15 December, 2025
जिला-आधारित वस्त्र परिवर्तन पहल की शुरूआत
Sat 10 Jan, 2026
संदर्भ :
- वस्त्र मंत्रालय ने जिला-आधारित वस्त्र परिवर्तन पहल की शुरूआत की, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के प्रत्येक जिले को एक स्वतंत्र कपड़ा निर्यात हब के रूप में विकसित करना है।
मुख्य बिन्दु :
- शुभारंभ अवसर : वस्त्र मंत्रियों के राष्ट्रीय सम्मेलन, गुवाहाटी में
- महत्व : यह पहल भारत के वस्त्र क्षेत्र को 'Local to Global' बनाने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है
- मुख्य उद्देश्य : जिले को एक प्रशासनिक इकाई के बजाय एक 'आर्थिक क्लस्टर' के रूप में विकसित करना
जिलों का रणनीतिक वर्गीकरण :
मंत्रालय ने जिलों की क्षमता के आधार पर उन्हें दो विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित किया है:
| श्रेणी | लक्ष्य (संख्या) | मुख्य रणनीति | फोकस क्षेत्र |
| चैंपियन जिले | 100 | Scale & Refinement (विस्तार और सुधार) | मेगा कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFCs), इंडस्ट्री 4.0 तकनीक, और डायरेक्ट एक्सपोर्ट लिंक। |
| आकांक्षी जिले | 100 | Foundation & Formalization (नींव और औपचारिकीकरण) | बुनियादी कौशल, कच्चे माल के बैंक, SHG का सुदृढ़ीकरण और इकोसिस्टम निर्माण। |
पहल के प्रमुख स्तंभ (Key Pillars) :
- समावेशी विकास: पूर्वोत्तर राज्यों और जनजातीय क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जिससे क्षेत्रीय असंतुलन दूर होगा।
- सांस्कृतिक संरक्षण: जीआई (GI) टैगिंग के माध्यम से स्थानीय हस्तशिल्प को वैश्विक पहचान दिलाना।
- औपचारिकीकरण: ग्रामीण और असंगठित कार्यबल को औपचारिक अर्थव्यवस्था (Formal Economy) का हिस्सा बनाना।
आर्थिक और सामाजिक महत्व :
- जीडीपी में योगदान: वर्तमान में वस्त्र क्षेत्र का जीडीपी में 2.3% योगदान है, जिसे यह पहल और गति देगी।
- रोजगार सृजन: कृषि के बाद यह सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। यह योजना विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण (क्योंकि वस्त्र क्षेत्र में 60-70% महिलाएं हैं) और ग्रामीण आजीविका के लिए गेम-चेंजर होगी।
- वैश्विक रैंकिंग: भारत फिलहाल छठा सबसे बड़ा निर्यातक है; इस पहल का लक्ष्य भारत को शीर्ष 3 में लाना है।
मौजूदा योजनाओं के साथ तालमेल (Synergy):
- PM MITRA: बड़े पार्कों के निर्माण से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।
- ATUFS: तकनीक के उन्नयन में मदद मिलेगी।
- One District One Product (ODOP): यूपी के संदर्भ में, यह पहल ODOP (जैसे भदोही की कालीन, लखनऊ की चिकनकारी) को वैश्विक निर्यात हब बनाने में सीधा सहयोग करेगी।
भारत में वस्त्र क्षेत्र (Textile Sector)
- कृषि के बाद रोजगार प्रदान करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र
- भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो न केवल जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान देता है बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करता है
- वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का वस्त्र और परिधान (हस्तशिल्प सहित) निर्यात 37,755 मिलियन डॉलर रहा जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि है।
- भारत विश्व स्तर पर कपड़े का छठा सबसे बड़ा निर्यातक है
- 2023-24 में देश के कुल निर्यात में 8.21% का योगदान देता है, यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार में 4.5% हिस्सेदारी रखता है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ भारत के कपड़ा और परिधान निर्यात की 47% हिस्सेदारी रखते हैं।
- रोजगार के दृष्टिकोण से, कपड़ा उद्योग 45 मिलियन से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है और अप्रत्यक्ष रूप से 100 मिलियन से अधिक लोगों की आजीविका में सहयोग करता है, जिसमें महिलाओं और ग्रामीण श्रमिकों का एक बड़ा हिस्सा शामिल है।
- GDP में योगदान : लगभग 2% से 2.3%
- औद्योगिक उत्पादन (IIP) : कुल औद्योगिक उत्पादन का लगभग 13%
- रोजगार : 4.5 करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार (कृषि के बाद दूसरा)
- बाजार का आकार : 2030 तक $350 बिलियन तक पहुँचने का लक्ष्य
भारत की वैश्विक स्थिति (Global Positioning) :
- कपास (Cotton): भारत विश्व का सबसे बड़ा कपास उत्पादक है (वैश्विक उत्पादन का लगभग 23%)।
- जूट (Jute): विश्व में जूट का सबसे बड़ा उत्पादक।
- रेशम (Silk): चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा रेशम उत्पादक।
- मानव निर्मित रेशा (MMF): पॉलिएस्टर और विस्कोस उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर।
प्रमुख सरकारी योजनाएं (Policy Support) :
- PM MITRA : 7 मेगा टेक्सटाइल पार्क (उत्तर प्रदेश के लखनऊ-हरदोई समेत) विकसित करना
- PLI योजना : मैन-मेड फाइबर (MMF) और तकनीकी वस्त्रों के उत्पादन के लिए वित्तीय प्रोत्साहन। (अवधि: 31 मार्च 2026 तक विस्तारित)
- SAMARTH : वस्त्र क्षेत्र में कौशल विकास के लिए (लाखों लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य)
- कॉटन मिशन (5 वर्षीय) : अतिरिक्त लंबे रेशे (ELS) वाले कपास की उत्पादकता बढ़ाने के लिए 2025 में घोषित









