राष्ट्रीय समाचार
‘दिल्ली मेट्रो फेज-5 (A)’ के विस्तार प्रस्ताव को मंजूरी

- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12,015 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से ‘दिल्ली मेट्रो फेज-5 (A)’ के विस्तार प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।
दिल्ली मेट्रो फेज-5 (A) की मुख्य विशेषताएं :
- कुल बजट : ₹12,014.91 करोड़ (लगभग ₹12,015 करोड़)
- कुल नए स्टेशन : 13 (10 अंडरग्राउंड और 3 एलिवेटेड)
- फंडिंग : केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां
मंजूर किए गए तीन प्रमुख कॉरिडोर :
- रामकृष्ण आश्रम मार्ग से इंद्रप्रस्थ (9.9 किमी): यह कॉरिडोर 'कर्तव्य पथ' और 'सेंट्रल विस्टा' क्षेत्र को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। इससे लगभग 60,000 सरकारी कर्मचारियों और 2 लाख पर्यटकों को लाभ होगा
- एरोसिटी से आईजीडी एयरपोर्ट टर्मिनल-1 (2.26 किमी): यह विस्तार घरेलू हवाई अड्डे (T1) को एरोसिटी के माध्यम से मेट्रो नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ेगा।
- तुगलकाबाद से कालिंदी कुंज (3.9 किमी): यह मार्ग साकेत, छतरपुर और कालिंदी कुंज जैसे दक्षिण दिल्ली के इलाकों को सीधे हवाई अड्डे से जोड़ने में मदद करेगा
- नेटवर्क का विस्तार: इस फेज के पूरा होने के बाद दिल्ली मेट्रो का कुल नेटवर्क 400 किलोमीटर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगा।
- प्रदूषण में कमी: अनुमान है कि इस विस्तार से हर साल करीब 33,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में कमी आएगी।
- कनेक्टिविटी: यह नोएडा और गुरुग्राम के बीच यात्रा करने वालों के लिए एक वैकल्पिक और छोटा मार्ग प्रदान करेगा।
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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) संरक्षण उपाय

- सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण उपायों को और सख्त करते हुए राजस्थान और गुजरात में ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) का नक्शा फिर से तैयार करने का आदेश दिया।
- यह फैसला पक्षी के प्राकृतिक आवास को बचाने और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के बीच संतुलन स्थापित करता है।
सम्बन्धित तथ्य :
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प्रमुख निर्देश :
- राजस्थान में 14,013 वर्ग किमी और गुजरात में 740 वर्ग किमी को प्राथमिकता संरक्षण क्षेत्र घोषित
- इन क्षेत्रों में 2 MW से बड़े सोलर/पवन प्रोजेक्ट्स पर रोक, ओवरहेड लाइनों को भूमिगत करने का आदेश
- ऊर्जा कंपनियों को CSR फंड GIB संरक्षण पर खर्च करने का निर्देश
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड:
- वैज्ञानिक नाम: Ardeotis nigriceps
- राजस्थान का राज्य पक्षी है
- भारत का सबसे गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षी माना जाता है
- घास के मैदान की प्रमुख प्रजाति मानी जाती है
सुरक्षा की स्थिति:
- अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट: गंभीर रूप से संकटग्रस्त
- वन्यजीवों एवं वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES): परिशिष्ट-1
- प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अभिसमय (CMS): परिशिष्ट-I
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972:- अनुसूची 1
- जून 2019 में MoEFCC, राजस्थान सरकार और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा जैसलमेर में डेज़र्ट नेशनल पार्क में एक संरक्षण प्रजनन सुविधा स्थापित की है
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भारत और नीदरलैंड के बीच NMHC के विकास के लिए MoU

- भारत और नीदरलैंड ने गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) के विकास के लिए समुद्री विरासत सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया।
- यह MoU भारत के बंदरगाह, शिपिंग एवं जलमार्ग मंत्रालय और एम्स्टर्डम के नेशनल मैराइटाइम म्यूजियम के बीच हुआ।
- दोनों देश संग्रहालय डिजाइन, संग्रह संरक्षण, संयुक्त प्रदर्शनियां, अनुसंधान परियोजनाएं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोग करेंगे। NMHC को इंटरैक्टिव और आधुनिक तकनीक से युक्त बनाया जाएगा।
राज्य समाचार
राष्ट्रीय पेसा महोत्सव

- ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 24 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय PESA महोत्सव के अवसर पर सभी PESA क्षेत्रों में विशेष ग्राम सभाओं की घोषणा की है।
- महोत्साव का आयोजन पंचायती राज मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय ने मिलकर किया है।
पेसा अधिनियम 1996 :
- संविधान के अनुच्छेद 243एम(4)(बी) के तहत संसद ने संविधान के भाग-IX के प्रावधानों को कुछ अपवादों और संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तारित करने हेतु “पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996” (जिसे पेसा अधिनियम कहा जाता है) अधिनियमित किया। अनुसूचित क्षेत्र वे इलाके हैं, जिन्हें माननीय राष्ट्रपति द्वारा घोषित किया जाता है।
- संविधान के अनुच्छेद 244(1) तथा पांचवीं अनुसूची में इन क्षेत्रों से संबंधित प्रावधान निहित हैं।
- चूंकि इन क्षेत्रों का उल्लेख संविधान की पांचवीं अनुसूची में किया गया है, इसलिए इन्हें पांचवीं अनुसूची क्षेत्र भी कहा जाता है।
- वर्तमान में, पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र 10 राज्यों में अधिसूचित हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना शामिल हैं।
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कश्मीर में चिल्लई-कलां की शुरूआत

- कश्मीर में चिल्लई-कलां, 40 दिनों की सबसे भीषण शीत ऋतु, 21 दिसंबर 2025 को शुरू हो चुकी है।
- यह 31 जनवरी 2026 तक चलेगी, जिसमें तापमान शून्य से नीचे गिरता है और भारी बर्फबारी होती है।
- इस दौरान डल झील, नदियां जम जाती हैं, ऊंचाई वाले क्षेत्र जैसे गुलमर्ग सफेद बर्फ से ढक जाते हैं।
कश्मीर का सर्दियों का चक्र
| नाम |
अवधि |
स्वभाव |
| चिल्लई-कलां |
40 दिन (21 Dec - 30 Jan) |
सबसे भीषण ठंड, भारी बर्फबारी। |
| चिल्लई-खुर्द |
20 दिन (31 Jan - 19 Feb) |
'छोटा बच्चा' - ठंड कम होने लगती है। |
| चिल्लई-बच्चा |
10 दिन (20 Feb - 2 March) |
'नन्हा बच्चा' - बसंत की आहट और हल्की ठंड। |
पुरस्कार और सम्मान
40 अंडर 40 लॉयर अवार्ड 2025

- सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता शुभम अवस्थी को 40 अंडर 40 लॉयर अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया।
सम्बन्धित तथ्य :
- आयोजन: यह पुरस्कार BW Legal World के छठे संस्करण (6th Edition) के दौरान नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में दिया गया
- चयन प्रक्रिया: शुभम अवस्थी का चयन कानूनी क्षेत्र के दिग्गजों की एक प्रतिष्ठित जूरी द्वारा कठोर साक्षात्कार और मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद किया गया
- आधार: उन्हें यह पुरस्कार मुख्य रूप से जनहित याचिकाओं (PILs), संवैधानिक कानून और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके प्रभावशाली कार्यों के लिए मिला है
शुभम अवस्थी :
- मानवीय कार्य: हाल ही में उन्हें लंदन स्थित वैश्विक संगठन 'वर्ल्ड ह्यूमैनिटेरियन ड्राइव' (WHD) का इंडिया चैप्टर के लिए डिप्टी सेक्रेटरी जनरल भी नियुक्त किया गया है।
- वैश्विक प्रतिनिधित्व: वह अक्टूबर 2025 में ब्रिटिश संसद (लंदन) में आयोजित 'ट्राइलेटरल ग्लोबल समिट' में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए भी चर्चा में रहे थे
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राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025

- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 प्रदान किया।
सम्बन्धित तथ्य :
- पुरस्कार के दूसरे संस्करण में पद्म विभूषण प्रोफेसर जयंत विष्णु नारलिकर को मरणोपरांत विज्ञान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया
- प्रोफेसर नारलिकर एक प्रसिद्ध भारतीय खगोल भौतिक विज्ञानी और ब्रह्मांड विज्ञानी थे, जिन्होंने 1960 के दशक में गुरुत्वाकर्षण और पदार्थ निर्माण को एकीकृत करने के लिए होयल-नारलिकर सिद्धांत विकसित किया और एक स्थिर ब्रह्मांड की परिकल्पना प्रस्तुत की
- डॉ. यूसुफ मोहम्मद शेख, जयन एन और प्रोफेसर महान महाराज सहित आठ वैज्ञानिकों को विज्ञान श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया
- इसरो के अंकुर गर्ग, आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अमित कुमार अग्रवाल और आईआईएससी बेंगलुरु के प्रोफेसर अर्काप्रवा बसु सहित चौदह युवा वैज्ञानिकों को विज्ञान युवा-शांति स्वरूप भटनागर श्रेणी के अंतर्गत सम्मानित किया गया
- विज्ञान टीम पुरस्कार टीम अरोमा मिशन CSIR को दिया गया
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अंतर्राष्ट्रीय दिवस
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस

- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के राष्ट्रपति द्वारा अधिनियमित होने की स्मृति में प्रतिवर्ष 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।
सम्बन्धित तथ्य :
- ऐतिहासिक संदर्भ: 24 दिसंबर, 1986 को तत्कालीन राष्ट्रपति (ज्ञानी जैल सिंह) ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act), 1986 को मंजूरी दी थी।
- इसी ऐतिहासिक क्षण की याद में वर्ष 2000 से प्रतिवर्ष यह दिवस मनाया जाता है।
- नया अधिनियम: हालांकि आधार 1986 का कानून है, लेकिन समय के साथ बदलते बाजार (ई-कॉमर्स) को देखते हुए सरकार ने अब उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 लागू कर दिया है, जिसने 1986 वाले कानून की जगह ली है
उपभोक्ता के 6 मौलिक अधिकार :
- सुरक्षा का अधिकार: हानिकारक वस्तुओं से सुरक्षा
- सूचना का अधिकार: वस्तु की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता और कीमत जानने का हक
- चयन का अधिकार: प्रतिस्पर्धी कीमतों पर विभिन्न विकल्पों में से चुनने का अधिकार
- सुने जाने का अधिकार: उपयुक्त मंचों पर उपभोक्ता की शिकायतों पर विचार होना
- शिकायत निवारण का अधिकार: अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ हर्जाना पाने का हक
- उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार: जागरूक बनने के लिए जानकारी और कौशल प्राप्त करना
- विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस: 15 मार्च
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विज्ञान और प्रौद्योगिकी
ब्लू बर्ड ब्लॉक-2 के प्रक्षेपण

- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 24 दिसंबर 2025 को आंध्र प्रदेश स्थित श्रीहरिकोटा से अपने सबसे भारी प्रक्षेपण यान LVM3-M6 के माध्यम से अगली पीढ़ी के अमेरिकी संचार उपग्रह ‘ब्लूबर्ड ब्लॉक-2’ का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया।
LVM3-M6 / ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 मिशन :
- प्रक्षेपण यान : LVM3-M6 (जिसे 'बाहुबली' रॉकेट भी कहा जाता है)
- उपग्रह (Payload) : ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 (BlueBird Block-2)
- उपग्रह का वजन : लगभग 6,100 किलोग्राम (6.1 टन)
- उपग्रह का वजन : लगभग 6,100 किलोग्राम (6.1 टन)
- निर्माता कंपनी : AST SpaceMobile (अमेरिका)
अन्य विशेषता :
- यह अब तक का सबसे भारी व्यावसायिक उपग्रह है जिसे इसरो ने भारतीय धरती से लॉन्च किया है
- 'ब्लूबर्ड ब्लॉक-2' उपग्रह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सीधे आपके साधारण स्मार्टफोन (4G/5G) को सैटेलाइट नेटवर्क से जोड़ सकेगा। इसके लिए किसी विशेष सैटेलाइट फोन या बड़े एंटीना की आवश्यकता नहीं होगी।
- इस उपग्रह में 223 वर्ग मीटर का 'फेज्ड ऐरे एंटीना' लगा है, जो निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में तैनात अब तक का सबसे बड़ा व्यावसायिक एंटीना है।
- यह न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और अमेरिकी कंपनी AST SpaceMobile के बीच एक बड़ा व्यावसायिक समझौता है
- न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड, इसरो की वाणिज्यिक शाखा है।
LVM3 रॉकेट तीन चरणों वाला यान है:
- S200: दो ठोस स्ट्रैप-ऑन मोटर्स
- L110: तरल कोर स्टेज (Vikas Engine)
- C25: क्रायोजेनिक अपर स्टेज (सबसे शक्तिशाली चरण)
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चर्चित व्यक्ति
साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन

- ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
सम्बन्धित तथ्य :
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विनोद कुमार शुक्ल: साहित्य का सफर और प्रमुख उपलब्धियां :
| सम्मान/पुरस्कार |
वर्ष |
टिप्पणी |
| ज्ञानपीठ पुरस्कार |
2023-24 |
यह साहित्य का भारत में सर्वोच्च सम्मान है। |
| पेन/नाबोकोव अवार्ड |
2023 |
अंतरराष्ट्रीय साहित्य में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए। |
| साहित्य अकादमी पुरस्कार |
1999 |
उनके उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' के लिए। |
| मातृभूमि बुक ऑफ द ईयर |
2020 |
'ब्लू इज लाइक ब्लू' के लिए। |
प्रमुख रचनाएँ :
- उपन्यास: नौकर की कमीज (इस पर मशहूर निर्देशक मणि कौल ने फिल्म भी बनाई थी), दीवार में एक खिड़की रहती थी, खिलेगा तो देखेंगे
- कविता संग्रह: सब कुछ होना बचा रहेगा, वह आदमी चला गया नया गरम कोट पहनकर विचार की तरह, लगभग जयहिंद
- विशेष शैली: "विचार की तरह जीना"
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रक्षा समाचार
भारतीय तटरक्षक बल का प्रथम प्रदूषण नियंत्रण पोत, 'समुद्र प्रताप'

