15 December, 2025
चालू रबी सीजन (2025-26) में फसलों की बुआई
Wed 07 Jan, 2026
संदर्भ :
- कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जनवरी 2026 में जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, चालू रबी सीजन (2025-26) में फसलों की बुआई ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
मुख्य बिन्दु :
- कुल बुआई क्षेत्र: 2 जनवरी 2026 तक देश में कुल 634.14 लाख हेक्टेयर भूमि में रबी फसलों की बुआई हो चुकी है।
- गेहूं की बुआई 312 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में और धान की रोपाई 42 लाख हेक्टेयर में हुई है।
- दलहन की बुआई 140 लाख हेक्टेयर में हुई है जो पिछले वर्ष के मुकाबले 10 लाख हेक्टेयर अधिक है।
- श्रीअन्न और मोटे अनाज की बुआई 55 लाख हेक्टेयर और तिलहन की बुआई 86 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि में की गई है।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में गेहूँ की बुआई का रकबा बढ़ा है, जबकि राजस्थान में तिलहन के रकबे में अच्छी प्रगति देखी गई है
- रबी बुवाई में मजबूत वृद्धि दर्ज
- कुल कृषि क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में 16.4 लाख हेक्टेयर बढ़ा
- दलहन कृषि क्षेत्र 3.43 लाख हेक्टेयर बढ़ा
- चने की बुवाई में 4.66 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज
- रबी फसल का कुल कृषि क्षेत्र 634.14 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जो इस मौसम की स्थिर प्रगति को दर्शाता है
रबी फसलें :
- भारत में सर्दियों के मौसम (अक्टूबर-नवंबर) में बोई जाने वाली और वसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में काटी जाने वाली मुख्य फसलें हैं।
- बुआई का समय: अक्टूबर से दिसंबर के बीच, जब मानसून समाप्त हो जाता है और तापमान कम होने लगता है
- कटाई का समय: मार्च से मई के बीच
- जलवायु की आवश्यकता: बुआई के समय ठंडी जलवायु और फसलों के पकने के समय शुष्क व गर्म वातावरण की आवश्यकता होती है
- मुख्य फसलें: गेहूँ, जौ, जई (अनाज), चना, मटर, मसूर (दलहन), सरसों, अलसी (तिलहन), और आलू
महत्वपूर्ण जानकारी :
- सरकार ने रबी 2025–26 के लिए पोषक-तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) दरों को स्वीकृति प्रदान की है, जो 1 अक्टूबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेंगी। यह फॉस्फेटिक एवं पोटाशिक (P&K) उर्वरकों पर लागू होंगी, जिनमें DAP तथा NPKS ग्रेड भी शामिल हैं।
- रबी 2025–26 के लिए अनुमानित बजटीय आवश्यकता लगभग ₹37,952 करोड़ है, जो साल 2025 के खरीफ सीज़न की बजटीय आवश्यकता की तुलना में लगभग ₹736 करोड़ अधिक है।
- वर्ष 2022–23 से 2024–25 के दौरान एनबीएस सब्सिडी के लिए ₹2.04 लाख करोड़ से अधिक का आवंटन किया गया है, जिससे उर्वरकों की वहनीय उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
- NBS के माध्यम से घरेलू उर्वरक उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- P&K (DAP & NPKS) उर्वरकों का उत्पादन वर्ष 2014 के 112.19 LMT से बढ़कर वर्ष 2025 (30.12.2025 तक) में 168.55 LMT हो गया है, जो इस अवधि के दौरान 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है।
खरीफ फसल (Kharif Crops) :
- बुआई का समय: जून से जुलाई (मानसून आने पर)।
- कटाई का समय: सितंबर से अक्टूबर।
- प्रमुख फसलें: धान (चावल), मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, सोयाबीन, मूंगफली और तुअर (अरहर)।
- विशेषता: इन फसलों को अधिक पानी और गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है
जायद फसल (Zaid Crops) :
- ये रबी और खरीफ के बीच के खाली समय (ग्रीष्म ऋतु) में उगाई जाने वाली अल्पकालिक फसलें हैं।
- बुआई का समय: मार्च से अप्रैल।
- कटाई का समय: मई से जून।
- प्रमुख फसलें: तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, मूंग और विभिन्न प्रकार की सब्जियां व चारा।
- विशेषता: ये फसलें तेज गर्मी और शुष्क हवाओं को सहन कर सकती हैं।
फसलों का वर्गीकरण (उपयोग के आधार पर):
- खाद्यान्न फसलें: गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा।
- नगदी फसलें (Cash Crops): कपास, जूट, गन्ना, तंबाकू और तिलहन (ये बिक्री और लाभ के लिए उगाई जाती हैं)।
- पेय फसलें: चाय और कॉफी।
- बागवानी फसलें: फल, फूल और सब्जियां।









