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असम जनजातीय संगठनों की समन्वय समिति (CCTOA) विरोध

Tue 06 Jan, 2026

संदर्भ :

  • असम की प्रमुख जनजातीय संगठनों की छत्र संस्था कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ ट्राइबल ऑर्गेनाइजेशंस ऑफ असम (CCTOA) ने राज्य सरकार के मंत्रियों के समूह (Group of Ministers - GoM) की उस सिफारिश का स्पष्ट विरोध किया है।

मुख्‍य बिन्‍दु :

  • रिर्पोट में छह समुदायों—ताई अहोम, चुटिया, मोरान, मटक (मोतोक), कोच-राजबोंगशी और चाय बागान जनजाति (टी ट्राइब्स/आदिवासी)—को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की अनुशंसा की गई है।

CCTOA के विरोध के मुख्य कारण:

  • संवैधानिक और कानूनी आधार: CCTOA का कहना है कि यह प्रस्ताव असंवैधानिक और अवैध है, क्योंकि ये समुदाय लोकुर कमिटी (1965) के मानदंडों (आदिम लक्षण, विशिष्ट संस्कृति, भौगोलिक अलगाव, पिछड़ापन आदि) को पूरा नहीं करते।
  • ऐतिहासिक तथ्य: 1950 के संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश और बोर्दोलोई-ठक्कर सब-कमिटी की 1947 की रिपोर्ट में इन समुदायों को ST में शामिल नहीं किया गया था। ताई अहोम, चुटिया, मोरान और मटक को मुख्यधारा के असमिया समाज का हिस्सा माना गया।
  • कोच-राजबोंगशी मुद्दा: CCTOA के अनुसार, कोच और राजबोंगशी अलग-अलग समुदाय हैं। पश्चिम बंगाल में कोच को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा मिला हुआ है, इसलिए असम में उन्हें ST नहीं बनाया जा सकता।
  • चाय जनजाति: चाय बागान मजदूरों को बाहर से लाया गया था, इसलिए कई कमिटियों (1947 और 1965 सहित) ने उन्हें ST मानने से इनकार किया।
  • राजनीतिक मकसद: CCTOA का आरोप है कि इन समुदायों की मांग मुख्य रूप से पंचायत से लेकर विधानसभा तक राजनीतिक आरक्षण के लिए है, क्योंकि OBC को राजनीतिक आरक्षण नहीं मिलता।
  • मौजूदा ST के अधिकारों पर असर: यह कदम मौजूदा जनजातियों के आरक्षण, नौकरियों, शिक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करेगा।

अनुसूचित जनजाति दर्जे के मानदंड :

  • भारत में अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे के मानदंड संविधान में स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं, लेकिन लोकुर समिति (1965) की सिफारिशों पर आधारित हैं। राष्ट्रपति अनुच्छेद 342 के तहत सार्वजनिक अधिसूचना द्वारा समुदायों को ST घोषित करते हैं।

1. पारंपरिक अर्थव्यवस्था

  • प्राचीन आजीविका जैसे शिकार, संग्रहण, खाद्य संग्रह
  • पूर्व-आधुनिक सामाजिक-आर्थिक विशेषताएं (सीमित आधुनिकीकरण)

2. विशिष्ट संस्कृति व अलगाव

  • अलग भाषा, बोली या संप्रेषण पद्धति
  • विशिष्ट रीति-रिवाज, धार्मिक संस्कार, परंपराएं
  • भौगोलिक/सामाजिक अलगाव (पहाड़ी/जंगली क्षेत्रों में निवास)

3. सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ापन

  • राज्य की मुख्यधारा आबादी से निम्न साक्षरता दर
  • आर्थिक रूप से कमजोर (कम आय, उच्च गरीबी)
  • शोषण का ऐतिहासिक इतिहास

प्रक्रिया :

  • राज्य सरकार की सिफारिश: सबसे पहले संबंधित राज्य सरकार केंद्र को प्रस्ताव भेजती है।
  • भारतीय महापंजीयक (RGI) की मंजूरी: RGI इन मानदंडों के आधार पर समुदाय की जांच करता है।
  • राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST): इनकी भी राय ली जाती है।
  • संसद की मुहर: अंततः, राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से संसद में कानून बनाकर उस समुदाय को सूची में शामिल किया जाता है।

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