- भारतीय तटरक्षक बल ने गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में अपने प्रथम प्रदूषण नियंत्रण पोत, 'समुद्र प्रताप' को शामिल किया।
सम्बन्धित तथ्य :
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'समुद्र प्रताप' (Samudra Pratap):
- प्रकार : प्रदूषण नियंत्रण पोत (Pollution Control Vessel - PCV)
- निर्माता : गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL)
- लंबाई : लगभग 114.5 मीटर
- विस्थापन : लगभग 4,170 टन
- मुख्य कार्य : समुद्र में तेल रिसाव (Oil Spill) को रोकना और पर्यावरण संरक्षण
प्रमुख विशेषताएँ :
- इसमें तेल को समुद्र की सतह से हटाने के लिए अत्याधुनिक 'कंटेनमेंट बूम' (Containment Booms) और 'ऑयल स्किमर्स' (Oil Skimmers) लगे हैं
- यह पोत उन्नत रडार और सेंसर से लैस है जो समुद्र में होने वाले सूक्ष्म प्रदूषण का भी पता लगा सकता है
- स पोत पर एक मध्यम श्रेणी का हेलीकॉप्टर (जैसे ALH ध्रुव) लैंड कर सकता है
- यह 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत बनाया गया है, जिसमें 70% से अधिक सामग्री भारतीय है
भारतीय तटरक्षक बल :
- स्थापना: 1977, मुख्यालय: नई दिल्ली, आदर्श वाक्य: "वयं रक्षामः", महानिदेशक : डायरेक्टर जनरल परमेश शिवरामणि, 26वें, मोटो : "वयम रक्षामः"
- क्षेत्रीय कमांड :पश्चिमी क्षेत्र : मुंबई, पूर्वी क्षेत्र : चेन्नई, उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र : गांधीनगर, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र : कोलकाता, अंडमान-निकोबार क्षेत्र : पोर्ट ब्लेयर
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अगली पीढ़ी की आकाश मिसाइल प्रणाली का परीक्षण

- रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अगली पीढ़ी की आकाश मिसाइल (आकाश-NG) प्रणाली का परीक्षण पूरा किया।
- यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में हुए, जिसमें मिसाइल ने कम ऊंचाई वाले तेज गति वाले हवाई लक्ष्यों को सटीक नष्ट किया।
सम्बन्धित तथ्य :
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आकाश-NG मिसाइल की प्रमुख विशेषताएं :
- प्रकार : सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Surface-to-Air Missile - SAM)
- मारक क्षमता (Range) : लगभग 40 से 80 किलोमीटर
- अधिकतम गति : 2.5 Mach (ध्वनि की गति से ढाई गुना तेज़)
- ईंधन (Propulsion) : दोहरे चरण वाला ठोस रॉकेट मोटर (Dual Pulse Solid Rocket Motor)
- रडार प्रणाली : स्वदेशी 'राजेंद्र' का उन्नत संस्करण और एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे (AESA) रडार
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) :
- स्थापना: 1958
- मुख्यालय: नयी दिल्ली
- अधीनता: रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
- मुख्य उद्देश्य: भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों का विकास करना
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दुर्लभ सुपरकिलोनोवा की पहचान

- IIT बॉम्बे और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA), बंगलूरू के वैज्ञानिकों की भागीदारी वाले अंतर्राष्ट्रीय शोध दल ने 'सुपरकिलोनोवा' नामक असाधारण ब्रह्मांडीय विस्फोट की संभावित खोज की है।
- यह ZTF25abjmnps (AT2025ulz) नामक घटना LIGO-Virgo-KAGRA के गुरुत्वाकर्षण तरंग सिग्नल S250818k से जुड़ी है।
सम्बन्धित तथ्य :
- सुपरकिलोनोवा सुपरनोवा के अंदर दो न्यूट्रॉन तारों (जिनमें से एक सूर्य से कम द्रव्यमान वाला) के विलय से उत्पन्न होता है। पहले किलोनोवा जैसी लाल चमक, फिर सुपरनोवा जैसी नीली रोशनी देखी गई।
- IIT बॉम्बे के STAR लैब और IIA ने बहु-तरंगीय अवलोकन में भाग लिया। यह 1.3 अरब प्रकाश वर्ष दूर की घटना भारी तत्वों (सोना, प्लेटिनम) निर्माण समझने में मदद करेगी।
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