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बायो-बिटुमेन का उत्पादन करने वाला विश्‍व का प्रथम देश

Sun 11 Jan, 2026

संदर्भ :

  • भारत व्यावसायिक स्तर पर बायो-बिटुमेन का उत्पादन करने वाला विश्‍व का प्रथम देश बन गया है।

बायो-बिटुमेन :

  • बायो-बिटुमेन एक पर्यावरण-अनुकूल (eco-friendly) विकल्प है जो पारंपरिक पेट्रोलियम-आधारित बिटुमेन की जगह सड़क निर्माण में इस्तेमाल होता है। यह मुख्य रूप से कृषि अवशेषों (जैसे धान की पराली, गन्ने की खोई, चावल की भूसी आदि) से बनाया जाता है।

उत्पादन प्रक्रिया (मुख्य रूप से CSIR-IIP द्वारा विकसित):

  • पायरोलिसिस (Pyrolysis): बायोमास को 400-500°C पर ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में गर्म करके बायो-ऑयल निकाला जाता है।
  • अपग्रेडिंग (Upgrading): हाइड्रोडिऑक्सीजनेशन या अन्य प्रक्रियाओं से अशुद्धियाँ हटाकर इसे बिटुमेन जैसी विशेषताएँ (viscosity, thermal stability, durability) दी जाती हैं।
  • ब्लेंडिंग — इसे सामान्य बिटुमेन के साथ 20-30% (कुछ मामलों में 10-50%) तक मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है, जो BIS मानकों (IS 73:2018) पर खरा उतरता है।
  • यह तकनीक CSIR-Indian Institute of Petroleum (IIP), Dehradun और CSIR-Central Road Research Institute (CRRI), New Delhi ने मिलकर 5 साल की रिसर्च के बाद विकसित की। पेटेंट फाइल किया जा चुका है और कई इंडस्ट्रीज को लाइसेंस दिए जा रहे हैं।

प्रमुख फायदे (विश्लेषण) :

1. पर्यावरणीय लाभ

  • 60-70% तक कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पारंपरिक बिटुमेन की तुलना में।
  • पराली जलाने की समस्या का समाधान — खासकर पंजाब, हरियाणा, UP में जहाँ हर साल लाखों टन पराली जलती है, जिससे दिल्ली-NCR में जहरीली हवा बनी रहती है।
  • वेस्ट टू वेल्थ और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा।

2. आर्थिक लाभ

  • भारत सालाना ~5 मिलियन टन बिटुमेन की जरूरत रखता है, जिसमें से 40-50% आयात करता है (लागत ₹25,000-30,000 करोड़ विदेशी मुद्रा)।
  • सिर्फ 15% ब्लेंडिंग से ₹4,500 करोड़ की बचत संभव।
  • लंबे समय में सड़कें सस्ती और ज्यादा टिकाऊ (कम मेंटेनेंस, बेहतर rutting/cracking resistance)।
  • किसानों के लिए अतिरिक्त आय — पराली अब कचरा नहीं, बल्कि मूल्यवान संसाधन।

3. ऊर्जा आत्मनिर्भरता (Atmanirbhar Bharat)

  • आयात निर्भरता कम होगी।
  • Viksit Bharat 2047 और Net-Zero लक्ष्यों की दिशा में बड़ा कदम।

4. तकनीकी स्थिति

  • कई देशों (नीदरलैंड्स - lignin based, UK, US) में पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, लेकिन कमर्शियल स्केल पर उत्पादन करने वाला भारत पहला देश है।
  • पहले से ही 100 मीटर ट्रायल Meghalaya के NH-40 पर सफल।
  • 2027 तक 1,000 किमी पायलट सड़कें बनाने की योजना।
  • भविष्य में 100% बायो-बिटुमेन, algae/wood-based, और एक्सट्रीम क्लाइमेट वर्जन पर रिसर्च जारी।

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