15 December, 2025
भारत द्वारा जैव-बिटुमेन का वाणिज्यिक उत्पादन
Thu 08 Jan, 2026
संदर्भ
भारत ने सतत अवसंरचना विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारत सड़क निर्माण के लिए जैव-बिटुमेन (Bio-Bitumen) का वाणिज्यिक उत्पादन करने वाला विश्व का पहला देश बन गया है। यह उपलब्धि भारत के हरित विकास, परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy), ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है।
जैव-बिटुमेन को पारंपरिक पेट्रोलियम-आधारित बिटुमेन के पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम भारत के परिवहन, ऊर्जा और पर्यावरण नीति में एक निर्णायक परिवर्तन को दर्शाता है।
जैव-बिटुमेन क्या है?
जैव-बिटुमेन एक नवीकरणीय एवं टिकाऊ पदार्थ है, जिसका उपयोग सड़क निर्माण में पारंपरिक बिटुमेन के विकल्प के रूप में किया जाता है। इसका निर्माण जैव-आधारित कच्चे माल से किया जाता है, जैसे—
- कृषि अवशेष (फसल के डंठल, पराली)
- जैव-तेल (Bio-oil)
- लिग्निन-युक्त जैविक अपशिष्ट
- गैर-खाद्य जैव-अपशिष्ट
जहाँ पारंपरिक बिटुमेन कच्चे तेल पर निर्भर होता है, वहीं जैव-बिटुमेन कार्बन उत्सर्जन को कम करता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाता है।
जैव-बिटुमेन का महत्व
1. पर्यावरणीय महत्व
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी
- सड़क निर्माण का कार्बन फुटप्रिंट कम
- कृषि अपशिष्ट के उपयोग से वेस्ट-टू-वेल्थ को बढ़ावा
- पराली जलाने की समस्या में कमी, जिससे वायु प्रदूषण घटेगा
2. आर्थिक लाभ
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी
- विदेशी मुद्रा की बचत
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन
- हरित तकनीक आधारित स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा
3. रणनीतिक महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती
- आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस कदम
- सतत अवसंरचना में भारत को वैश्विक नेतृत्व
वाणिज्यिक उत्पादन क्यों महत्वपूर्ण है?
विश्व के कई देश अभी जैव-बिटुमेन को प्रयोगात्मक या पायलट चरण में ही आज़मा रहे हैं। भारत की विशेष उपलब्धि यह है कि उसने इसे वाणिज्यिक स्तर पर लागू कर दिया है।
वाणिज्यिक उत्पादन का अर्थ है—
- तकनीकी व्यवहार्यता सिद्ध
- लागत प्रभावी उत्पादन
- सड़क निर्माण मानकों के अनुरूप गुणवत्ता
- बड़े पैमाने पर उपयोग की क्षमता
यह प्रयोगशाला-स्तरीय नवाचार से आगे बढ़कर वास्तविक अवसंरचना परियोजनाओं में उपयोग का मार्ग प्रशस्त करता है।
भारत के सड़क अवसंरचना क्षेत्र में भूमिका
भारत के पास विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है (लगभग 65 लाख किमी)। प्रतिवर्ष सड़क निर्माण में बड़ी मात्रा में बिटुमेन की खपत होती है।
जैव-बिटुमेन के उपयोग से—
- सड़क परियोजनाएँ अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनेंगी
- सड़क की दीर्घायु और तापीय सहनशीलता बढ़ेगी
- रख-रखाव लागत में कमी आएगी
यह पहल भारतमाला परियोजना, पीएम गति शक्ति और राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन जैसी योजनाओं के अनुरूप है।
राष्ट्रीय और वैश्विक प्रतिबद्धताओं से सामंजस्य
राष्ट्रीय स्तर पर
- 2070 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य
- राष्ट्रीय जैव-ऊर्जा मिशन
- परिपत्र अर्थव्यवस्था नीति
- स्वच्छ भारत मिशन
वैश्विक स्तर पर
- पेरिस जलवायु समझौता
- संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (SDGs):
-
- SDG-9 (अवसंरचना)
- SDG-12 (जिम्मेदार उपभोग)
- SDG-13 (जलवायु कार्रवाई)
चुनौतियाँ
- कच्चे जैव-संसाधनों की स्थायी आपूर्ति
- गुणवत्ता मानकीकरण
- प्रारंभिक लागत
- राष्ट्रीय स्तर पर समान तकनीकी मानक
हालाँकि, नीति समर्थन और तकनीकी विकास से इन चुनौतियों का समाधान संभव है।
आगे की राह
- IRC (Indian Roads Congress) मानकों में जैव-बिटुमेन का समावेश
- हरित सामग्री उपयोग पर प्रोत्साहन
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी
- विकासशील देशों को निर्यात की संभावना









