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नार्को-आतंकवाद

Mon 05 Jan, 2026

संदर्भ

नार्को-आतंकवाद उस खतरनाक गठजोड़ को दर्शाता है जिसमें मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क और आतंकी/सशस्त्र समूह एक-दूसरे को संसाधन, सुरक्षा और वित्त उपलब्ध कराते हैं। मादक पदार्थों से अर्जित धन का उपयोग हिंसा, राज्य संस्थाओं को कमजोर करने और राजनीतिक अस्थिरता फैलाने में किया जाता है। हाल के वर्षों में, वेनिज़ुएला में अमेरिकी कार्रवाई ने इस अवधारणा को फिर से वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

 

नार्को-आतंकवाद को समझना

नार्को-आतंकवाद एक परस्पर-लाभकारी संबंध पर आधारित होता है—

  • आतंकी/विद्रोही समूह क्षेत्रीय नियंत्रण, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स प्रदान करते हैं।
  • ड्रग कार्टेल वित्त, हथियार और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क उपलब्ध कराते हैं।

ऐतिहासिक रूप से कोलंबिया का FARC, पेरू का शाइनिंग पाथ, और अफगानिस्तान में तालिबान से जुड़े नेटवर्क इसके प्रमुख उदाहरण रहे हैं। कमजोर शासन, गरीबी, छिद्रिल सीमाएँ और दीर्घकालिक संघर्ष इस समस्या को बढ़ाते हैं।

 

सुरक्षा-आख्यान के रूप में नार्को-आतंकवाद

समय के साथ नार्को-आतंकवाद केवल आपराधिक समस्या न रहकर एक रणनीतिक सुरक्षा आख्यान बन गया है। कई शक्तिशाली राज्य इसे—

  • कठोर कूटनीति या सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराने,
  • अंतरराष्ट्रीय कानून की बाधाओं से बचने,
  • तथा घरेलू/अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए प्रयोग करते हैं।

इससे कानून-प्रवर्तन, आतंकवाद-रोध और शासन-परिवर्तन के बीच की सीमाएँ धुंधली हो जाती हैं।

 

वेनिज़ुएला मामला: हालिया घटनाक्रम

वेनिज़ुएला में हालिया अमेरिकी ऑपरेशन को नार्को-आतंकवाद, कोकीन तस्करी और सशस्त्र समूहों से कथित संबंधों के आधार पर उचित ठहराया गया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि राज्य तंत्र ड्रग नेटवर्क से जुड़ गया था।

हालाँकि, इस कार्रवाई पर कड़ी वैश्विक आलोचना हुई—

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्वीकृति के बिना कदम,
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) (राज्य संप्रभुता) का कथित उल्लंघन,
  • नागरिक हताहतों और समुद्री अवरोधों के आरोप।

यह प्रश्न उठता है कि क्या नार्को-आतंकवाद जैसे गंभीर अपराध के विरुद्ध कार्रवाई एकतरफा बल प्रयोग के रूप में की जानी चाहिए।

 

भू-राजनीतिक आयाम

वेनिज़ुएला प्रकरण यह दर्शाता है कि नार्को-आतंकवाद कैसे महाशक्ति राजनीति से जुड़ जाता है—

  1. ऊर्जा सुरक्षा: वेनिज़ुएला के विशाल तेल भंडार।
  2. अमेरिका–चीन प्रतिस्पर्धा: चीन के साथ वेनिज़ुएला के आर्थिक संबंध।
  3. मोनरो सिद्धांत की पुनरावृत्ति: अमेरिका का क्षेत्रीय वर्चस्व पुनर्स्थापित करने का प्रयास।

इसलिए आरोपों के पीछे रणनीतिक हित भी परिलक्षित होते हैं।

 

वैश्विक प्रभाव

यदि नार्को-आतंकवाद की अवधारणा का अति-विस्तार या दुरुपयोग होता है, तो—

  • एकतरफा हस्तक्षेप सामान्य हो सकता है,
  • अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुपक्षवाद कमजोर पड़ते हैं,
  • दोहरे मानदंड (selective justice) बढ़ते हैं।

यह वैश्विक शासन व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है।

 

भारत के लिए प्रासंगिकता

भारत के लिए नार्को-आतंकवाद एक प्रत्यक्ष सुरक्षा चुनौती है, विशेषकर पश्चिमी सीमाओं पर जहाँ ड्रग तस्करी आतंकवाद को वित्त देती है। भारत का दृष्टिकोण—

  • नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था,
  • संप्रभुता और अहस्तक्षेप,
  • तथा बहुपक्षीय सहयोग (खुफिया साझा करना, वित्तीय ट्रैकिंग) पर आधारित है।

वेनिज़ुएला मामला भारत की इस नीति को पुष्ट करता है कि आतंकवाद-रोध को भू-राजनीतिक प्रभुत्व का औजार नहीं बनना चाहिए।

निष्कर्ष

नार्को-आतंकवाद एक वास्तविक और गंभीर वैश्विक खतरा है, परंतु इसके नाम पर एकतरफा सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर करती है। प्रभावी समाधान के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून, पारदर्शिता और बहुपक्षीय सहमति अनिवार्य

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