्त (Concessional Finance) और निवेश जुटाने पर जोर दिया गया।
  • सतत विमानन ईंधन (SAF): विमानन क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने के लिए हाइड्रोजन और अन्य हरित ईंधन पर चर्चा की गई।
  • अबू धाबी स्थिरता सप्ताह (ADSW): यह सभा 'अबू धाबी सस्टेनेबिलिटी वीक 2026' के आधिकारिक उद्घाटन का प्रतीक भी बनी।

भारत की भागीदारी :

  • भारत ने इस सम्मेलन में अपनी 'अक्षय ऊर्जा' उपलब्धियों को साझा किया और 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांत के तहत वैश्विक सहयोग का आह्वान किया।
  • भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) और सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के नेतृत्व पर प्रकाश डाला।
  • केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन स्थापित विद्युत क्षमता हासिल करने और 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया
  • जोशी ने बताया कि भारत ने पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्य से पांच साल पहले ही 2025 में गैर-जीवाश्म ईंधन स्त्रोतों से अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत हासिल कर लिया है।
  • भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 266 गीगावॉट से अधिक हो गई है, जिससे देश नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।

भारत की ऊर्जा उपलब्धि

  • भारत ने वर्ष 2025 में अपनी कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों (नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा) से प्राप्त कर लिया है, जो पेरिस समझौते के तहत राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) और COP26 में घोषित 'पंचामृत' लक्ष्यों में से एक का हिस्सा है।
  • भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वर्ष 2025 में अभूतपूर्व उपलब्धि प्राप्‍त की, जब गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता बढ़कर 266.78 गीगावाट हो गई।
  • यह वृद्धि वर्ष 2024 की तुलना में 22.6 प्रतिशत अधिक है।
  • वर्ष 2024 में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता 217.62 गीगावाट थी।
  • वर्ष के दौरान गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा में 49.12 गीगावाट की हुई है।

सौर ऊर्जा :

  • सौर ऊर्जा ने नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार में अग्रणी भूमिका निभाई।
  • 2024 में क्षमता: 97.86 GW
  • 2025 में क्षमता: 135.81 GW
  • वृद्धि: 38.8%
  • पवन ऊर्जा : पवन ऊर्जा क्षमता 48.16 GW से बढ़कर 54.51 GW हो गई, यानी 13.2% की वृद्धि
  • ऊर्जा विविधीकरण में जैव ऊर्जा की भूमिका : जैव ऊर्जा की स्थापित क्षमता 11.61 GW तक पहुँच गई, जिसमें 0.55 GW अपशिष्ट-से-ऊर्जा (Waste-to-Energy) ऑफ-ग्रिड परियोजनाओं से प्राप्त हुई।

पंचामृत लक्ष्य :

  • पंचामृत लक्ष्य भारत की जलवायु परिवर्तन रणनीति के पांच प्रमुख प्रतिबद्धताएं हैं, जो नवंबर 2021 में COP26 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए गए।
  • ये लक्ष्य 2030 तक गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता बढ़ाने, उत्सर्जन कम करने और 2070 तक नेट जीरो प्राप्त करने पर केंद्रित हैं।

पंचामृत :

  • 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता: भारत 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-fossil fuel) आधारित ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट (GW) तक पहुंचाएगा।
  • 50% अक्षय ऊर्जा निर्भरता: 2030 तक भारत अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन, जल विद्युत आदि) से पूरा करेगा।
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी: अब से लेकर 2030 तक भारत अपने कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन (100 करोड़ टन) की कमी करेगा।
  • कार्बन तीव्रता में कमी: 2030 तक भारत अपनी अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता (Carbon Intensity) को 45% से अधिक कम करेगा।
  • नेट जीरो (Net Zero) लक्ष्य: भारत वर्ष 2070 तक 'नेट जीरो' (शुद्ध शून्य उत्सर्जन) का लक्ष्य हासिल कर लेगा।

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